भारत के साथ ‘युद्ध छेड़ देंगे’ वाली टिप्पणी पर विदेश मंत्रालय ने कहा, ‘पाकिस्तान अपनी ही नाकामियों को छुपाने की कर रहा कोशिश’।
नई दिल्ली : भारत ने मंगलवार को सिंधु जल संधि को लेकर पाकिस्तानी रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ की “हम युद्ध करेंगे” वाली टिप्पणी की कड़ी निंदा की. भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि ऐसी टिप्पणियां इस्लामाबाद द्वारा “अपनी विफलताओं को छुपाने और मानवाधिकारों के हनन से ध्यान हटाने” के प्रयास हैं.
नई दिल्ली की यह प्रतिक्रिया आसिफ द्वारा पाकिस्तान की जल सुरक्षा पर सवाल उठने की स्थिति में भारत के खिलाफ युद्ध छेड़ने की धमकी के कुछ ही दिनों बाद आई है. इससे पहले, भारत ने कहा था कि सिंधु जल संधि को स्थगित रखने का उसका निर्णय “अपरिवर्तित” रहेगा.
मंगलवार को साप्ताहिक प्रेस ब्रीफिंग के दौरान विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा, “पाकिस्तानी रक्षा मंत्री की टिप्पणियों के संबंध में, हमने इस मामले पर रिपोर्टें देखी हैं. इस तरह की टिप्पणियां पाकिस्तान द्वारा अपनी विफलताओं को छिपाने और मानवाधिकारों के हनन से ध्यान हटाने के लिए किए गए हताश प्रयास हैं. हम इन मनगढ़ंत दावों को पूरी तरह से खारिज करते हैं.”
जयसवाल ने पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में मौजूदा स्थिति का जिक्र करते हुए कहा कि यह “पाकिस्तान की दशकों पुरानी व्यवस्थित आर्थिक शोषण, मौलिक अधिकारों से वंचित करने और उसके अवैध और जबरन कब्जे वाले क्षेत्रों में प्रशासनिक दमन की नीति का सीधा परिणाम है.”
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि पाकिस्तान ने नागरिकों के साथ निंदनीय व्यवहार किया है, जिसमें आवश्यक आपूर्ति और दवाओं की रोक, इंटरनेट बंद करना और निहत्थे नागरिकों के खिलाफ घातक बल का प्रयोग करना जैसी अत्यधिक क्रूरतापूर्ण नीतिगत कार्रवाई शामिल है.जयसवाल ने आगे कहा, “जैसा कि आप जानते हैं, इसके परिणामस्वरूप कई लोगों ने अपनी जान गंवाई है. हमें उम्मीद है कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय पाकिस्तान को उसके कृत्यों, कुकर्मों और मानवाधिकारों के उल्लंघन के लिए जवाबदेह ठहराएगा.”
पाकिस्तान में चल रहे जल संकट और घरेलू अस्थिरता के बीच ख्वाजा आसिफ ने भारत के खिलाफ अपना बयान दिया था. भारत द्वारा सिंधु जल संधि को स्थगित रखने के निर्णय के बाद, आसिफ ने शनिवार को एआरवाई न्यूज को बताया, “जिस क्षण हमें लगेगा कि हमारी राष्ट्रीय सुरक्षा, और जल हमारी राष्ट्रीय सुरक्षा का अभिन्न अंग है, खतरे में है, हम भारत के खिलाफ युद्ध छेड़ देंगे. निश्चित रूप से.”
उन्होंने दावा किया कि यदि इस्लामाबाद को इस बात का सबूत मिलता है कि भारत उसकी जल आपूर्ति को बाधित करने के लिए “खतरनाक गति” से कार्रवाई कर रहा है, तो पाकिस्तान भी सैन्य कार्रवाई पर विचार करेगा.विशेषज्ञों द्वारा पाकिस्तान के जल संकट का कारण घोर कुप्रबंधन बताया गया है, वहीं आसिफ ने नई दिल्ली पर “जल का हथियार के रूप में उपयोग”, चिनाब नदी के प्रवाह में हेरफेर करने और आंकड़ों को छिपाने का आरोप लगाया.
विश्व बैंक की मध्यस्थता से सिंधु जल संधि भारत और पाकिस्तान के बीच जल बंटवारे और सूचना आदान-प्रदान के लिए एक तंत्र के रूप में कायम हुई थी. इसमें सिंधु नदी और उसकी पांच सहायक नदियों – सतलुज, ब्यास, रावी, झेलम और चिनाब – के जल के उपयोग पर सहमति बनी थी. यह संधि पश्चिमी नदियों (चिनाब, झेलम और सिंधु) से पाकिस्तान को और पूर्वी नदियों (रावी, ब्यास और सतलुज) से भारत को असीमित उपयोग के लिए जल आवंटित करती है. भारत को पश्चिमी नदियों से कुछ गैर-उपभोग्य, कृषि, घरेलू उपयोग और जलविद्युत उत्पादन के लिए जल निकालने की भी अनुमति है. पिछले साल ऑपरेशन सिंदूर के दौरान ही भारत ने इस संधि को निलंबित कर दिया था.







