*मतदाता सूची पर आपत्तियों के जरिए चुनाव आयोग को गुमराह करने का आरोप: तिलकराज बेहड़*

दोहरे मतदाता होने के नाम पर हजारों आपत्तियां राजनीतिक दबाव का हिस्सा: बेहड़

रुद्रपुर। एसआईआर के द्वितीय चरण में मतदाता सूचियों में एक से अधिक स्थानों पर नाम होने के आधार पर हजारों आपत्तियां दर्ज कराए जाने को लेकर किच्छा विधायक तिलकराज बेहड़ ने पूर्व विधायक राजेश शुक्ला और भाजपा नेता राजेश तिवारी पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि आपत्तियों के माध्यम से चुनाव आयोग को गुमराह करने का प्रयास किया जा रहा है। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि केवल नाम, पिता या पति का नाम समान होने के आधार पर किसी मतदाता को फर्जी या अपात्र नहीं माना जा सकता। इसके लिए फोटो और परिवार के अन्य सदस्यों का भी सत्यापन जरूरी है।

पत्रकार वार्ता में बेहड़ ने बताया कि पूर्व विधायक राजेश शुक्ला के करीबी भाजपा नेता राजेश तिवारी की ओर से करीब 7,500 मतदाताओं के नामों पर आपत्तियां दर्ज कराई गई हैं। उन्होंने विभिन्न मतदाता सूचियों की प्रतियां दिखाते हुए दावा किया कि कई लोगों के नाम उत्तराखंड के साथ-साथ उत्तर प्रदेश, बिहार और पश्चिम बंगाल समेत अन्य राज्यों की मतदाता सूचियों में भी दर्ज हैं।

बेहड़ ने दावा किया कि राजेश तिवारी पुत्र राम जन्म तिवारी का नाम किच्छा के अलावा गोपालगंज (बिहार), कोलकाता (पश्चिम बंगाल) और बलिया (उत्तर प्रदेश) की मतदाता सूचियों में भी दर्ज है। उन्होंने कहा कि यदि तिवारी ने बड़ी संख्या में मतदाताओं के खिलाफ आपत्तियां दर्ज कराई हैं तो उन्हें पहले अपने नाम की भी जांच करानी चाहिए थी।

विधायक ने पूर्व विधायक राजेश शुक्ला के परिवार के कुछ सदस्यों के नाम भी अलग-अलग मतदाता सूचियों में दर्ज होने का दावा किया। उन्होंने कहा कि सचिन शुक्ला, आशीष शुक्ला और दिनेश शुक्ला समेत कई नामों को लेकर भी जांच की जरूरत है। वार्ता के दौरान उन्होंने विभिन्न समुदायों के कई लोगों के नामों का भी उल्लेख किया, जिनके नाम अलग-अलग राज्यों की मतदाता सूचियों में होने का दावा किया गया।

बेहड़ ने कहा कि एक से अधिक स्थानों पर नाम होना अपने आप में यह साबित नहीं करता कि सभी नाम गलत हैं। उन्होंने कहा कि आपत्तियों की जांच के दौरान संबंधित मतदाता की फोटो, परिवार के सदस्यों और अन्य विवरणों का मिलान किया जाना चाहिए। इससे वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो जाएगी।

उन्होंने कहा कि मतदाता सूची में आपत्ति दर्ज कराने के बाद उसे नियमानुसार प्रमाणित करना भी आवश्यक है। गलत आपत्ति पाए जाने पर कानूनी प्रावधानों के तहत कार्रवाई का प्रावधान है। बेहड़ ने स्पष्ट किया कि राजनीतिक दबाव में किसी भी पात्र मतदाता का नाम मतदाता सूची से हटने नहीं दिया जाएगा। यदि ऐसा किया गया तो वे न्यायालय की शरण लेंगे।

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