*खुदीराम बोस की पुण्यतिथि पर युवाओं ने लिया संघर्ष जारी रखने का संकल्प* *आरक्षण हमारा अधिकार आंदोलन का 95वां दिन, 20 सितंबर को जिला मुख्यालय घेराव की तैयारी पर मंथन*

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*खुदीराम बोस की पुण्यतिथि पर युवाओं ने लिया संघर्ष जारी रखने का संकल्प*

*आरक्षण हमारा अधिकार आंदोलन का 95वां दिन, 20 सितंबर को जिला मुख्यालय घेराव की तैयारी पर मंथन*

रुद्रपुर। शहीद खुदीराम बोस की पुण्यतिथि पर बुधवार को ‘आरक्षण हमारा अधिकार’ आंदोलन के 95वें दिन श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस दौरान युवाओं, समाजसेवियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने शहीद के चित्र पर पुष्प अर्पित कर उन्हें नमन किया। साथ ही उनके साहस, त्याग और देशप्रेम से प्रेरणा लेते हुए समाज के अधिकारों की लड़ाई को आगे भी मजबूती से जारी रखने का संकल्प लिया।

कार्यक्रम में बंगाली समाज के आरक्षण समेत विभिन्न सामाजिक अधिकारों को लेकर आंदोलन की आगामी रणनीति पर चर्चा की गई। वक्ताओं ने कहा कि आंदोलन को अब धरने तक सीमित न रखते हुए व्यापक सामाजिक भागीदारी के साथ आगे बढ़ाया जाएगा। इसके लिए विभिन्न सामाजिक संगठनों, युवाओं, विद्यार्थियों, बुद्धिजीवियों और समाजसेवियों को एक मंच पर लाने का प्रयास किया जाएगा।

शहादत से लिया संघर्ष का संदेश

वक्ताओं ने शहीद खुदीराम बोस के जीवन और बलिदान को याद करते हुए कहा कि उन्होंने बेहद कम उम्र में देश की आजादी के लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया था। उनके साहस और त्याग से आज की युवा पीढ़ी को प्रेरणा लेने की आवश्यकता है। वक्ताओं ने कहा कि जिस दृढ़ता के साथ खुदीराम बोस ने देश के लिए संघर्ष किया, उसी भावना के साथ लोकतांत्रिक और संवैधानिक अधिकारों की लड़ाई भी जारी रखी जानी चाहिए।

समाजसेवी सुब्रत कुमार विश्वास ने कहा कि खुदीराम बोस का जीवन युवाओं के लिए त्याग और संघर्ष की प्रेरणा है। उन्होंने कहा कि यदि 18 वर्ष की उम्र में खुदीराम बोस देश के लिए अपना जीवन न्योछावर कर सकते हैं तो समाज के अधिकारों के लिए 95 दिन क्या, जरूरत पड़ने पर 1095 दिन भी संघर्ष करने से पीछे नहीं हटेंगे। उन्होंने कहा कि न्याय और अधिकार की लड़ाई लंबी हो सकती है, लेकिन इससे पीछे हटना समाधान नहीं है।

20 सितंबर को बड़े आंदोलन की तैयारी

कार्यक्रम में आगामी 20 सितंबर को बंगाली समाज की व्यापक भागीदारी के साथ जिला मुख्यालय घेराव समेत बड़े आंदोलन की तैयारियों पर चर्चा की गई। वक्ताओं ने कहा कि आंदोलन को प्रभावी बनाने के लिए समाज के विभिन्न संगठनों और प्रतिनिधियों से संवाद किया जाएगा तथा उन्हें सम्मानपूर्वक आंदोलन से जोड़ा जाएगा।

वरिष्ठ समाजसेवी तरुण विश्वास ने कहा कि बंगाली समाज के अधिकारों की लड़ाई किसी एक व्यक्ति या संगठन की नहीं, बल्कि पूरे समाज की लड़ाई है। उन्होंने सभी संगठनों और समाज के लोगों से एकजुट होकर आंदोलन को मजबूती देने का आह्वान किया।

समाजसेवी सपन सरकार ने कहा कि समाज के प्रत्येक मूलभूत अधिकार के लिए आवाज उठाना जरूरी है। उन्होंने कहा कि जाति-पाति और भेदभाव से ऊपर उठकर प्रत्येक व्यक्ति को उसका अधिकार और सम्मान दिलाने के लिए सामूहिक प्रयास किए जाने चाहिए।

गांव-गांव पहुंचाने की तैयारी

वक्ताओं ने बताया कि आंदोलन को व्यापक स्वरूप देने के लिए आने वाले दिनों में गांवों, नगरों और विभिन्न क्षेत्रों में बैठकें आयोजित की जाएंगी। युवाओं और विद्यार्थियों की भागीदारी बढ़ाने के साथ वरिष्ठ समाजसेवियों और सामाजिक संगठनों से भी संवाद किया जाएगा।

कार्यक्रम के अंत में सभी ने शहीद खुदीराम बोस को नमन करते हुए उनके साहस, त्याग और देशप्रेम को अपने संघर्ष की प्रेरणा बनाने का संकल्प लिया।

कार्यक्रम में सुब्रत कुमार विश्वास, तरुण विश्वास, दीपक विश्वास, सपन सरकार, अमल मंडल, निमेष राय, भजन राय, निपेन विश्वास, जयदेव मादक, विकास सरकार, आशीष, संजय आईस, अजय, विद्युत, विकास विश्वास, रोहित मंडल, अभिमन्यु सना, राकेश सिकदर, विनोद, अनिल, विक्की राय समेत अन्य सामाजिक कार्यकर्ता और युवा मौजूद रहे।


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