*_जम्मू कश्मीर को अलग राज्य बनाने के लिए नेशनल कॉन्फ्रेंस का ‘दिल्ली चलो’ का आह्वान_*
श्रीनगर: मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला की नेतृत्व में हुई विधायक दल की बैठक में संसद के मॉनसून सत्र के पहले दिन राज्य के दर्जे और संवैधानिक गारंटी की मांग को लेकर दिल्ली में विरोध करने का फैसला होने के एक दिन बाद, नेशनल कॉन्फ्रेंस ने ‘दिल्ली चलो’ (मार्च) का आह्वान करके विरोध-प्रदर्शन के लिए माहौल बनाना शुरू कर दिया है.
नेशनल कॉन्फ्रेंस की तरफ से जारी एक पोस्टर में जम्मू-कश्मीर को राज्य का दर्जा वापस दिलाने के लिए ‘दिल्ली चलो’ का ऐलान किया गया, जो केंद्र का लंबे समय से इंतजार किया जा रहा वादा था.
केंद्र सरकार ने चुनाव के बाद राज्य का दर्जा देने का वादा किया था, लेकिन केंद्र शासित प्रदेश में पहली चुनी हुई सरकार के अब तक 19 महीने पूरे होने के बावजूद इसे बहाल करने में देरी की है.
दाचीगाम में विधायक और सांसद की ग्रुप फोटो के साथ लिखा था, “जम्मू-कश्मीर को राज्य का दर्जा वापस दो. हमारा राज्य. हमारे अधिकार. हमारी पहचान.”
पोस्टर में आगे कहा गया, “हम पूर्ण राज्य की मांग करते हैं, यह हमारा अधिकार है. हम लोकतंत्र के लिए खड़े हैं. यह हमारा वादा है और हम सम्मान के लिए लड़ते हैं. यह हमारी पहचान है.”
बुधवार को मुख्यमंत्री अपने 42 विधायकों, निर्दलीय और सांसदों के कारवां को अपने गुपकार घर से राजधानी श्रीनगर से 22 किलोमीटर दूर दाचीगाम नेशनल पार्क ले गए, जो हंगुल (हिरण) के रहने की जगह के तौर पर मशहूर है.
बैठक के दौरान, अब्दुल्ला को कई मुद्दों पर विधायकों के बीच नाराजगी का सामना करना पड़ा, जिसमें राज्य का दर्जा और राजनीतिक अधिकारों की बहाली पर केंद्र सरकार के साथ सुलह के तरीके के कारण जमीन खोने की सोच भी शामिल थी.
दिन भर चले रणनीतिक सत्र के बाद सरकार ने पूर्ण राज्य का दर्जा दिलाने की लड़ाई को दिल्ली ले जाने का निर्णय करके रीसेट बटन दबाया, जिस पर उसके विधायकों ने तालियां बजाईं. लेकिन नेशनल कॉन्फ्रेंस के सांसद आगा रूहुल्लाह मेहदी, जो अब्दुल्ला के खिलाफ खुले तौर पर खड़े हुए थे और जिन्होंने जनादेश के साथ धोखा किया था और जिन्हें दाचीगाम बैठक में नहीं बुलाया गया था, वे सबसे कम प्रभावित दिखे.
उन्होंने एक दिन के धरने के बजाय लगातार लड़ाई के लिए एक राजनीतिक रोडमैप बनाने का सुझाव दिया.
मेहदी ने कहा,“एक दिवसीय धरने या एक दिवसीय विरोध-प्रदर्शन से लोगों को बेवकूफ बनाने की कोशिश न करें. एक रोडमैप बनाएं और एक आंदोलन खड़ा करें.” उन्होंने केंद्र सरकार पर दबाव बनाने के लिए जम्मू और कश्मीर के भीतर और केंद्र शासित प्रदेश के बाहर व्यापक परामर्श का सुझाव दिया.







