प्रधानमंत्री की चुप्पी पर उठे सवाल, देश के फैसलों पर पारदर्शिता की मांग

 

प्रधानमंत्री की चुप्पी पर उठे सवाल, देश के फैसलों पर पारदर्शिता की मांग

नई दिल्ली।

देश के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की हालिया चुप्पी को लेकर देश के जागरूक नागरिकों के बीच सवाल उठने लगे हैं। नागरिकों का कहना है कि भारत से जुड़े अहम राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय फैसलों की जानकारी देश की जनता को सीधे सरकार की ओर से नहीं मिल पा रही है, जबकि विदेशी नेता और विशेष रूप से अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप सोशल मीडिया के माध्यम से इन विषयों पर बयान जारी कर रहे हैं।

आलोचकों का कहना है कि चाहे व्यापार समझौते (ट्रेड डील) हों या सीज़फायर से जुड़ी घोषणाएं, महत्वपूर्ण सूचनाएं पहले अमेरिका से सामने आ रही हैं, जबकि भारत सरकार की ओर से स्पष्ट और आधिकारिक बयान का अभाव बना हुआ है। जब इन मुद्दों पर सवाल उठते हैं तो प्रधानमंत्री स्वयं सामने आने के बजाय किसी मंत्री को भेज दिया जाता है, जो प्रेस वार्ता में विपक्ष पर आरोप-प्रत्यारोप तक सीमित रह जाते हैं, लेकिन समझौतों की ठोस जानकारी साझा नहीं करते।

नागरिकों ने चिंता जताई है कि अमेरिका की ओर से यह कहा जा रहा है कि भारत ने अपने बाज़ार खोल दिए हैं और किसानों के हितों से समझौता किया गया है, जबकि भारत सरकार इन आरोपों पर केवल “विवरण बाद में साझा किए जाएंगे” कहकर जवाब टाल रही है।

इस पूरे घटनाक्रम पर सवाल उठाते हुए जागरूक नागरिक डॉ. गणेश उपाध्याय ने कहा कि यदि सभी फैसले देशहित में हैं, तो सरकार को उन्हें सार्वजनिक करने में संकोच क्यों है। उन्होंने कहा कि जब सत्ता पक्ष जवाब देने से बचता है, तो स्वाभाविक रूप से संदेह पैदा होता है और ऐसे संदेह बिना कारण के नहीं होते।

नागरिकों ने सरकार से मांग की है कि राष्ट्रीय हित से जुड़े निर्णयों पर पूरी पारदर्शिता बरती जाए और देश की जनता को समय रहते स्पष्ट जानकारी दी जाए, ताकि भ्रम और अविश्वास की स्थिति न बने।

— डॉ. गणेश उपाध्याय, जागरूक नागरिक

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