टीएमयू में एलएलबी छात्र पढ़ेंगे नए श्रम कानून, पाठ्यक्रम में शामिल हुईं चार श्रम संहिताएं

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टीएमयू में एलएलबी छात्र पढ़ेंगे नए श्रम कानून, पाठ्यक्रम में शामिल हुईं चार श्रम संहिताएं

बदलते कानूनी परिदृश्य से रूबरू होंगे टीएमयू के लॉ स्टूडेंट्स

टीएमयू ने एलएलबी और इंटीग्रेटेड कोर्स में जोड़े नए श्रम कानून

नई लेबर कोड्स से छात्रों की बढ़ेगी व्यावसायिक दक्षता

रोजगारोन्मुख शिक्षा की दिशा में टीएमयू का बड़ा कदम

29 पुराने श्रम कानूनों की जगह बनीं संहिताएं, छात्र करेंगे अध्ययन

नए श्रम कानूनों की समझ से करियर को मिलेगा नया आयाम: प्रो. दीक्षित

 

मुरादाबाद। तीर्थंकर महावीर यूनिवर्सिटी (टीएमयू) के कॉलेज ऑफ लॉ एंड लीगल स्टडीज में अध्ययनरत एलएलबी एवं इंटीग्रेटेड कोर्स के छात्रों को इस शैक्षणिक सत्र से नए श्रम कानूनों का अध्ययन कराया जाएगा। विश्वविद्यालय ने हाल ही में लागू चार प्रमुख श्रम संहिताओं को पाठ्यक्रम में शामिल कर लिया है। इससे विद्यार्थियों को बदलते कानूनी परिदृश्य की बेहतर समझ विकसित करने और व्यावसायिक दक्षता हासिल करने में मदद मिलेगी।

विधि संकाय के डीन प्रो. हरबंश दीक्षित ने बताया कि देश में लागू की गई कोड ऑन वेजेज-2019, इंडस्ट्रियल रिलेशंस कोड-2020, सोशल सिक्योरिटी कोड-2020 तथा ऑक्यूपेशनल सेफ्टी, हेल्थ एंड वर्किंग कंडीशंस कोड-2020 का अब विस्तार से अध्ययन कराया जाएगा। टीएमयू में एलएलबी के तीन वर्षीय पाठ्यक्रम के साथ बीबीए-एलएलबी और बीकॉम-एलएलबी की कक्षाएं संचालित होती हैं। इसके अलावा एलएलएम और पीएचडी की सुविधा भी उपलब्ध है।

प्रो. दीक्षित ने बताया कि नई श्रम संहिताओं में वेतन की परिभाषा को एकरूप किया गया है, असंगठित क्षेत्र और गिग वर्कर्स को सामाजिक सुरक्षा के दायरे में लाया गया है तथा कार्यस्थलों पर सुरक्षा एवं स्वास्थ्य मानकों को मजबूत किया गया है। साथ ही 29 पुराने श्रम कानूनों को समेकित कर प्रक्रियाओं को सरल और पारदर्शी बनाया गया है।

उन्होंने कहा कि नए श्रम कानूनों का अध्ययन छात्रों को वर्तमान कानूनी व्यवस्था से जोड़ने के साथ-साथ उनके करियर के लिए भी लाभदायक सिद्ध होगा।

टीएमयू के प्राचार्य प्रो. एस.के. सिंह ने कहा कि विश्वविद्यालय आधुनिक एवं रोजगारोन्मुख शिक्षा प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है। नए श्रम कानूनों की पढ़ाई से छात्र सैद्धांतिक ज्ञान के साथ-साथ व्यावहारिक समझ भी विकसित कर सकेंगे। इससे उन्हें राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बदलते श्रम कानूनों को समझने में सहायता मिलेगी।


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