*_”हमने अनुमति दे दी है!”– अमेरिका ने दुनिया को दी रूसी तेल खरीदने की बड़ी राहत, भड़के G7 देश_*

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*_”हमने अनुमति दे दी है!”– अमेरिका ने दुनिया को दी रूसी तेल खरीदने की बड़ी राहत, भड़के G7 देश_*
वॉशिंगटन: पश्चिम एशिया में जारी भीषण युद्ध ने दुनिया के ऊर्जा समीकरणों को पूरी तरह बदल दिया है. ईरान और इजरायल के बीच छिड़ी जंग और हॉर्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने से वैश्विक तेल आपूर्ति ठप हो गई है. ऐसे में दुनिया को महंगाई से बचाने के लिए अमेरिका ने रूसी तेल पर लगे प्रतिबंधों में जो ढील दी है, उसने अब एक नया कूटनीतिक विवाद खड़ा कर दिया है.
रूस ने शुक्रवार को दोटूक शब्दों में कहा कि उसके तेल के बिना वैश्विक ऊर्जा बाजार कभी “स्थिर नहीं रह सकता”. मॉस्को अब वॉशिंगटन पर यूक्रेन युद्ध के दौरान लगाए गए सभी प्रतिबंधों को हटाने के लिए दबाव बना रहा है.
अमेरिका का फैसला और ‘जी-7’ में दरार
अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने गुरुवार को एक विशेष लाइसेंस जारी किया, जिसके तहत 12 मार्च 2026 तक जहाजों पर लदे रूसी कच्चे तेल और पेट्रोलियम उत्पादों को 11 अप्रैल तक बेचने की अनुमति दी गई है. यह कदम तब उठाया गया जब इस हफ्ते तेल की कीमतें $120 प्रति बैरल के पार चली गईं, जो महामारी के बाद का उच्चतम स्तर है.
हालांकि, अमेरिका के इस फैसले से उसके पश्चिमी सहयोगी, विशेष रूप से G7 (जी-7) देश खुश नहीं हैं. फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने जी-7 की वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में स्पष्ट किया कि हॉर्मुज जलडमरूमध्य की बंदी का मतलब यह कतई नहीं है कि रूस पर से प्रतिबंध हटा लिए जाएं. मैक्रों ने कहा, “यूक्रेन पर हमारा रुख नहीं बदलना चाहिए.”
रूस का पलटवार: “प्रतिबंध हटाना अब मजबूरी”
रूस के आर्थिक दूत किरिल द्मित्रिएव ने टेलीग्राम पर एक पोस्ट में कहा कि अमेरिका अब हकीकत स्वीकार कर रहा है. उन्होंने लिखा, “बढ़ते ऊर्जा संकट के बीच रूसी ऊर्जा स्रोतों पर से प्रतिबंध हटाना अब अनिवार्य होता जा रहा है. अमेरिका प्रभावी रूप से यह मान रहा है कि रूसी तेल के बिना दुनिया नहीं चल सकती.”
दमित्रिएव ने यह भी खुलासा किया कि उन्होंने हाल ही में फ्लोरिडा में अमेरिकी वार्ताकारों के साथ एक “सफल बैठक” की है, जो ईरान युद्ध शुरू होने के बाद दोनों देशों के बीच पहली सीधी बातचीत है.

क्या है अमेरिका की सफाई?
बढ़ते विरोध के बीच अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेन्ट ने सफाई दी है कि यह छूट केवल “अल्पकालिक और सीमित” है. उनका तर्क है कि चूंकि यह तेल पहले ही निकाला जा चुका है, इसलिए इसकी बिक्री से रूसी सरकार को कोई नया टैक्स लाभ नहीं होगा. अमेरिका का मुख्य उद्देश्य फिलहाल अपने देश में ईंधन की कीमतों को कम करना और वैश्विक सप्लाई चेन को टूटने से बचाना है.

अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेन्ट ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर इस ऐतिहासिक फैसले की पुष्टि की. उन्होंने कहा, “राष्ट्रपति ट्रंप वैश्विक ऊर्जा बाजारों में स्थिरता लाने और कीमतों को कम रखने के लिए निर्णायक कदम उठा रहे हैं. @USTreasury अब उन सभी देशों को रूसी तेल खरीदने की अस्थायी अनुमति दे रहा है, जिसका माल वर्तमान में जहाजों पर समुद्र में फंसा हुआ है.”

क्या है ’30-Day Global Waiver’ की शर्तें?
अमेरिका ने इस छूट को “बेहद सटीक और सीमित” बताया है.
केवल पारगमन तेल: यह अनुमति केवल उसी रूसी तेल के लिए है जो 12 मार्च 2026 तक पहले से ही समुद्र में लोड होकर निकल चुका था. यह नए तेल उत्पादन या नए सौदों पर लागू नहीं होती.
रूस को लाभ नहीं: बेसेन्ट के अनुसार, चूंकि रूस अपने तेल राजस्व का बड़ा हिस्सा ‘एक्सट्रैक्शन’ (निकालने) के समय टैक्स से वसूलता है, जो वह पहले ही वसूल चुका है, इसलिए इस फंसे हुए तेल की बिक्री से पुतिन सरकार को कोई नया बड़ा वित्तीय लाभ नहीं होगा.


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