*स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर राष्ट्रपति का राष्ट्र के नाम संबोधन, विकसित भारत के संकल्प पर दिया जोर*

*स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर राष्ट्रपति का राष्ट्र के नाम संबोधन, विकसित भारत के संकल्प पर दिया जोर*

नई दिल्ली, 14 अगस्त। स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने शुक्रवार को राष्ट्र के नाम संबोधन में देशवासियों को स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने तिरंगे को देश की स्वतंत्रता, गौरव और राष्ट्रीय एकता का प्रतीक बताते हुए वर्ष 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के संकल्प पर जोर दिया।

राष्ट्रपति ने विभाजन की त्रासदी को याद करते हुए उस दौर में जान गंवाने वाले तथा विस्थापन का दंश झेलने वाले लोगों को श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने कहा कि देश की प्रगति में प्रत्येक नागरिक की भागीदारी महत्वपूर्ण है और सामूहिक प्रयासों से ही विकसित भारत का लक्ष्य हासिल किया जा सकता है।

उन्होंने युवाओं को देश की सबसे बड़ी शक्ति बताते हुए उनकी प्रतिभा, रचनात्मकता और नवाचार को प्रोत्साहित करने की आवश्यकता पर बल दिया। साथ ही सार्वजनिक परीक्षाओं को पारदर्शी, सुरक्षित और नकल एवं अनुचित साधनों से मुक्त बनाने के लिए परीक्षा प्रणाली में सुधारों की जरूरत बताई।

राष्ट्रपति ने महिला सशक्तिकरण को देश की प्रगति का महत्वपूर्ण आधार बताते हुए शिक्षा, रोजगार और नेतृत्व के क्षेत्रों में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि महिलाओं को समान अवसर उपलब्ध कराना राष्ट्र निर्माण के लिए आवश्यक है।

राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दे पर राष्ट्रपति ने सशस्त्र बलों के साहस, अनुशासन और समर्पण की सराहना की। उन्होंने आतंकवाद के खिलाफ भारत की दृढ़ नीति दोहराते हुए देश की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता बताया।

पर्यावरण संरक्षण पर जोर देते हुए राष्ट्रपति ने प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा और आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित एवं संतुलित पर्यावरण सुनिश्चित करने का आह्वान किया। उन्होंने देशवासियों से एकजुट होकर भारत को मजबूत, समृद्ध और विकसित राष्ट्र बनाने में योगदान देने की अपील की।

राष्ट्रपति ने अपने संदेश में कहा, “हर नागरिक की प्रगति, सम्मान और भागीदारी से ही विकसित भारत का सपना साकार होगा।”

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