*समय पर इलाज न मिलने से घायल युवक की मौत, स्वास्थ्य व्यवस्था पर सुशील गाबा ने उठाए सवाल*

समय पर इलाज न मिलने से घायल युवक की मौत, स्वास्थ्य व्यवस्था पर उठे सवाल

गदरपुर। सड़क दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल 23 वर्षीय युवक की जिला अस्पताल में उपचार के दौरान मौत हो गई। परिजनों और मौके पर मौजूद लोगों ने अस्पताल में समय पर उपचार नहीं मिलने का आरोप लगाया है। घटना को लेकर समाजसेवी सुशील गाबा ने स्वास्थ्य व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल उठाते हुए मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार ग्राम नंदपुर निवासी 23 वर्षीय जितेंद्र पुत्र कल्याण सिंह अनहद ग्रुप ऑफ इंडस्ट्री में कार्यरत था। गुरुवार सुबह करीब आठ बजे वह कार्यस्थल के पास पहुंचने से पहले दुर्घटनाग्रस्त हो गया और डिवाइडर से करीब 35 फीट नीचे गहरे गड्ढे में जा गिरा।

दुर्घटना की सूचना मिलते ही अनहद ग्रुप के प्लांट हेड नरेश अरोड़ा अपने साथियों अमित चौधरी, साहब सिंह, सुख आदि के साथ मौके पर पहुंचे। उन्होंने घायल जितेंद्र को गड्ढे से बाहर निकाला और 108 एंबुलेंस सेवा से संपर्क करने का प्रयास किया, लेकिन फोन नहीं लग सका। इसके बाद घायल को निजी वाहन से जिला अस्पताल पहुंचाया गया।

आरोप है कि अस्पताल पहुंचने के बाद भी घायल को तत्काल उपचार नहीं मिल सका। मौके पर मौजूद लोगों के अनुसार जितेंद्र उपचार के लिए गुहार लगाता रहा। नरेश अरोड़ा द्वारा अस्पताल में उपचार के लिए जोर देने के बाद डॉक्टर राजीव ने उसका उपचार शुरू किया, लेकिन तब तक उसकी हालत गंभीर हो चुकी थी। कुछ देर बाद अत्यधिक रक्तस्राव के चलते जितेंद्र ने दम तोड़ दिया।

घटना की सूचना मिलने पर समाजसेवी सुशील गाबा जिला अस्पताल पहुंचे। उन्होंने कहा कि यह घटना बेहद गंभीर और चिंताजनक है। यदि करीब 45 मिनट तक घायल को समुचित उपचार नहीं मिलने और अत्यधिक रक्तस्राव के कारण उसकी मौत हुई है तो यह पूरे स्वास्थ्य तंत्र पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

उन्होंने मामले की तत्काल और निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए कहा कि अस्पताल की सीसीटीवी फुटेज, इमरजेंसी रजिस्टर, चिकित्सकों एवं स्टाफ की ड्यूटी तथा उपचार संबंधी रिकॉर्ड की जांच की जानी चाहिए। यदि जांच में किसी स्तर पर लापरवाही सामने आती है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।

गाबा ने कहा कि सरकारी अस्पताल में आने वाले प्रत्येक मरीज को समय पर उपचार मिलना उसका अधिकार है। उन्होंने प्रशासन से जांच रिपोर्ट सार्वजनिक करने और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए अस्पताल की इमरजेंसी व्यवस्था को मजबूत करने की मांग की।

इस दौरान नरेश अरोड़ा, ललित सिंह बिष्ट, जुगनू गुड़िया, स्वरूप सिंह, ग्राम प्रधान गुरदेव सिंह, सुरेश सिंह, अनिल चौधरी, साहब सिंह, सुख आदि मौजूद रहे।

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