*_’पेट्रोलियम लॉबी मेरे पीछे पड़ी है, उनकी वजह से ग्रीन एनर्जी में पिछड़ रहा भारत’_*

*_’पेट्रोलियम लॉबी मेरे पीछे पड़ी है, उनकी वजह से ग्रीन एनर्जी में पिछड़ रहा भारत’_*
पुणे : केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने शुक्रवार को कहा कि 22 लाख करोड़ रुपये के ईंधन आयात से जुड़े हितों के कारण पेट्रोलियम लॉबी देश में वैकल्पिक एवं हरित ईंधनों को बढ़ावा देने के प्रयासों का आसानी से समर्थन नहीं करेगी.
गडकरी ने शुक्रवार को यह बात इंडियन फेडरेशन ऑफ ग्रीन एनर्जी (आईएफजीई) के कॉंप्रेस्ड बायो-गैस सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहीं. उन्होंने कहा कि वैकल्पिक ईंधन को बढ़ावा देने के कारण पेट्रोलियम लॉबी उनके खिलाफ पूरी ताकत लगा रही है.
उन्होंने कहा, “हमारे देश को आत्मनिर्भर बनना चाहिए. मैंने पहले भी कई योजनाओं का जिक्र किया था. जब मैंने योजनाओं का जिक्र किया, तो लोग मुझ पर हंसते थे और मुझे पागल कहते थे, लेकिन मैंने साबित कर दिया है कि मैंने इस क्षेत्र में काम किया है. मैं लाठी लेकर बैठा हूं, मैं प्रबंधन करने के लिए पैदा नहीं हुआ हूं. अच्छा काम करो, मैं तुम्हें मारूंगा नहीं.”

गडकरी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों से परिवहन मंत्री रहने के दौरान मैंने सीएनजी, एलएनजी और इलेक्ट्रिक वाहनों के विकास को देखा है. ग्रीन ईंधन की अर्थव्यवस्था में हमारी एक प्रतिशत भी हिस्सेदारी नहीं है, लेकिन पेट्रोलियम लॉबी पूरी ताकत से मेरे पीछे पड़ी हुई है. साफ है कि बहुत से लोगों के हित जीवाश्म ईंधन के आयात से जुड़े हैं. जब देश का करीब 22 लाख करोड़ रुपये का आयात बिल इससे जुड़ा हो, तो यह लॉबी इतनी आसानी से हरित ईंधन के सपनों को पूरा नहीं होने देगी.”केंद्रीय मंत्री ने कहा, “भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का करीब 86 प्रतिशत आयात करता है और जीवाश्म ईंधन के आयात पर हर साल लगभग 22 लाख करोड़ रुपये खर्च होते हैं.”

गडकरी ने कहा कि सरकार का लक्ष्य वर्ष 2030 तक देश की परिवहन व्यवस्था को स्मार्ट, सुरक्षित और टिकाऊ बनाना है. इसके लिए गैर-प्रदूषणकारी और स्वदेशी ईंधन को बढ़ावा देने सहित कई पहल की गई हैं.
उन्होंने कहा, “हरित और वैकल्पिक ईंधन ग्रामीण कृषि अर्थव्यवस्था को मजबूत करेंगे, प्रदूषण कम करेंगे और जीवाश्म ईंधन के आयात बिल को घटाने में मदद करेंगे. ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता हासिल करना देश को पांच लाख करोड़ डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने के लक्ष्य की दिशा में आगे बढ़ाएगा.”
उन्होंने कहा कि हरित एवं वैकल्पिक ईंधन क्षेत्र में बड़ी संभावनाएं हैं और आने वाले कुछ वर्षों में इस क्षेत्र में कम-से-कम 5,000 कंपनियां काम कर सकती हैं. हालांकि, इस क्षेत्र में प्रौद्योगिकी की विश्वसनीयता, लागत और गुणवत्ता के मानकों पर प्रतिस्पर्धा अहम होगी.
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि हरित ईंधन को बढ़ावा देने का उद्देश्य किसानों की आय बढ़ाना, जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम करना और ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर पैदा करना है. उन्होंने कहा कि पश्चिम एशिया में जारी संकट से यह स्पष्ट हो गया है कि देश के लिए ऊर्जा सुरक्षा कितनी महत्वपूर्ण है.

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