*भारतीय नौसेना की बढ़ती ताकत वैश्विक समुद्री सुरक्षा में अहम, इजरायली विशेषज्ञ ने बताया ‘गेमचेंजर’*

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*भारतीय नौसेना की बढ़ती ताकत वैश्विक समुद्री सुरक्षा में अहम, इजरायली विशेषज्ञ ने बताया ‘गेमचेंजर’*

 

नई दिल्ली। भारतीय नौसेना की बढ़ती क्षमता और हिंद महासागर क्षेत्र में उसकी सक्रिय भूमिका को लेकर इजरायली विशेषज्ञ पौशाली लास ने भारत को वैश्विक समुद्री सुरक्षा का महत्वपूर्ण स्तंभ बताया है। उन्होंने जेरूशलम पोस्ट में प्रकाशित अपने लेख में कहा कि भारतीय नौसेना महत्वपूर्ण समुद्री चोकप्वाइंट्स की सुरक्षा सुनिश्चित करने में अहम भूमिका निभा रही है और यह पश्चिमी देशों के लिए भी एक “गेमचेंजर” साबित हो सकती है।

लेख में कहा गया है कि भारत इजरायल सहित कई देशों के लिए हिंद महासागर क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण साझेदार बनकर उभरा है। वर्तमान में भारत लगभग हर 40 दिन में एक नया युद्धपोत या पनडुब्बी अपने नौसैनिक बेड़े में शामिल कर रहा है। देश के पास 40 शिपबिल्डिंग प्लेटफॉर्म सक्रिय हैं और वर्ष 2035 तक भारतीय नौसेना में 200 युद्धपोत शामिल करने का लक्ष्य रखा गया है।

विशेषज्ञ के अनुसार, भारत तेजी से अरब सागर की प्रमुख समुद्री शक्ति के रूप में अपनी पहचान मजबूत कर रहा है। वर्ष 2024 में लाल सागर और आसपास के क्षेत्रों में समुद्री हमलों में वृद्धि के दौरान भारतीय नौसेना ने 30 से अधिक युद्धपोत तैनात कर कई घटनाओं में प्रभावी कार्रवाई की। इस दौरान भारत ने राष्ट्रीयता की परवाह किए बिना सैकड़ों लोगों को सुरक्षित निकाला तथा अरबों डॉलर मूल्य के सामान ले जा रहे वाणिज्यिक जहाजों को सुरक्षा प्रदान की।

पौशाली लास ने अपने लेख में कहा कि भविष्य में सबसे महत्वपूर्ण प्रश्न यह नहीं होगा कि हॉर्मुज़, बाब-अल-मंदेब और मलक्का जलडमरूमध्य पर किसका नियंत्रण है, बल्कि यह होगा कि इन रणनीतिक समुद्री मार्गों को सुरक्षित रखने की क्षमता किसके पास है। उनके अनुसार, इस दिशा में भारतीय नौसेना की भूमिका लगातार अधिक महत्वपूर्ण होती जा रही है।


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