फर्जी शस्त्र लाइसेंस रैकेट के तार कई राज्यों तक, जांच में हो सकते हैं बड़े खुलासे
देहरादून/रुद्रपुर। उत्तराखंड एसटीएफ द्वारा उजागर किए गए फर्जी शस्त्र लाइसेंस प्रकरण ने सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है। शुरुआती जांच में सामने आए तथ्यों से संकेत मिले हैं कि यह नेटवर्क केवल उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश तक सीमित नहीं, बल्कि इसके तार देश के अन्य राज्यों तक भी जुड़े हो सकते हैं। जांच एजेंसियां पूरे रैकेट की तह तक पहुंचने के लिए लगातार कार्रवाई कर रही हैं और गिरफ्तार आरोपियों से गहन पूछताछ जारी है।
सूत्रों के अनुसार फर्जी दस्तावेजों, गलत पते और संदिग्ध सत्यापन के आधार पर शस्त्र लाइसेंस हासिल करने का खेल लंबे समय से चल रहा था। लाइसेंस जारी होने के बाद उन्हें अन्य राज्यों में ट्रांसफर कराया जाता था, जिससे पूरी प्रक्रिया वैध प्रतीत हो। जांच में यह भी सामने आया है कि इस नेटवर्क में कई स्तरों पर लोगों की संलिप्तता हो सकती है, जिससे मामला और गंभीर हो गया है।
एसटीएफ की कार्रवाई के बाद उत्तर प्रदेश के कई जिलों के रिकॉर्ड खंगाले जा रहे हैं। बताया जा रहा है कि अब तक दो दर्जन से अधिक जिलों के नाम जांच के दायरे में आ चुके हैं। अधिकारियों को आशंका है कि जांच आगे बढ़ने पर कई अन्य जिलों और राज्यों के नाम भी सामने आ सकते हैं। इसी के मद्देनजर संबंधित अभिलेखों का मिलान कर लाइसेंसों की वैधता की जांच की जा रही है।
जांच एजेंसियों के सामने सबसे बड़ा सवाल यह है कि फर्जी लाइसेंसों के आधार पर खरीदे गए हथियार आखिर किन लोगों तक पहुंचे। आशंका जताई जा रही है कि इनमें से कुछ हथियार आपराधिक पृष्ठभूमि वाले या सुरक्षा की दृष्टि से संदिग्ध व्यक्तियों के हाथों में भी पहुंच सकते हैं। यदि ऐसा पाया जाता है तो मामला केवल फर्जीवाड़े तक सीमित न रहकर राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा गंभीर विषय बन सकता है।
गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ में लगातार नई जानकारियां सामने आने की उम्मीद है। जांच अधिकारियों का मानना है कि अब तक पकड़े गए लोग इस नेटवर्क की केवल एक कड़ी हैं और इनके माध्यम से पूरे गिरोह तक पहुंचा जा सकता है। पूछताछ में लाइसेंस बनवाने वाले, सत्यापन कराने वाले तथा हथियारों की खरीद-फरोख्त से जुड़े अन्य लोगों के नाम भी उजागर हो सकते हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि एक राज्य में फर्जी तरीके से शस्त्र लाइसेंस बनवाकर दूसरे राज्य में आसानी से ट्रांसफर कराया जा सकता है, तो यह व्यवस्था में मौजूद गंभीर खामियों की ओर इशारा करता है। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए विभिन्न एजेंसियां जांच में जुटी हुई हैं। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में इस नेटवर्क से जुड़े कई बड़े खुलासे हो सकते हैं। जांच की परतें इसी तरह खुलती रहीं तो यह देश के सबसे बड़े फर्जी शस्त्र लाइसेंस और अवैध हथियार नेटवर्क मामलों में से एक साबित हो सकता है।







