एलर्जिक राइनाइटिस के इलाज में आयुर्वेदिक दवा ‘इम्बो’ प्रभावकारी : विशेषज्ञ
शोध आधारित आयुर्वेदिक औषधि ‘इम्बो’ पर विशेषज्ञों की मुहर
18 जड़ी-बूटियों से बनी ‘इम्बो’ बनी आयुर्वेद की नई उम्मीद
आयुर्वेदिक संगोष्ठी में ‘इम्बो’ के क्लिनिकल ट्रायल्स पर मंथन
उत्तराखंड से लाइसेंस प्राप्त ‘इम्बो’ का देशभर में बढ़ा उपयोग
आयुर्वेदिक शोध को नई दिशा दे रही ‘इम्बो’ : चिकित्सक
एलर्जी उपचार में आयुर्वेद की बढ़ती धमक, ‘इम्बो’ बनी चर्चा का केंद्र
रुद्रपुर। एलर्जिक राइनाइटिस (सर्दी-जुकाम) जैसी तेजी से बढ़ती स्वास्थ्य समस्या के उपचार में आयुर्वेदिक औषधि “इम्बो” को प्रभावकारी बताते हुए विशेषज्ञों ने इसे शोध आधारित एवं कम दुष्प्रभाव वाली दवा करार दिया। रविवार को आयोजित राज्य स्तरीय संगोष्ठी में देशभर से आए चिकित्सकों एवं विशेषज्ञों ने औषधि के क्लिनिकल ट्रायल और शोध परिणाम साझा किए।
विशेषज्ञों के अनुसार चार प्रमुख जड़ी-बूटियों एवं मंडूर भस्म सहित कुल 18 औषधीय घटकों से तैयार “इम्बो” पर किए गए क्लिनिकल ट्रायल एवं प्रायोगिक अध्ययनों में यह एलोपैथिक उपचार की तुलना में अधिक प्रभावकारी पाई गई। शोध में यह भी सामने आया कि इसके दुष्प्रभाव अत्यंत कम हैं तथा रोगियों को पांच मिनट के भीतर लाभ महसूस होने लगता है।
इस औषधि का विकास पद्मश्री सम्मानित आयुर्वेदाचार्य वैद्य बालेंदु प्रकाश ने किया है। “इम्बो” को उत्तराखंड सरकार से निर्माण लाइसेंस प्राप्त हो चुका है और वर्तमान में देशभर के लगभग 1500 आयुर्वेदिक चिकित्सक इसका उपयोग उपचार में कर रहे हैं।
संगोष्ठी में उत्तर प्रदेश के 18 आयुर्वेदिक चिकित्सकों को “इम्बो ब्रांड एम्बेसडर” के रूप में सम्मानित किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि बिलासपुर नगर पालिका परिषद अध्यक्ष चित्रक मित्तल रहे, जबकि अध्यक्षता वरिष्ठ पत्रकार प्रदीप फुटेला ने की। इस दौरान न्यूरोसर्जन डॉ. सुनील गौतम, हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. चंद्रक बंसल एवं उत्तराखंड आयुर्वेद विश्वविद्यालय के प्रोफेसर डॉ. राजीव कुरेले समेत कई विशेषज्ञ मौजूद रहे।
ब्रांड एम्बेसडर प्रतिनिधि डॉ. एस.के. राय ने बताया कि पिछले एक वर्ष में उन्होंने करीब 80 किलोग्राम “इम्बो” का उपयोग उपचार में किया है, जिससे मरीजों को काफी लाभ मिला। उन्होंने कहा कि यह औषधि एलर्जिक राइनाइटिस के अलावा अन्य कई रोगों में भी उपयोगी साबित हो रही है।
विशेषज्ञों ने बताया कि “इम्बो” आयुर्वेदिक ग्रंथ चरक संहिता में वर्णित “पुनर्नवा मंडूर” योग पर आधारित है। वैद्य बालेंदु प्रकाश द्वारा इसमें विशेष संशोधन एवं मानकीकरण कर इसे अधिक प्रभावकारी बनाया गया, जिसे “इम्बो” नाम दिया गया। इसका अर्थ इम्यूनिटी बूस्टर बताया गया।
शोधकर्ताओं के अनुसार चूहों पर किए गए परीक्षणों में यह औषधि शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली से जुड़े करीब 18 प्रमुख इम्यून मार्कर्स को प्रभावित करती पाई गई। वहीं केरल एवं कानपुर मेडिकल कॉलेज में हुए नियंत्रित क्लिनिकल ट्रायल्स में भी इसके सकारात्मक परिणाम सामने आए।
कार्यक्रम में विशेषज्ञों ने आयुर्वेद में शोध, पारदर्शिता और अनुभव साझा करने की आवश्यकता पर बल दिया। डॉ. सुनील गौतम ने कहा कि आयुर्वेद चिकित्सकों को अपने शोध और अनुभव समाज के सामने लाने चाहिए, ताकि अधिक लोग इसका लाभ उठा सकें। डॉ. चंद्रक बंसल ने भी “इम्बो” को प्रभावकारी औषधि बताते हुए ऐसे आयोजनों को आयुर्वेदिक शोध के लिए उपयोगी बताया।
इस अवसर पर विभिन्न राज्यों से आए मरीजों, फार्मेसी छात्रों एवं शोधार्थियों ने भी भाग लिया। कार्यक्रम में “इम्बो” से संबंधित चिकित्सकीय एवं प्रायोगिक अध्ययनों की प्रदर्शनी लगाई गई। आगंतुक चिकित्सकों ने औषधि निर्माण इकाई का भ्रमण कर निर्माण प्रक्रिया और अनुसंधान कार्यों की जानकारी भी ली।







