*मध्यावधि चुनाव से पहले मस्क ने रिपब्लिकन मतदाताओं से की सक्रिय होने की अपील*
*रिपब्लिकन उम्मीदवारों को भारी आर्थिक मदद देने वाले मस्क ने डेमोक्रेट्स की संभावित नीतियों पर जताई चिंता*
अमेरिका। अमेरिकी उद्योगपति एलन मस्क ने 2026 के मध्यावधि चुनावों से पहले रिपब्लिकन मतदाताओं से सक्रिय होने और अपनी पार्टी के उम्मीदवारों का समर्थन करने की अपील की है। अमेरिकी राजनीति में बड़े राजनीतिक दानदाताओं में शामिल मस्क ने डेमोक्रेटिक पार्टी की संभावित नीतियों को लेकर चिंता जताते हुए कहा कि यदि डेमोक्रेट्स भविष्य में कांग्रेस और राष्ट्रपति पद पर नियंत्रण हासिल कर लेते हैं, तो अमेरिकी राजनीतिक व्यवस्था में बड़े बदलाव हो सकते हैं।
रिपोर्टों के अनुसार, मस्क रिपब्लिकन उम्मीदवारों और उनसे जुड़े राजनीतिक संगठनों को 445 मिलियन डॉलर से अधिक का राजनीतिक चंदा दे चुके हैं। उनकी आर्थिक मदद चुनाव प्रचार, विज्ञापनों और मतदाताओं को मतदान के लिए प्रेरित करने वाले अभियानों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
डेमोक्रेट्स की संभावित नीतियों पर चिंता
मस्क ने आशंका जताई है कि यदि डेमोक्रेटिक पार्टी 2028 में राष्ट्रपति पद और कांग्रेस, दोनों पर नियंत्रण हासिल कर लेती है, तो वह कई बड़े नीतिगत बदलाव कर सकती है। इनमें वॉशिंगटन डीसी और प्यूर्टो रिको को अमेरिकी राज्य का दर्जा देने, आव्रजन कानूनों में बदलाव करने और अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट में न्यायाधीशों की संख्या बढ़ाने जैसे मुद्दे शामिल हैं।
मस्क ने रिपब्लिकन मतदाताओं से विशेष रूप से सीनेट में पार्टी का बहुमत बनाए रखने के लिए सक्रिय भूमिका निभाने का आग्रह किया है। उनका मानना है कि चुनावों में रिपब्लिकन पार्टी की स्थिति मजबूत रहने से डेमोक्रेट्स की प्रस्तावित नीतियों पर अंकुश लगाया जा सकता है।
कांग्रेस में सत्ता का संतुलन होगा अहम
अमेरिका में मध्यावधि चुनाव राष्ट्रपति के चार वर्षीय कार्यकाल के बीच होते हैं। इन चुनावों के जरिए प्रतिनिधि सभा की सभी सीटों और सीनेट की लगभग एक-तिहाई सीटों के लिए मतदान होता है। चुनाव परिणामों से कांग्रेस में सत्ता का संतुलन तय होता है, जिसका असर राष्ट्रपति की नीतियों, सरकारी खर्च, आव्रजन व्यवस्था और प्रशासनिक फैसलों की निगरानी पर पड़ता है।
मस्क की राजनीतिक सक्रियता और आर्थिक योगदान ने अमेरिकी चुनावों में बड़े दानदाताओं की भूमिका को लेकर बहस को फिर चर्चा में ला दिया है। वहीं, आगामी चुनावों में राजनीतिक ध्रुवीकरण, लोकतांत्रिक संस्थाओं की भूमिका और विभिन्न दलों की नीतियां प्रमुख मुद्दे बने रहने की संभावना है।


