रुद्रपुर में ‘अखिल भारतीय प्रतिरोध दिवस’ मनाया, मजदूरों की रिहाई की मांग
रुद्रपुर, 17 अप्रैल। नोएडा, गुरुग्राम, पानीपत और मानेसर सहित विभिन्न औद्योगिक क्षेत्रों में चल रहे मजदूर आंदोलनों पर कथित दमन के विरोध में श्रमिक संयुक्त मोर्चा के बैनर तले शहर के गांधी पार्क में सभा आयोजित कर ‘अखिल भारतीय प्रतिरोध दिवस’ मनाया गया। इस दौरान मानेसर व नोएडा में गिरफ्तार पुरुष एवं महिला मजदूरों समेत इंकलाबी मजदूर केंद्र और बिगुल मजदूर संगठन के कार्यकर्ताओं की तत्काल रिहाई तथा दर्ज मुकदमों को वापस लेने की मांग उठाई गई।
सभा को संबोधित करते हुए ऐक्टू के राष्ट्रीय सचिव केके बोरा ने केंद्र सरकार की श्रम नीतियों पर सवाल उठाते हुए कहा कि नई श्रम संहिताओं के दुष्परिणाम सामने आने लगे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कई स्थानों पर मजदूरों से 12-12 घंटे काम कराया जा रहा है, जिससे आक्रोश बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि मजदूरों के आंदोलनों को सुनने के बजाय उन्हें बदनाम करने का प्रयास किया जा रहा है।
सीएसटीयू के केंद्रीय महासचिव मुकुल ने आरोप लगाया कि नए आपराधिक कानूनों का इस्तेमाल मजदूर आंदोलनों को दबाने के लिए किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि हड़ताल जैसे अधिकारों पर प्रतिबंध लगाकर मजदूरों को जेल में डाला जा रहा है और उनके परिजनों को मिलने तक नहीं दिया जा रहा।
इंकलाबी मजदूर केंद्र के शहर कोषाध्यक्ष दिनेश ने बढ़ती महंगाई के बीच मजदूरों की आर्थिक स्थिति पर चिंता जताते हुए कहा कि यदि मजदूर न्यूनतम 20 हजार रुपये वेतन की मांग कर रहे हैं तो यह जायज है। उन्होंने सरकार पर पूंजीपतियों के पक्ष में खड़े होने का आरोप लगाया।
भाकपा (माले) के जिला सचिव ललित मटियाली ने मांग रखी कि गिरफ्तार मजदूरों को तत्काल रिहा किया जाए, न्यूनतम मजदूरी 42 हजार रुपये की जाए, ठेकेदारी प्रथा पर रोक लगे और चारों श्रम संहिताओं को रद्द किया जाए।
सभा को अनिता अन्ना, निरंजन लाल, धीरज जोशी, सौरभ और हीरा राठौर ने भी संबोधित किया, जबकि संचालन हरेंद्र सिंह ने किया। इस दौरान आइसा के प्रदेश सचिव धीरज कुमार समेत कई श्रमिक नेता व कार्यकर्ता उपस्थित रहे।







