चार श्रम संहिताओं के खिलाफ श्रमिकों की हड़ताल, गांधी पार्क में सभा के बाद निकाला जुलूस
रुद्रपुर, 12 फरवरी। श्रमिक संयुक्त मोर्चा, ऊधम सिंह नगर के बैनर तले बुधवार को श्रमिकों, किसानों, आशा कार्यकर्ताओं, भोजनमाताओं समेत विभिन्न संगठनों के सैकड़ों कार्यकर्ताओं ने हड़ताल कर गांधी पार्क में सभा आयोजित की। सभा के बाद बाजार क्षेत्र में जुलूस निकालकर सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया गया।
सभा को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने केंद्र सरकार से चार श्रम संहिताओं सहित अन्य “काले कानूनों” को वापस लेने की मांग की। उन्होंने आरोप लगाया कि नए श्रम कोड्स के माध्यम से मजदूरों के अधिकारों को कमजोर किया जा रहा है। वक्ताओं ने कहा कि श्रम संहिताओं के लागू होने से कार्यघंटों में वृद्धि, फिक्स्ड टर्म एम्प्लॉयमेंट को बढ़ावा और स्थायी रोजगार की व्यवस्था कमजोर होगी। साथ ही, यूनियन बनाने के अधिकार और सामूहिक सौदेबाजी की प्रक्रिया पर भी असर पड़ेगा।
वक्ताओं का कहना था कि ये श्रम संहिताएं बिना पर्याप्त परामर्श और श्रम संगठनों से व्यापक चर्चा के लाई गई हैं। उनका आरोप था कि इससे बड़ी संख्या में उद्योग श्रम कानूनों के दायरे से बाहर हो जाएंगे और श्रमिकों की सामाजिक सुरक्षा व कार्यस्थल सुरक्षा पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा।
सभा में वक्ताओं ने केंद्र सरकार की आर्थिक नीतियों, सार्वजनिक उपक्रमों के निजीकरण और प्रस्तावित कृषि संबंधी नीतियों पर भी चिंता जताई। उन्होंने आरोप लगाया कि रेलवे, बैंक, बीमा, कोयला, तेल, रक्षा, बिजली, दूरसंचार समेत कई रणनीतिक क्षेत्रों में निजीकरण की नीति से देश की आत्मनिर्भर अर्थव्यवस्था प्रभावित हो सकती है। बजट 2026-27 को भी इसी दिशा में बढ़ता कदम बताया गया।
सभा को सीएसटीयू महासचिव मुकुल, इंकलाबी मजदूर केंद्र के शहर सचिव कैलाश भट्ट, भाकपा (माले) जिला सचिव ललित मटियाली, जनकवि बल्ली सिंह चीमा, किसान यूनियन उग्राहा के अवतार सिंह, मजदूर अधिकार संघर्ष अभियान (मासा) के सुरेंद्र, क्रांतिकारी लोक अधिकार संगठन के शिवदेव सिंह, प्रगतिशील महिला एकता केंद्र की रविंद्र कौर, भूमि बचाओ आंदोलन के जगतार सिंह बाजवा, अखिल भारतीय किसान सभा के प्रदेश अध्यक्ष गंगाधर नौटियाल, ऐक्टू जिला सचिव अनिता अन्ना, सीटू के जगदेव सिंह, उत्तराखंड आशा हेल्थ वर्कर्स यूनियन की राज्य उपाध्यक्ष रीता कश्यप, ममता पानू, माकपा नेता राजेंद्र सिंह समेत कई वक्ताओं ने संबोधित किया।
कार्यक्रम में उत्तराखंड आशा हेल्थ वर्कर्स यूनियन, प्रगतिशील भोजनमाता संगठन, विभिन्न औद्योगिक इकाइयों की कर्मचारी यूनियनों और सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि व सदस्य बड़ी संख्या में मौजूद रहे।






