*मिलावटी खाद्य पदार्थों पर गंभीर सवाल, स्वास्थ्य सुरक्षा को लेकर बढ़ी चिंता*
नई दिल्ली। बाजार में बिकने वाले खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता और उनमें मिलावट को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। सोशल मीडिया पर प्रसारित एक दावे में भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) के हवाले से कहा गया है कि देश में हर साल करीब 4.20 लाख लोगों की मौत मिलावटी, बासी और विषाक्त भोजन के सेवन से होती है। हालांकि, ऐसे आंकड़ों की आधिकारिक पुष्टि किए जाने की जरूरत है।
खाद्य पदार्थों में मिलावट का मुद्दा लंबे समय से चिंता का विषय रहा है। सब्जियों और फलों में प्रतिबंधित रसायनों के इस्तेमाल, दूध में मिलावट तथा मसालों में हानिकारक रंगों के प्रयोग की शिकायतें समय-समय पर सामने आती रही हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, दूषित या मिलावटी खाद्य पदार्थों के लगातार सेवन से स्वास्थ्य पर गंभीर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
मुनाफे के लिए खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता से समझौता करने वाले कारोबारियों के खिलाफ खाद्य सुरक्षा कानून के तहत कार्रवाई का प्रावधान है। ऐसे मामलों में प्रभावी जांच, नियमित सैंपलिंग और दोषियों पर सख्त कार्रवाई जरूरी है।
खाद्य सुरक्षा से जुड़े मामलों में उपभोक्ताओं की जागरूकता भी अहम है। सरकार और संबंधित विभागों से मिलावट पर प्रभावी नियंत्रण, खाद्य पदार्थों की नियमित जांच तथा दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित करने की मांग उठती रही है। सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण भोजन उपलब्ध कराना स्वस्थ समाज की बुनियादी जरूरत है।







