*सीमा पार मानव तस्करी पर कसेगा शिकंजा, पंतनगर में होगा राज्य स्तरीय मंथन*

*सीमा पार मानव तस्करी पर कसेगा शिकंजा, पंतनगर में होगा राज्य स्तरीय मंथन*

रुद्रपुर। मानव तस्करी की रोकथाम, पीड़ितों के सुरक्षित बचाव एवं प्रभावी पुनर्वास तथा अंतरराज्यीय और अंतरराष्ट्रीय तस्करी नेटवर्क पर अंकुश लगाने के लिए 9 अक्टूबर को पंतनगर में राज्य स्तरीय मानव तस्करी सम्मेलन आयोजित किया जाएगा। सम्मेलन में मानव तस्करी से जुड़े मामलों की चुनौतियों, रोकथाम के उपायों और विभिन्न एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय को लेकर मंथन किया जाएगा।

सम्मेलन में उत्तराखंड समेत छह राज्यों के पुलिस अधिकारी, नेपाल की सामाजिक संस्था ‘मैती’ के प्रतिनिधि, पुलिस-प्रशासन, अर्द्धसैनिक बल, सुरक्षा एजेंसियों और विभिन्न सामाजिक संगठनों के करीब 134 प्रतिनिधि प्रतिभाग करेंगे। इसके अलावा उत्तराखंड के विभिन्न जनपदों के एसएसपी और एसपी, 13 एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट के नोडल अधिकारी व प्रभारी, पुलिसकर्मी, बाल कल्याण पुलिस अधिकारी, श्रम, शिक्षा तथा महिला एवं बाल विकास विभाग के अधिकारी, बाल कल्याण समितियों और विधिक सेवा प्राधिकरण के प्रतिनिधि भी शामिल होंगे।

कुमाऊं में सामने आए तस्करी के मामले

सम्मेलन में कुमाऊं क्षेत्र में सामने आए मानव तस्करी के मामलों से मिले अनुभवों और चुनौतियों पर भी चर्चा होगी। वर्ष 2018-19 में ऊधमसिंहनगर में नेपाल की 16 महिलाओं को मानव तस्करी कर भारत लाते समय सीमा क्षेत्र से रेस्क्यू किया गया था। वर्ष 2021 में पिथौरागढ़ में मां और सौतेले पिता द्वारा दो नाबालिग बेटियों को करीब 90 हजार रुपये में राजस्थान के अजमेर के लोगों को बेचने का मामला सामने आया था, जिन्हें पुलिस ने बरामद कर लिया।

वर्ष 2022 में ऊधमसिंहनगर में पुलिस ने ऐसे गिरोह का पर्दाफाश किया था, जो हरियाणा, दिल्ली और नेपाल से युवतियों को लाकर देह व्यापार में धकेल रहा था। पुलिस ने आरोपियों को गिरफ्तार कर तीन महिलाओं को मुक्त कराया था। वर्ष 2023 में हल्द्वानी में एक नाबालिग बालिका को पुलिस ने बरामद किया। जांच में सामने आया कि उसे नशे के इंजेक्शन देकर मानव तस्करी और देह व्यापार से जुड़े नेटवर्क में धकेलने का प्रयास किया जा रहा था।

वर्ष 2025 में काशीपुर में पुलिस ने अंतरराष्ट्रीय मानव तस्करी नेटवर्क का खुलासा करते हुए नेपाल से नौकरी का झांसा देकर लाए गए 32 युवकों को एक मकान में बंधक बनाकर रखने का मामला उजागर किया था। इसी वर्ष कुमाऊं क्षेत्र के युवाओं को आकर्षक नौकरी का झांसा देकर विदेश ले जाने और बाद में म्यांमार के साइबर स्कैम सेंटरों में पहुंचाकर साइबर ठगी के लिए मजबूर करने के मामले भी सामने आए।

विशेषज्ञ साझा करेंगे अनुभव

सम्मेलन में मानव तस्करी की रोकथाम और पीड़ितों के पुनर्वास के क्षेत्र में काम कर रहे विशेषज्ञ अपने अनुभव और सुझाव साझा करेंगे। इसमें अपर पुलिस महानिरीक्षक अपराध एवं कानून व्यवस्था डॉ. वी. मुरुगेशन, पुलिस महानिरीक्षक कुमाऊं परिक्षेत्र निवेदिता कुकरेती, सेवानिवृत्त पुलिस महानिदेशक एनडीआरएफ पी.एम. नायर, एसडब्ल्यूआरसी एनजीओ बनबसा के संस्थापक एवं सचिव जनक बहादुर चंद, मदद फाउंडेशन इंडिया चाइल्ड प्रोटेक्शन के संस्थापक राजेश मनी, जस्ट राइट फॉर चिल्ड्रन के राष्ट्रीय संयोजक एवं शक्ति वाहिनी के संस्थापक अधिवक्ता रविकांत, संयुक्त निदेशक (विधि) जी.सी. पंचोली, एपीओ अपर्णा अवस्थी, हरिद्वार की वरिष्ठ उप निरीक्षक अंजु कुमार सिंह और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक ऊधमसिंहनगर सहित अन्य अधिकारी एवं विशेषज्ञ प्रमुख रूप से शामिल होंगे।

सीमा पार तस्करी और साइबर नेटवर्क पर रहेगा फोकस

पुलिस महानिरीक्षक कुमाऊं परिक्षेत्र निवेदिता कुकरेती के निर्देशन में सम्मेलन की तैयारियां की जा रही हैं। सम्मेलन में सीमा क्षेत्रों की निगरानी, अंतरराज्यीय एवं अंतरराष्ट्रीय समन्वय, साइबर माध्यमों से होने वाली मानव तस्करी, पीड़ितों की पहचान और रेस्क्यू, सुरक्षित पुनर्वास तथा तस्करी में शामिल गिरोहों के खिलाफ प्रभावी कानूनी कार्रवाई जैसे विषयों पर विशेष मंथन होगा।

उत्तराखंड पुलिस की ओर से मानव तस्करी के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति के तहत कार्रवाई जारी है। सम्मेलन का उद्देश्य विभिन्न राज्यों और एजेंसियों के बीच समन्वय मजबूत कर मानव तस्करी के नेटवर्क को जड़ से खत्म करना और पीड़ितों को सुरक्षित एवं सम्मानजनक जीवन उपलब्ध कराना है।

उत्तराखंड पुलिस का संकल्प— मानव तस्करी के खिलाफ कठोर कार्रवाई, पीड़ितों की सुरक्षा और सुरक्षित समाज का निर्माण।

Advertisement
Advertisement
Advertisement