*_’बिहार फॉर्मूले’ से बंगाल फतह का लक्ष्य, ममता के गढ़ में ‘कमल’ खिलाने के लिए BJP ने बनाई खास रणनीति_*

*_’बिहार फॉर्मूले’ से बंगाल फतह का लक्ष्य, ममता के गढ़ में ‘कमल’ खिलाने के लिए BJP ने बनाई खास रणनीति_*

पटना: बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में जीत का जो फॉर्मूला एनडीए ने बनाया था, अब उसी तर्ज पर पश्चिम बंगाल में फतह के लिए भी एक्सरसाइज शुरू हो गई है. बिहार मॉडल को लागू करने की जिम्मेदारी राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन, चुनाव प्रभारी भूपेंद्र यादव और बंगाल प्रभारी मंगल पांडे के कंधों पर है. जिन नेताओं पर बंगाल में ‘कमल’ खिलाने की जिम्मेदारी है, उनमें से ज्यादातर नेता किसी न किसी रूप में बिहार से जुड़े हैं.

बंगाल फतह का ब्लू प्रिंट तैयार: ऐसे में बिहार बीजेपी के नेताओं की जिम्मेदारी भी तय की जा रही है. उत्तरी बंगाल की 31 विधानसभा सीट और 6 लोकसभा क्षेत्र के लिए ब्लूप्रिंट तैयार है. आगामी बैठक के बाद नेताओं की तैनाती कर दी जाएगी. ये नेता फोकस के साथ फॉर्मूले पर काम करेंगे और पार्टी को फिक्स टार्गेट से ज्यादा पर विजय दिलाने की जीतोड़ मेहनत करेंगे.

सीमावर्ती इलाकों पर होगी नजर: बीजेपी की योजना के तहत बिहार के कई वरिष्ठ नेताओं, संगठन पदाधिकारियों और अनुभवी कार्यकर्ताओं को चरणबद्ध तरीके से पश्चिम बंगाल में जिम्मेदारी सौंपी जा रही है. ये नेता सीमावर्ती इलाकों, शहरी क्षेत्रों और प्रवासी बिहारी मतदाताओं वाले क्षेत्रों में पार्टी संगठन को मजबूत करने पर काम कर रहे हैं.

बंगाल में चुनावी एजेंडे: सूत्र बताते हैं कि बिहार बीजेपी के नेता लगातार पश्चिम बंगाल का दौरा कर रहे हैं और वहां के स्थानीय नेताओं के साथ समन्वय बना रहे हैं. संगठन विस्तार के साथ-साथ पार्टी का फोकस कानून-व्यवस्था, महिला सुरक्षा, भ्रष्टाचार और घुसपैठ जैसे मुद्दों को चुनावी एजेंडे में प्रमुखता से उठाने पर है.

31 जनवरी को होगी महत्वपूर्ण बैठक: बिहार भाजपा के निशाने पर उत्तरी बंगाल हुआ करती है. पिछले विधानसभा चुनाव में उत्तरी बंगाल इलाके में 30 से अधिक सीटों पर जीत मिली थी, जबकि इस बार और अधिक की उम्मीद है. कोलकाता में एक बैठक हो चुकी है, जिसमें दो दर्शन भाजपा के नेता शामिल हुए थे. आगामी 31 जनवरी को भी कोलकाता में महत्वपूर्ण बैठक होने जा रही है, जिसमें दो दर्जन नेताओं को आमंत्रित किया गया है.

उत्तरी बंगाल पर भाजपा की होगी नजर: आसनसोल, दुर्गापुर और सिलीगुड़ी को उत्तरी बंगाल का जिला माना जाता है. यह जिले बिहार की सीमा से लगते हैं. इन्हीं इलाकों में बिहार भाजपा के कार्यकर्ताओं की तैनाती होगी. पूरे पश्चिम बंगाल को 5 जोन में बांटा जाना है और जोन के हिसाब से कार्यकर्ताओं की जिम्मेदारी तय होगी. हर लोकसभा क्षेत्र और विधानसभा क्षेत्र में एक प्रभारी होंगे और पूरे जोन में भी एक प्रभारी नियुक्त किए जाएंगे.

बिहार की तर्ज पर पश्चिम बंगाल फतह: पश्चिम बंगाल को इस बार बीजेपी बिहार मॉडल के जरिए फतह करना चाहती है. जिस तरीके से बिहार में रणनीति अपनाई गई और कार्यकर्ताओं ने पूरी ऊर्जा झोंकी उसी तर्ज पर पश्चिम बंगाल में भी पार्टी प्रयोग करने की तैयारी में है भाजपा को ऐसा लगता है कि बिहार मॉडल के तर्ज पर पश्चिम बंगाल को भी फतह किया जा सकता है.

उत्तरी बिहार में बीजेपी का प्रदर्शन अच्छा: पिछले विधानसभा चुनाव में भाजपा के वरिष्ठ नेता प्रेम रंजन पटेल को उत्तरी बंगाल जोन का प्रभारी बनाया गया था. उन इलाकों में पार्टी को 30 से अधिक सीटों पर जीत हासिल हुई थी. उनका दावा है कि जिस तरह पिछली बार उत्तरी बंगाल में हम लोगों ने अच्छा प्रदर्शन किया था, इस बार उससे भी अच्छा करेंगे.

”इस बार भी 70 से 80% सीटों पर जीत हासिल करने के लक्ष्य के साथ आगे बढ़ रहे हैं. प्रभारी मंगल पांडे और चुनाव प्रभारी भूपेंद्र यादव के नेतृत्व में पश्चिम बंगाल में हमारी सरकार बनने जा रही है. बिहार के तमाम कार्यकर्ता पूरे तन मन और धन के साथ वहां लगने जा रहे हैं.”- प्रेम रंजन पटेल, प्रवक्ता, भारतीय जनता पार्टी

पश्चिम बंगाल में होगी बीजेपी सरकार: भाजपा नेता सुबोध पासवान 2021 के विधानसभा चुनाव में पश्चिम बंगाल गए थे. इस बार भी पश्चिम बंगाल जाने की तैयारी में हैं. वहीं, संजय कुमार दावा करते हैं कि हमारे कार्यकर्ता सैनिक की तरह हैं और वह ममता बनर्जी से डरने वाले नहीं है. इस बार हम मजबूती के साथ लड़ाई लड़ रहे हैं. ममता सरकार को उखाड़ फेंकेंगे.

”बंगाल विधानसभा चुनाव को लेकर बिहार भाजपा के तमाम कार्यकर्ता कमर कर चुके हैं और हम लोग पार्टी नेतृत्व के आदेश का इंतजार कर रहे हैं’ जैसे ही पार्टी नेतृत्व से हरी झंडी मिलेगी हम लोग पश्चिम बंगाल के लिए कूच कर जाएंगे’ इस बार हर हाल में पश्चिम बंगाल में भाजपा की सरकार बनने जा रही है.”- संजय कुमार, बीजेपी नेता

कब है बंगाल चुनाव?: 294 सदस्यीय पश्चिम बंगाल विधानसभा के लिए इस साल मार्च-अप्रैल 2026 चुनाव हो सकता है. 2021 के विधानसभा चुनाव में ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस को 215 सीटों पर जीत मिली थी, जबकि भारतीय जनता पार्टी को 77 सीटों पर सफलता मिली थी. वहीं 2016 में टीएमसी को 211 और बीजेपी को महज 3 सीटें आईं थीं.

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