*जैनी प्रकरण पर हरक सिंह रावत का धामी पर पलटवार, बोले- बयान देने से पहले तथ्यों की जानकारी लें* *सीबीआई से क्लीन चिट मिलने का किया दावा, अंकिता भंडारी हत्याकांड में न्याय को लेकर मुख्यमंत्री से पूछे सवाल*

*जैनी प्रकरण पर हरक सिंह रावत का धामी पर पलटवार, बोले- बयान देने से पहले तथ्यों की जानकारी लें*

 

*सीबीआई से क्लीन चिट मिलने का किया दावा, अंकिता भंडारी हत्याकांड में न्याय को लेकर मुख्यमंत्री से पूछे सवाल*

 

देहरादून। उत्तराखंड में जैनी प्रकरण को लेकर सियासत तेज हो गई है। पूर्व कैबिनेट मंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता हरक सिंह रावत ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के बयान पर पलटवार करते हुए नाराजगी जताई है। सोशल मीडिया पर वीडियो साझा कर उन्होंने मुख्यमंत्री पर तथ्यों की पूरी जानकारी के बिना बयान देने का आरोप लगाया। हरक सिंह रावत ने दावा किया कि जैनी प्रकरण में सीबीआई उन्हें पहले ही क्लीन चिट दे चुकी है। उन्होंने कहा कि किसी के राजनीतिक जीवन पर टिप्पणी करने से पहले तथ्यों की जानकारी लेना जरूरी है।

 

खुद की थी सीबीआई जांच की मांग

 

हरक सिंह रावत ने कहा कि जैनी प्रकरण में उन्होंने स्वयं सीबीआई जांच की मांग की थी। निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के लिए उन्होंने मंत्री पद से इस्तीफा भी दिया था। उन्होंने कहा कि उन्हें हमेशा कानून और न्याय व्यवस्था पर भरोसा रहा है। मुख्यमंत्री पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि बिना पूरी जानकारी के इस तरह की टिप्पणी करना पद की गरिमा के अनुरूप नहीं है।

 

कांग्रेस नेता ने अपने राजनीतिक सफर का जिक्र करते हुए कहा कि उन्होंने जनता के विश्वास और जनसेवा के आधार पर अपनी पहचान बनाई है। जनता ने उन्हें छह बार विधानसभा पहुंचाया है। उन्होंने कहा कि उनके राजनीतिक जीवन पर सवाल उठाने से पहले पूरे मामले के तथ्यों को समझना चाहिए।

 

अंकिता भंडारी को न्याय कब मिलेगा?

 

हरक सिंह रावत ने अंकिता भंडारी हत्याकांड का मुद्दा उठाते हुए मुख्यमंत्री से सवाल किया कि आखिर अंकिता को न्याय कब मिलेगा। उन्होंने कहा कि प्रदेश की बेटियां न्याय की मांग कर रही हैं, युवा रोजगार की उम्मीद लगाए बैठे हैं और जनता सरकार से जवाब चाहती है। ऐसे में राजनीतिक बयानबाजी के जरिए इन मुद्दों से ध्यान नहीं हटाया जा सकता।

 

उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री को उनके खिलाफ बयान देने के बजाय अंकिता भंडारी हत्याकांड से जुड़े सवालों का जवाब देना चाहिए। इस मामले में सामने आ रहे सवालों पर सरकार की जवाबदेही तय होनी चाहिए।

 

कांग्रेस ने लगाया ध्यान भटकाने का आरोप

 

उधर, कांग्रेस ने मुख्यमंत्री के बयान को अंकिता भंडारी हत्याकांड से जुड़े कथित वीआईपी प्रकरण से जनता का ध्यान भटकाने की कोशिश बताया है। पार्टी का आरोप है कि महत्वपूर्ण सवालों का जवाब देने के बजाय राजनीतिक बयानबाजी की जा रही है। कांग्रेस ने इस मामले में जवाबदेही सुनिश्चित करने की मांग भी उठाई है।

 

फिर आमने-सामने भाजपा और कांग्रेस

 

हरक सिंह रावत की तीखी प्रतिक्रिया के बाद जैनी प्रकरण एक बार फिर प्रदेश की राजनीति के केंद्र में आ गया है। इस मुद्दे पर भाजपा और कांग्रेस के बीच आरोप-प्रत्यारोप तेज होने के आसार हैं। हरक सिंह रावत ने तथ्यों के आधार पर चर्चा करने और महत्वपूर्ण मुद्दों पर जवाबदेही तय करने की बात कही है। अब मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की ओर से इस प्रतिक्रिया पर क्या रुख अपनाया जाता है, इस पर राजनीतिक हलकों की नजरें टिकी हैं।

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