*_रुपया ऐतिहासिक निचले स्तर पर, डॉलर के मुकाबले पहली बार 91 के पार फिसला_*

*_रुपया ऐतिहासिक निचले स्तर पर, डॉलर के मुकाबले पहली बार 91 के पार फिसला_*

नई दिल्ली: अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये में कमजोरी का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है. मंगलवार को घरेलू मुद्रा ने 91 रुपये प्रति डॉलर के अहम स्तर को पार कर लिया, जिससे बाजारों में चिंता और गहरा गई है. कारोबार की शुरुआत रुपये ने 2 पैसे की गिरावट के साथ 90.93 प्रति डॉलर पर की, जबकि सोमवार को यह 90.90 पर बंद हुआ था. दिन बढ़ने के साथ रुपये पर दबाव और बढ़ा और यह कारोबार के दौरान 91.01 के निचले स्तर तक फिसल गया.

सोमवार को ही रुपया 12 पैसे कमजोर होकर 90.90 प्रति डॉलर पर बंद हुआ था, जो अब तक के अपने रिकॉर्ड निचले बंद स्तर के बेहद करीब है. इससे पहले 16 दिसंबर 2025 को रुपया इंट्रा-डे कारोबार में 91.14 के सर्वकालिक निचले स्तर तक पहुंचा था और उस दिन 90.93 पर बंद हुआ था. विदेशी मुद्रा बाजार के जानकारों का मानना है कि रुपये की मौजूदा कमजोरी घरेलू और वैश्विक कारकों के “परफेक्ट स्टॉर्म” का नतीजा है.

वैश्विक तनाव और डॉलर की मजबूती

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप की ओर से दोबारा टैरिफ लगाने की धमकी और ग्रीनलैंड को लेकर यूरोपीय देशों से बढ़ते विवाद ने वैश्विक बाजारों में जोखिम से बचने (रिस्क-ऑफ) का माहौल बना दिया है. इस अनिश्चितता के चलते निवेशक सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर रुख कर रहे हैं, जिससे उभरती अर्थव्यवस्थाओं की मुद्राओं पर दबाव बढ़ा है.

फिनरेक्स ट्रेजरी एडवाइजर्स एलएलपी के ट्रेजरी प्रमुख और कार्यकारी निदेशक अनिल कुमार भंसाली के अनुसार, अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ट्रंप टैरिफ की वैधता पर अहम फैसला देने वाला है, जिसका सीधा असर वैश्विक बाजारों पर पड़ सकता है. इसके अलावा अमेरिका का श्रम बाजार लगातार मजबूत बना हुआ है, जिससे डॉलर को समर्थन मिल रहा है. बाजारों को यह भी आशंका है कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व लंबे समय तक ब्याज दरें ऊंची बनाए रख सकता है.

 

घरेलू वजहें भी जिम्मेदार

देश के भीतर रुपये पर सबसे बड़ा दबाव विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FII) की लगातार बिकवाली से आ रहा है. विदेशी निवेशक कई महीनों से भारतीय शेयर बाजार में शुद्ध विक्रेता बने हुए हैं. साल 2026 में अब तक वे 29,315 करोड़ रुपये से अधिक के शेयर बेच चुके हैं. इस भारी बिकवाली के चलते रुपया एशियाई मुद्राओं में सबसे कमजोर प्रदर्शन करने वालों में शामिल हो गया है.

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सीआर फॉरेक्स एडवाइजर्स के प्रबंध निदेशक अमित पाबरी का कहना है कि यदि वैश्विक अनिश्चितता बनी रहती है और रुपया 91.07 के ऊपर टिकता है, तो यह 91.70 से 92.00 के स्तर की ओर बढ़ सकता है, जब तक कि भारतीय रिजर्व बैंक की ओर से हस्तक्षेप न किया जाए. वहीं, अगर बाजार में कुछ सुधार आता है तो रुपये को 90.30–90.50 के स्तर पर सहारा मिल सकता है. फिलहाल, निवेशकों की नजरें वैश्विक घटनाक्रम और आरबीआई के संभावित कदमों पर टिकी हुई हैं.

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