*ओलावृष्टि से बर्बाद फसलों पर किसानों को 25 हजार रुपये प्रति एकड़ मुआवजा दे सरकार : डॉ. गणेश उपाध्याय* *पूर्व दर्जा राज्य मंत्री ने कहा- प्रकृति की मार से किसानों की महीनों की मेहनत पर फिरा पानी, आर्थिक राहत देना जरूरी*

*ओलावृष्टि से बर्बाद फसलों पर किसानों को 25 हजार रुपये प्रति एकड़ मुआवजा दे सरकार : डॉ. गणेश उपाध्याय*

 

*पूर्व दर्जा राज्य मंत्री ने कहा- प्रकृति की मार से किसानों की महीनों की मेहनत पर फिरा पानी, आर्थिक राहत देना जरूरी*

 

रुद्रपुर। उत्तराखंड में बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि से धान की फसल को हुए भारी नुकसान पर उत्तराखंड कांग्रेस के महामंत्री एवं पूर्व दर्जा राज्य मंत्री डॉ. गणेश उपाध्याय ने चिंता जताई है। उन्होंने राज्य सरकार से प्रभावित किसानों को 25 हजार रुपये प्रति एकड़ की दर से मुआवजा देने की मांग की है। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक आपदा ने किसानों की महीनों की मेहनत और उनकी उम्मीदों को गहरा आघात पहुंचाया है। ऐसे में सरकार को किसानों को आर्थिक राहत देकर उनके नुकसान की भरपाई के लिए ठोस कदम उठाने चाहिए।

 

डॉ. उपाध्याय ने कहा कि किसान दिन-रात मेहनत कर फसल तैयार करता है। उसे उम्मीद रहती है कि फसल अच्छी होगी तो परिवार की जरूरतें पूरी होंगी, बच्चों का भविष्य बेहतर बनेगा और कर्ज चुकाने में मदद मिलेगी। लेकिन बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि ने किसानों की इन उम्मीदों पर पानी फेर दिया है। खेतों में खड़ी फसल बर्बाद होने से किसानों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है।

 

उन्होंने कहा कि फसल का नुकसान केवल आर्थिक क्षति नहीं है, बल्कि इसके साथ किसान की महीनों की मेहनत, पसीना और परिवार की उम्मीदें भी जुड़ी होती हैं। अपनी आंखों के सामने मेहनत से तैयार की गई फसल को बर्बाद होते देखना किसी भी किसान के लिए बेहद पीड़ादायक है। ऐसे कठिन समय में किसानों को केवल आश्वासन नहीं, बल्कि वास्तविक आर्थिक सहायता की जरूरत है।

 

डॉ. उपाध्याय ने कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भी बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि से प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर फसलों को हुए नुकसान का जायजा लिया है। उन्होंने उम्मीद जताई कि राज्य सरकार किसानों की पीड़ा को गंभीरता से लेते हुए शीघ्र राहत देने की दिशा में प्रभावी कार्रवाई करेगी।

 

उन्होंने सरकार से मांग की कि प्रभावित क्षेत्रों में फसलों के नुकसान का निष्पक्ष और त्वरित सर्वे कराया जाए तथा किसानों को प्रति एकड़ 25 हजार रुपये का मुआवजा दिया जाए, ताकि वे इस संकट से उबरकर अपनी आजीविका को संभाल सकें।

 

डॉ. उपाध्याय ने कहा कि किसान विपरीत परिस्थितियों में भी हिम्मत नहीं हारता और नई उम्मीद के साथ दोबारा खेती में जुट जाता है। अब सरकार की जिम्मेदारी है कि वह इस कठिन दौर में किसानों के साथ खड़ी हो और उन्हें पर्याप्त आर्थिक सहायता उपलब्ध कराए।

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