*_दिल्ली में रिहायशी क्षेत्रों में 17.5 मीटर से ऊपर सभी निर्माण अवैध, किया जाएगा सील_*
नई दिल्ली: राजधानी में मालवीय नगर अग्निकांड जैसी दर्दनाक घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने तथा अनधिकृत निर्माणों, अग्नि सुरक्षा मानकों के उल्लंघन और नागरिकों के जीवन को खतरे में डालने वाली गतिविधियों पर अंकुश लगाने के लिए दिल्ली में ग्राउंड फ्लोर समेत चार मंजिल (17.5 मीटर) से ऊपर चल रहे सभी अवैध निर्माणों को सील किया जाएगा. दिल्ली सरकार के मंत्री आशीष सूद ने कहा कि ऐसे निर्माण कार्य को चिन्हित करने के लिए स्पेशल, सब-डिविजनल और जिला स्तर की टास्क फोर्स को निगरानी और त्वरित कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं. हर दिन की प्रगति रिपोर्ट डिविजनल कमिश्नर के माध्यम से सीधे मुख्यमंत्री कार्यालय को भेजी जाएगी.
मंत्री आशीष सूद ने कहा, ”अब अवैध निर्माण मुक्त और सुरक्षित दिल्ली हमारी प्राथमिकता है. शुक्रवार शाम को दिल्ली सचिवालय में मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की अध्यक्षता में हुई उच्चस्तरीय बैठक के बाद मंत्री आशीष सूद ने बताया कि अब किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध भी व्यक्तिगत जवाबदेही तय की जाएगी.”
ऊंची इमारतों की विशेष निगरानी
शहरी विकास मंत्री के अनुसार, मुख्यमंत्री ने विशेष रूप से 17.5 मीटर से अधिक ऊंचाई वाली इमारतों पर ध्यान केंद्रित करने के निर्देश दिए. उन्होंने कहा कि जहां भी नियमों के विरुद्ध निर्माण कार्य चल रहा हो, वहां तत्काल निर्माण रोकने, प्राथमिकी दर्ज करने तथा भवन स्वामी, बिल्डर या कॉलोनाइजर के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई करने की प्रक्रिया शुरू की जाए. संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी भी तय की जाएगी. पुरानी ऊंची इमारतों की सुरक्षा समीक्षा के निर्देश देते हुए मंत्री ने कहा कि जिन इमारतों में अनुमति संबंधी उल्लंघन पाए जाएं, वहां ऊपरी मंजिलों को खाली कराने, सीलिंग और आवश्यक बंदी की कार्रवाई की जाए. उन्होंने एमसीडी को भवन उपविधियों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया.
फिक्स्ड ग्लास विंडो पर रोक और नई नीतियां
अग्नि सुरक्षा के संदर्भ में मुख्यमंत्री ने फिक्स्ड ग्लास वाली खिड़कियों को गंभीर खतरा बताते हुए कहा कि सभी भवनों में खुलने योग्य खिड़कियां और बालकनियां सुनिश्चित की जानी चाहिए. उनका कहना था कि आग लगने की स्थिति में यही व्यवस्थाएं लोगों को बाहर निकलने या बचाव दलों द्वारा बचाए जाने का अवसर प्रदान करती हैं. उन्होंने इलेक्ट्रॉनिक और ऑटोमेटिक लॉकिंग सिस्टम की समीक्षा कर नई नीति बनाने की आवश्यकता भी जताई. मुख्यमंत्री ने यह भी निर्देश दिया कि जिन भवनों के पास वैध कंप्लीशन सर्टिफिकेट नहीं है, उन्हें पानी और बिजली के नए कनेक्शन अथवा अनापत्ति प्रमाण पत्र उपलब्ध नहीं कराया जाए. साथ ही वर्तमान में चल रहे सभी अवैध निर्माणों तथा उनके लिए जिम्मेदार अधिकारियों की फोटो सहित विस्तृत सूची तैयार कर तत्काल सरकार को भेजने के निर्देश दिए गए.
दोषी अफसरों की संपत्ति व कॉलोनाईर, बिल्डर, ऑनर से भी होगी वसूली
मंत्री आशीष सूद ने कहा कि राजस्व वसूली
अधिनियम-1890 के तहत सरकार को हुए नुकसान की भरपाई दोषी अधिकारियों के वेतन, पेंशन तथा संपत्तियों से की जाएगी. साथ ही बिल्डर, ऑनर व कॉलोनाइजर्स के बैंक अकांउट व चल अचल संपत्ति को फ्रीज व अटैच किया जाएगा. उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी प्रकार की जिम्मेदारी से बच निकलने की गुंजाइश नहीं छोड़ी जाएगी. बैठक में अधिकारियों की जवाबदेही को और कठोर बनाने के निर्देश देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों की एपीएआर (वार्षिक कार्य मूल्यांकन रिपोर्ट) में नकारात्मक टिप्पणी दर्ज की जाएगी, जिसका प्रभाव उनके भविष्य के करियर पर पड़ेगा. उन्होंने कहा कि केवल अधीनस्थ कर्मचारियों पर कार्रवाई करने के बजाय वरिष्ठ अधिकारियों की जिम्मेदारी भी तय की जाएगी.
