*सीसीटीवी और गवाहों की जांच में पारस चुघ के खिलाफ नहीं मिला मारपीट का साक्ष्य*

Spread the love

*सीसीटीवी और गवाहों की जांच में पारस चुघ के खिलाफ नहीं मिला मारपीट का साक्ष्य*

नैनीताल/रुद्रपुर। रुद्रपुर के बहुचर्चित सड़क दुर्घटना एवं कथित मारपीट प्रकरण में हाईकोर्ट के हस्तक्षेप के बाद पुलिस विवेचना में अहम तथ्य सामने आए हैं। सीसीटीवी फुटेज, स्वतंत्र गवाहों, घायलों और शिकायतकर्ता के बयानों की जांच के बाद पुलिस को पारस चुघ के खिलाफ मारपीट अथवा किसी अन्य अपराध में संलिप्तता का कोई साक्ष्य नहीं मिला। इसके बाद विवेचना में उनकी भूमिका समाप्त कर दी गई। राज्य सरकार की ओर से यह स्थिति हाईकोर्ट के समक्ष भी रखी गई है।

मामला सात अगस्त की रात काशीपुर रोड क्षेत्र में स्कूटी और स्कॉर्पियो की टक्कर से शुरू हुआ था। हादसे में अभिषेक और उसका साथी घायल हो गए थे। अगले दिन आठ अगस्त को कोतवाली रुद्रपुर में एफआईआर संख्या 0413/2026 दर्ज की गई। इसमें आरोप लगाया गया था कि हादसे के बाद पारस चुघ 10-12 युवकों के साथ मौके पर पहुंचे और घायलों के साथ मारपीट की।

आरोपों को गलत बताते हुए पारस चुघ ने हाईकोर्ट में WPCRL संख्या 1640/2026 दाखिल कर एफआईआर निरस्त करने और गिरफ्तारी से संरक्षण की मांग की थी। 14 अगस्त को मामले की सुनवाई के दौरान उनकी ओर से अदालत को बताया गया कि घटनास्थल का घटनाक्रम सीसीटीवी कैमरों में रिकॉर्ड हुआ है। इस पर हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को विवेचक से जानकारी लेने और सीसीटीवी फुटेज अगली सुनवाई में प्रस्तुत करने के निर्देश दिए थे।

इसके बाद पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज के साथ स्वतंत्र गवाहों, घायलों और शिकायतकर्ता अंकित के बयानों की जांच की। जांच में शिकायतकर्ता के बयान से सामने आया कि पारस चुघ के घटनास्थल पर पहुंचने तक दोनों घायल अस्पताल के लिए रवाना हो चुके थे। ऐसे में पारस चुघ और घायलों की एक साथ घटनास्थल पर मौजूदगी स्थापित नहीं हो सकी।

पुलिस विवेचना में भी कथित मारपीट के आरोपों की पुष्टि करने वाला कोई साक्ष्य नहीं मिला। पुलिस ने हाईकोर्ट को अवगत कराया कि पारस चुघ और उनके साथ बताए गए 10-12 युवकों के खिलाफ अपराध में संलिप्तता का कोई साक्ष्य सामने नहीं आया है। इसके बाद पारस चुघ की भूमिका विवेचना से हटा दी गई।

पारस चुघ की गिरफ्तारी की मांग को लेकर पूर्व में धरना-प्रदर्शन भी हुए थे। ऐसे में पुलिस जांच में आरोपों की पुष्टि के लिए साक्ष्य नहीं मिलने और विवेचना से भूमिका हटाए जाने को उनके लिए बड़ी राहत माना जा रहा है। मामले में उनकी ओर से अधिवक्ता विपुल शर्मा, ललित शर्मा और अनमोल संधू ने हाईकोर्ट में पैरवी की।


Spread the love

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *