*_’विकसित भारत का सपना तभी पूरा होगा, जब आदिवासी समुदाय की भलाई सुनिश्चित हो’: उपराष्ट्रपति_*

*_’विकसित भारत का सपना तभी पूरा होगा, जब आदिवासी समुदाय की भलाई सुनिश्चित हो’: उपराष्ट्रपति_*

नई दिल्ली: देश के उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने सोमवार को कहा कि विकसित भारत का विजन तभी पूरा हो सकता है जब आदिवासी समुदाय की तरक्की और भलाई पूरी तरह से पक्की हो. उन्होंने लगातार एकेडमिक सपोर्ट और मॉनिटरिंग के साथ-साथ आदिवासी स्टूडेंट्स के स्कूल ड्रॉपआउट को रोकने की अहमियत पर ज़ोर दिया.

वाइस प्रेसिडेंट राधाकृष्णन ने यूनियन मिनिस्टर फॉर ट्राइबल अफेयर्स जुआल ओराम के साथ मीटिंग के दौरान, यूनिवर्सिटी और स्कूलों के बीच मजबूत लिंक बनाने की जरूरत पर भी जोर दिया, ताकि ट्राइबल स्टूडेंट्स का हायर एजुकेशन में आसानी से एडमिशन हो सके. ओराम ने पार्लियामेंट हाउस में राधाकृष्णन से मुलाकात की और उन्हें आदिवासी आबादी की बेहतरी के लिए उठाए गए कई कदमों के बारे में बताया.

सरकारी डेटा के अनुसार, देश भर के स्कूलों से 1233 आदिवासी छात्रों के ड्रॉप आउट होने की रिपोर्ट मिली है. केंद्र सरकार, नेशनल एजुकेशन सोसाइटी फॉर ट्राइबल स्टूडेंट्स (NESTS) और स्टेट सोसाइटीज़ के जरिए, एकलव्य मॉडल रेजिडेंशियल स्कूलों (EMRSs) में खास तौर पर कमज़ोर ट्राइबल ग्रुप्स (PVTGs) के बच्चों के बीच ड्रॉपआउट रेट को कम करने के लिए कई खास कदम उठा रही है.

PVTG स्टूडेंट्स के लिए एडमिशन में 5 परसेंट रिजर्वेशन जरूरी कर दिया गया है, और एकेडमिक साल 2025-26 के लिए EMRS एडमिशन के लिए गाइडलाइंस सभी स्टेट EMRS सोसाइटियों को जारी कर दी गई हैं ताकि इस नियम का सख्ती से पालन हो सके. राज्य सरकारों को सलाह दी गई है कि वे PVTG स्टूडेंट्स का एनरोलमेंट बढ़ाएं और EMRS द्वारा दी जाने वाली सुविधाओं के बारे में बताते हुए अवेयरनेस कैंपेन चलाएं.

इनमें सुरक्षित और अच्छी सुविधाओं वाले हॉस्टल शामिल हैं. खासकर लड़कियों के लिए, स्टूडेंट्स को हायर स्टडीज़ और कॉम्पिटिटिव एग्जाम के लिए तैयार करने के लिए CBSE करिकुलम के हिसाब से अच्छी क्वालिटी की शिक्षा; और स्टूडेंट्स की हेल्थ को सपोर्ट करने के लिए पौष्टिक खाना देना. ओराम के साथ मीटिंग के दौरान, वाइस-प्रेसिडेंट को आदिवासी आबादी की भलाई के लिए मिनिस्ट्री की तरफ से शुरू की गई अलग-अलग कोशिशों के बारे में बताया गया.

राधाकृष्णन को कई पहलों के बारे में भी बताया गया, जिनमें आदिवासी अधिकारों को सुरक्षित करने की कोशिशें, शिक्षा और स्वास्थ्य के नतीजों को बेहतर बनाने के उपाय, आदिवासी छात्रों के लिए स्कॉलरशिप, आदिवासी संस्कृति को फिर से ज़िंदा करने के प्रोग्राम, रोज़ी-रोटी की स्कीमें जिनमें फ़ाइनेंशियल मदद और पारंपरिक स्किल्स को बिज़नेस के तौर पर बढ़ावा देना शामिल है.

उन्हें देश भर में एकलव्य मॉडल रेजिडेंशियल स्कूलों को मॉडर्न बनाने और बढ़ाने के मंत्रालय के प्लान और धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान, PM-JANMAN, और आदि कर्मयोगी अभियान जैसी खास स्कीमों के बारे में भी बताया गया.

उपराष्ट्रपति ने पिछले 11 सालों में मंत्रालय के बजट में तीन गुना बढ़ोतरी की तारीफ़ की. आदिवासी छात्रों के लिए अच्छी क्वालिटी की हायर एजुकेशन- जिसमें विदेश में मौके भी शामिल हैं तक पहुंच बढ़ाने की जरूरत पर ज़ोर दिया. राधाकृष्णन ने आदिवासी समुदायों में सिकल सेल एनीमिया को दूर करने और हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर में बड़ी कमियों को दूर करने के लिए ट्राइबल अफेयर्स मिनिस्ट्री के खास प्रयासों की तारीफ की.

वाइस प्रेसिडेंट ने मिनिस्ट्री से अलग-अलग आदिवासी कम्युनिटी के भुला दिए गए हीरो को हाईलाइट करने और पॉपुलर बनाने और उनके योगदान को नेशनल अटेंशन में लाने की भी रिक्वेस्ट की.

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