*बदरीनाथ पहुंचे सीएम धामी, भगवान बदरी विशाल के दर्शन कर प्रदेश की सुख-समृद्धि की कामना*

*बदरीनाथ पहुंचे सीएम धामी, भगवान बदरी विशाल के दर्शन कर प्रदेश की सुख-समृद्धि की कामना*

बदरीनाथ। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी रविवार को श्रीबदरीनाथ धाम पहुंचे। उन्होंने भगवान बदरी विशाल के दर्शन कर प्रदेश की सुख-समृद्धि और शांति की कामना की। इसके बाद मुख्यमंत्री ने श्रीबदरीनाथ कथा महोत्सव में प्रतिभाग कर संतों का आशीर्वाद लिया। इस दौरान संतों ने मुख्यमंत्री को अंगवस्त्र और स्मृति चिह्न भेंट कर सम्मानित किया।

कथा महोत्सव को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि बदरीनाथ धाम पहुंचना अपने आप में विशिष्ट आध्यात्मिक अनुभव है। भगवान बदरीनाथ की कृपा के बिना यहां पहुंचना संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि बदरीनाथ धाम भारत की आध्यात्मिक चेतना का जीवंत केंद्र है, जहां सनातन संस्कृति की चेतना निरंतर प्रवाहित होती है। यहां आस्था और अध्यात्म का अद्भुत संगम देखने को मिलता है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि संतों का सानिध्य और आशीर्वाद प्राप्त होना सौभाग्य की बात है। उन्होंने कहा कि गुरुदेव धर्म जीवन दास महाराज की 125वीं जयंती के अवसर पर संतों का आशीर्वाद प्राप्त करना विशेष है। धर्म जीवन दास महाराज ने अपने जीवन में त्याग, तपस्या और मानव सेवा का उदाहरण प्रस्तुत किया। उनका योगदान मंदिर निर्माण के साथ मानव कल्याण के क्षेत्र में भी रहा। उनके जीवन से समाज को सेवा, समर्पण और आध्यात्मिक मूल्यों की प्रेरणा मिलती है।

उन्होंने कहा कि तेजी से बदलते दौर में भावी पीढ़ी को आधुनिक शिक्षा के साथ अपनी संस्कृति, परंपराओं और नैतिक मूल्यों से भी जोड़ना जरूरी है। आधुनिक ज्ञान और सांस्कृतिक विरासत का समन्वय ही देश को मजबूत आधार दे सकता है। भारत को ऐसे युवाओं की आवश्यकता है, जो आधुनिक तकनीक अपनाने के साथ अपनी संस्कृति और परंपराओं की जड़ों से भी जुड़े रहें।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देशभर में प्राचीन विरासत और सनातन संस्कृति को सम्मान मिल रहा है। अयोध्या में भगवान श्रीराम के भव्य मंदिर का निर्माण, काशी विश्वनाथ कॉरिडोर और केदारनाथ धाम का पुनर्निर्माण इसी दिशा में महत्वपूर्ण कार्य हैं। उत्तराखंड में भी तीर्थाटन और पर्यटन को लगातार विकसित किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि माणा गांव को पहले देश का अंतिम गांव कहा जाता था, लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे भारत का पहला गांव बताया। इससे सीमावर्ती क्षेत्रों और वहां रहने वाले लोगों को नई पहचान मिली है। उत्तराखंड में शीतकालीन यात्रा को भी बढ़ावा दिया जा रहा है, जिससे श्रद्धालुओं को वर्षभर धार्मिक स्थलों के दर्शन का अवसर मिल रहा है। मुख्यमंत्री ने बताया कि आदि कैलाश में अब तक करीब 65 हजार श्रद्धालु दर्शन कर चुके हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार तीर्थाटन और पर्यटन के विकास के साथ प्रदेश की सामाजिक एवं सांस्कृतिक पहचान को सुरक्षित रखने के लिए भी लगातार कार्य कर रही है। अवैध गतिविधियों पर अंकुश लगाने और प्रदेश की संस्कृति तथा जनसांख्यिकीय स्वरूप की सुरक्षा के लिए भी सख्त कदम उठाए जा रहे हैं।

देवभूमि सांस्कृतिक महोत्सव में भी पहुंचे सीएम

मुख्यमंत्री ने बदरीनाथ धाम के अराइवल प्लाजा में आयोजित दो दिवसीय देवभूमि सांस्कृतिक महोत्सव में भी प्रतिभाग किया। भारतीय सेना और स्थानीय प्रशासन के सहयोग से ऑपरेशन सद्भावना के तहत आयोजित महोत्सव का उद्घाटन शनिवार को लेफ्टिनेंट जनरल डीजी मिश्रा ने किया था। ‘हमारी विरासत, हमारा भविष्य’ थीम पर आयोजित महोत्सव में उत्तराखंड की लोक संस्कृति और परंपराओं की विविध झलक देखने को मिली।

महोत्सव में गढ़वाली लोकनृत्य, लोक संगीत, पारंपरिक वाद्य यंत्र और धार्मिक प्रस्तुतियां आकर्षण का केंद्र रहीं। पांडव नृत्य और छंतोली नृत्य ने श्रद्धालुओं और पर्यटकों का विशेष रूप से मन मोहा। इस दौरान पारंपरिक खाद्य सामग्री, जैविक उत्पाद और स्थानीय स्तर पर तैयार विभिन्न उत्पादों की प्रदर्शनी भी लगाई गई।

इस अवसर पर पूज्य मंगलस्वरूप दास, महंत स्वामी नारायण, स्वामी धर्मबल्लभ दास, राकेश भाई, अजय पाल, जयपाल सिंह बर्थवाल, रघुवीर सिंह, भास्कर, हरक सिंह और माधव सेमवाल समेत तमाम लोग मौजूद रहे।

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