*_राजनाथ सिंह जैसलमेर पहुंचे, ‘शौर्य पार्क’ और ‘कैक्टस पार्क’ का किया उद्घाटन, आर्मी कमांडर्स कॉन्फ्रेंस में लेंगे भाग_*

*_राजनाथ सिंह जैसलमेर पहुंचे, ‘शौर्य पार्क’ और ‘कैक्टस पार्क’ का किया उद्घाटन, आर्मी कमांडर्स कॉन्फ्रेंस में लेंगे भाग_*

जैसलमेर: रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह दो दिवसीय जैसलमेर दौरे पर गुरुवार शाम जैसलमेर पहुंचे. वायुसेना स्टेशन पर उनके पहुंचने पर आर्मी और एयरफोर्स के वरिष्ठ अधिकारियों ने उनकी अगवानी की. इस दौरान जैसलमेर जिला कलेक्टर प्रताप सिंह, एसपी अभिषेक शिवहरे, बाड़मेर-जैसलमेर सांसद उम्मेदाराम बेनीवाल, विधायक छोटू सिंह भाटी सहित कई भाजपा पदाधिकारी मौजूद रहे. वायुसेना स्टेशन से राजनाथ सिंह आर्मी स्टेशन के लिए रवाना हुए, जहां पहुंचकर उन्होंने ‘शौर्य पार्क’ और ‘कैक्टस पार्क’ का उद्घाटन किया.

तनोट माता के दर्शन और लोंगेवाला में श्रद्धांजलि: सेना की ओर से जारी कार्यक्रम के अनुसार शुक्रवार सुबह 8:40 बजे रक्षा मंत्री हेलीकॉप्टर से तनोट जाएंगे, जहां तनोट माता के दर्शन कर विशेष पूजा-अर्चना करेंगे. इसके बाद वे लोंगेवाला युद्धस्थल जाकर शहीदों को श्रद्धांजलि देंगे और जवानों से संवाद करेंगे. सेना की ऑपरेशनल तैयारियों का प्रदर्शन भी वे स्वयं देखेंगे.

 

आर्मी कमांडर्स कॉन्फ्रेंस: रक्षा मंत्री इसके बाद जैसलमेर में आयोजित आर्मी कमांडर्स कॉन्फ्रेंस में शामिल होंगे. इस बार सम्मेलन की थीम “Year of Reforms” यानी सुधारों का वर्ष रखी गई है. बैठक में सेना के वरिष्ठ अधिकारी सैन्य आधुनिकीकरण, तकनीकी सुधार, और तीनों सेनाओं के बीच तालमेल जैसे विषयों पर गहन चर्चा करेंगे. इस कॉन्फ्रेंस का मुख्य उद्देश्य भारतीय सेना को आधुनिक, तकनीकी और भविष्य की चुनौतियों के अनुरूप तैयार करना है.

अग्निवीर योजना पर बड़ा निर्णय संभव: सेना से मिली जानकारी के अनुसार इस बैठक में अग्निवीर योजना की समीक्षा भी की जाएगी. फिलहाल योजना के तहत 25% अग्निवीरों को चार वर्ष की सेवा के बाद स्थायी किया जाता है, जिसे बढ़ाकर 75% करने का प्रस्ताव रखा गया है. अगले वर्ष अग्निवीरों का पहला बैच चार साल की सेवा पूरी करेगा, इसलिए यह बैठक उनके भविष्य के लिए अहम मानी जा रही है.

 

मिशन ‘सुदर्शन चक्र’ पर चर्चा: कॉन्फ्रेंस में पूर्व सैनिकों की विशेषज्ञता के उपयोग पर भी विचार किया जाएगा. अब सरकार उन्हें केवल वेलफेयर कार्यों तक सीमित न रखकर रणनीतिक और प्रशासनिक भूमिकाओं में शामिल करने की योजना बना रही है. इसके साथ ही मिशन ‘सुदर्शन चक्र’, गोला-बारूद आपूर्ति, और सैन्य उपकरणों की स्थिति की समीक्षा भी की जाएगी. थलसेना, नौसेना और वायुसेना के बीच सामंजस्य को मजबूत करने पर भी विशेष ध्यान रहेगा. साझा प्रशिक्षण, उपकरणों का मानकीकरण, लॉजिस्टिक्स और सप्लाई चेन में सुधार जैसे विषय प्रमुख रहेंगे. भविष्य में थिएटर कमांड्स की स्थापना की दिशा में इसे महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है.

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