*_CBSE का बड़ा फैसला: कोएंप्ट ही करेगी 12वीं की कॉपियों की दोबारा स्कैनिंग, सिर्फ 30 हजार पन्नों में थी तकनीकी खामी_*

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*_CBSE का बड़ा फैसला: कोएंप्ट ही करेगी 12वीं की कॉपियों की दोबारा स्कैनिंग, सिर्फ 30 हजार पन्नों में थी तकनीकी खामी_*

नई दिल्ली। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) ने विवादों में घिरी कोएंप्ट एडुटेक पर एक बार फिर भरोसा जताते हुए 12वीं बोर्ड परीक्षा की उत्तर पुस्तिकाओं के पुनर्मूल्यांकन से जुड़ी स्कैनिंग का कार्य उसी कंपनी को सौंपा है।हालांकि, बोर्ड ने सुरक्षा संबंधी चिंताओं को देखते हुए आनलाइन स्क्रीन मार्किंग (ओएसएम) प्रणाली से जुड़ा पूरा डाटा और रिकार्ड कंपनी के सर्वर से अपने नियंत्रण वाले सर्वर पर स्थानांतरित कर लिया है।

बता दें कि कोएंप्ट की भूमिका ऐसे समय में बनी हुई है जब सीबीएसई की उत्तर पुस्तिका सत्यापन, फोटोकापी और पुनर्मूल्यांकन सेवाओं के लिए इस्तेमाल होने वाली ओएसएम प्रणाली में खामियों की शिकायतें सामने आई थीं।

पूरे मामले की सुरक्षा जांच में शामिल आइआइटी के एक अधिकारी ने बताया कि पुनर्मूल्यांकन प्रक्रिया में कोएंप्ट के ओएसएम प्लेटफार्म का इस्तेमाल जारी रहेगा। कंपनी पुनर्मूल्यांकन के लिए आवेदन करने वाले छात्रों की उत्तर पुस्तिकाओं की स्कैनिंग करेगी।

कंपनी की विश्वसनीयता पर उठ रहे सवालों के बारे में पूछे जाने पर अधिकारी ने कहा कि कोएंप्ट अब तक करीब 40 करोड़ पन्नों की स्कैनिंग कर चुकी है, जिनमें केवल लगभग 30 हजार पन्नों में ही तकनीकी गड़बड़ी पाई गई।

उनके अनुसार यह अनुपात बेहद कम है और अब केवल उन सीमित समस्याग्रस्त पन्नों को दोबारा स्कैन किया जाना है, जिसे कंपनी आसानी से पूरा कर सकती है।सीबीएसई के अनुसार चार जून तक परिणामोत्तर शिकायत निवारण प्रणाली के तहत कुल 70,433 आवेदन प्राप्त हुए हैं। इनमें 7,314 आवेदन अंकों के सत्यापन और 63,119 आवेदन पुनर्मूल्यांकन के लिए हैं।

अधिकारी ने बताया कि पहले स्कैन की गई उत्तर पुस्तिकाएं और संबंधित डाटा वेंडर के सर्वर पर होस्ट किए गए थे। सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए पूरे डाटा को सीबीएसई के सर्वर पर स्थानांतरित किया गया है। साथ ही ओएसएम कोड की समीक्षा और आवश्यक सुधार कर इसे बोर्ड के अपने डिजिटल ढांचे पर संचालित करने योग्य बनाया गया है। उनका कहना था कि सुरक्षा के दृष्टिकोण से किसी बाहरी सर्वर पर निर्भर रहने के बजाय सिस्टम का सीबीएसई के नियंत्रण में होना बेहतर है।


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