जिला मजिस्ट्रेट (डीएम) की शक्तियों में बढ़ोतरी
दिल्ली में विभिन्न एजेंसियों और निकायों के बीच प्रशासनिक अधिकारों के बिखराव के कारण अक्सर नियमों का कड़ाई से पालन नहीं हो पाता था और अधिकारी जिम्मेदारी से बचते थे. इस समस्या को जड़ से खत्म करने के लिए सरकार ने जिला मजिस्ट्रेटों की शक्तियों को और प्रभावी बनाने का ऐतिहासिक फैसला किया है. अब संबंधित प्रशासनिक जिलों में कार्यरत किसी भी विभाग के अधिकारियों की जवाबदेही तय करने, उनके विरुद्ध सीधे अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू करने, एफआईआर दर्ज कराने, अवकाश स्वीकृत या निरस्त करने तथा अपने कर्तव्यों में विफल रहने वाले अफसरों के खिलाफ तत्काल एक्शन लेने की व्यापक शक्तियां डीएम के पास जल्द ही होंगी.
अधिकारियों के ट्रांसफर और जवाबदेही के नियम
मंत्री आशीष सूद ने कहा कि बैठक में भवन विभागों में अधिकारियों के बार-बार स्थानांतरण पर भी चिंता व्यक्त की गई. निर्देश दिया गया कि संबंधित क्षेत्रों में तैनात जूनियर इंजीनियर, सहायक अभियंता और अन्य अधिकारी पर्याप्त अवधि तक जिम्मेदारी संभालें तथा स्थानांतरण से पहले अपने कार्यकाल में हुए निर्माण कार्यों और जारी प्रमाणपत्रों का स्पष्ट विवरण प्रस्तुत करें. किसी अधिकारी का क्षेत्र बदल जाना उसे पूर्व की जिम्मेदारियों से मुक्त नहीं करेगा.
थर्ड पार्टी इंश्योरेंस और दमकल का डिजिटल रिकॉर्ड
बैठक में मुख्यमंत्री की ओर से यह निर्देश दिए गए कि ऐसे भवनों, गेस्ट हाउसों, नर्सिंग होमों और अन्य सार्वजनिक उपयोग वाली इमारतों के लिए थर्ड पार्टी इंश्योरेंस व्यवस्था पर कार्य किया जाए, जहां आम जनता आती-जाती है. उनका कहना था कि बीमा कंपनियां तभी बीमा प्रदान करेंगी जब भवन की संरचनात्मक सुरक्षा सुनिश्चित होगी, जिससे भवन स्वामियों पर सुरक्षा मानकों का पालन करने का दबाव बढ़ेगा. अग्निकांडों के दौरान दमकल विभाग की प्रतिक्रिया को लेकर उठने वाले सवालों का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने ऐसी व्यवस्था विकसित करने के निर्देश दिए, जिसमें कॉल प्राप्त होने से लेकर दमकल दल के मौके पर पहुंचने तक की पूरी समयावधि का डिजिटल रिकॉर्ड उपलब्ध हो. इससे पारदर्शिता बढ़ेगी और गलतफहमियों को दूर किया जा सकेगा.
ड्रोन सर्वे, सैटेलाइट और तकनीक का उपयोग
जीएसडीएल विभाग को निर्देश दिया कि ड्रोन सर्वे, सैटेलाइट इमेजरी और डिजिटल मैपिंग का उपयोग कर हर तीन महीने में निर्माण गतिविधियों का अद्यतन रिकॉर्ड तैयार किया जाए. उन्होंने ऐसी प्रणाली विकसित करने को कहा जो किसी क्षेत्र में नए निर्माण की पहचान होने पर संबंधित अधिकारी को स्वतः सूचना भेजे तथा उसके द्वारा की गई कार्रवाई का रिकॉर्ड भी सुरक्षित रखे.
संयुक्त जांच समितियां और सीलिंग की कार्रवाई
मंत्री सूद के अनुसार, नए आदेश के तहत डीएम की अध्यक्षता में विभिन्न विभागों की संयुक्त जांच समितियां गठित कर दी गई हैं. इनमें दिल्ली पुलिस, फायर सर्विस, नगर निगम के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हैं. ये समितियां अपने-अपने क्षेत्रों में संचालित सभी गेस्ट हाउस, होटल, रेस्टोरेंट, बैंक्वेट हॉल तथा अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठानों का सघन निरीक्षण करेंगी और एक सप्ताह में रिपोर्ट फाइल करेंगी. जहां कहीं भी लाइसेंस शर्तों का उल्लंघन या बिना अनुमति संचालन पाया जाएगा, उसे तत्काल प्रभाव से सील कर दिया जाएगा.
ऑनलाइन पोर्टल और मजबूत विधिक पैरवी
इसके साथ ही अनधिकृत निर्माणों की शिकायतों के लिए एक समर्पित ऑनलाइन पोर्टल विकसित करने का निर्देश दिया गया, जहां पटवारी से लेकर जिला मजिस्ट्रेट और अन्य किसी भी अधिकारी के विरुद्ध शिकायत दर्ज कराई जा सके. मुख्यमंत्री ने डिविजनल कमिश्नर स्तर पर एक विशेष ड्रोन सेल गठित करने का भी सुझाव दिया, जो नियमित निगरानी का कार्य करेगा. उन्होंने विधि विभाग को भी निर्देश दिया कि ऐसे मामलों में न्यायालयों में प्रभावी पैरवी के लिए मजबूत अधिवक्ता पैनल तैयार किया जाए ताकि अवैध निर्माणों के खिलाफ सरकारी कार्रवाई कानूनी चुनौतियों के कारण प्रभावित न हो.







