एमआरपी पर स्पष्ट नीति बनाए सरकार : नौटियाल
अखिल भारतीय ग्राहक पंचायत ने प्रधानमंत्री को भेजा ज्ञापन
देहरादून। अखिल भारतीय ग्राहक पंचायत संगठन ने अधिकतम खुदरा मूल्य (एमआरपी) को लेकर उपभोक्ताओं के हित में स्पष्ट नीति बनाए जाने की मांग की है। संगठन की ओर से प्रधानमंत्री और केंद्रीय वित्त मंत्री को ज्ञापन भेजकर उत्पादन मूल्य के न्यायोचित निर्धारण तथा एमएसपी और एमआरपी पर स्पष्ट नीति लागू करने का आग्रह किया गया है।
शुक्रवार को कलेक्ट्रेट में एसडीएम के माध्यम से भेजे गए ज्ञापन में कहा गया कि वस्तुओं की उत्पादन लागत कम होने के बावजूद उनका अधिकतम खुदरा मूल्य अत्यधिक निर्धारित कर दिया जाता है, जिससे उपभोक्ताओं का आर्थिक शोषण होता है। संगठन ने इसे अनुचित व्यापारिक व्यवहार बताते हुए इस पर प्रभावी नियंत्रण की मांग की।
प्रदेश अध्यक्ष विनोद नौटियाल ने कहा कि मूल्य निर्धारण केवल आर्थिक विषय नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय और उपभोक्ता अधिकारों से जुड़ा महत्वपूर्ण कानूनी मुद्दा है। उपभोक्ताओं को वस्तुओं की वास्तविक उत्पादन लागत की जानकारी प्राप्त करने का अधिकार होना चाहिए। उन्होंने कहा कि न्यायालय भी समय-समय पर आर्थिक गतिविधियों में मनमानी पर रोक लगाने की आवश्यकता पर बल देते रहे हैं।
ज्ञापन में उल्लेख किया गया कि मनमाना मूल्य निर्धारण संविधान के अनुच्छेद 14 के तहत समानता के अधिकार तथा अनुच्छेद 21 में प्रदत्त गरिमापूर्ण जीवन के अधिकार की भावना के विपरीत है। संगठन ने सर्वोच्च न्यायालय के विभिन्न निर्णयों का हवाला देते हुए मूल्य निर्धारण में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की मांग की।
संगठन ने यह भी कहा कि एमआरपी से अधिक कीमत वसूलना लीगल मेट्रोलॉजी एक्ट का उल्लंघन है। इसलिए संबंधित कानूनों में आवश्यक संशोधन किए जाएं, उनके कड़ाई से पालन की व्यवस्था हो तथा उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त दंडात्मक कार्रवाई की जाए।
ज्ञापन सौंपने वालों में प्रदेश सहसचिव राजेश मंजखोला, प्रदेश कोषाध्यक्ष कैलाश बहुगुणा, महानगर अध्यक्ष कमांडेंट अरुण रौथाण, जिलाध्यक्ष एडवोकेट आलोक घिल्डियाल, प्रो. सुनील सक्सेना, प्रचार आयाम प्रमुख आरके दक्ष, हेमंत कुमार और सुरेंद्र राणा सहित अन्य पदाधिकारी उपस्थित रहे।







