*_युद्ध के साये में शेयर बाजार धराशायी, 1,352 अंक टूटकर बंद हुआ सेंसेक्स, निवेशकों के डूबे ₹12 लाख करोड़_*

Spread the love

*_युद्ध के साये में शेयर बाजार धराशायी, 1,352 अंक टूटकर बंद हुआ सेंसेक्स, निवेशकों के डूबे ₹12 लाख करोड़_*
मुंबई: वैश्विक स्तर पर बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव, विशेष रूप से अमेरिका और ईरान के बीच छिड़े युद्ध के कारण सोमवार को भारतीय शेयर बाजार में कोहराम मच गया. निवेशकों के बीच छाई घबराहट के चलते सेंसेक्स और निफ्टी दोनों ही प्रमुख सूचकांक लगभग 2 प्रतिशत की भारी गिरावट के साथ बंद हुए.
बाजार का हाल: एक नजर में
सोमवार को कारोबार की समाप्ति पर बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का सेंसेक्स 1,352.74 अंक (1.71%) गिरकर 77,566.16 के स्तर पर बंद हुआ. वहीं, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी 422.40 अंक (1.73%) की गिरावट के साथ 24,028.05 पर आ गया.

दिलचस्प बात यह रही कि दिन के निचले स्तरों से बाजार में कुछ रिकवरी देखी गई. निफ्टी अपने निचले स्तर 23,868.05 से करीब 160 अंक सुधरा, जबकि सेंसेक्स ने अपने इंट्रा-डे लो (76,424.55) से लगभग 1,142 अंकों की शानदार वापसी की. यह रिकवरी कच्चे तेल की कीमतों में आई मामूली नरमी के कारण संभव हो सकी.
तकनीकी मंदी में पहुंचा निफ्टी
आज की गिरावट के साथ ही निफ्टी आधिकारिक तौर पर ‘टेक्निकल करेक्शन जोन’ में प्रवेश कर गया है. निफ्टी अपने 5 जनवरी के रिकॉर्ड हाई (26,373) से 10 प्रतिशत से ज्यादा टूट चुका है. बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, अब निफ्टी के लिए 23,700–23,600 का स्तर महत्वपूर्ण सपोर्ट है. यदि यह स्तर टूटता है, तो बाजार 23,300 तक नीचे जा सकता है.
सेक्टोरल प्रदर्शन और निवेशकों की संपत्ति का नुकसान
बाजार में आई इस सुनामी से निवेशकों के करीब 12-13 लाख करोड़ रुपये स्वाहा हो गए. सबसे बुरा हाल बैंकिंग सेक्टर का रहा; निफ्टी PSU बैंक इंडेक्स 3.97% की गिरावट के साथ सबसे बड़ा लूजर रहा. इसके अलावा मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स भी क्रमश: 1.97% और 2.22% टूटकर बंद हुए.हालांकि, IT सेक्टर ने इस गिरावट के बीच थोड़ी मजबूती दिखाई. निफ्टी IT इंडेक्स 0.08% की मामूली बढ़त के साथ बंद होने में सफल रहा.
गिरावट के मुख्य कारण

युद्ध का डर: अमेरिका-ईरान संघर्ष ने वैश्विक सप्लाई चेन और ऊर्जा सुरक्षा पर सवाल खड़े कर दिए हैं.

कच्चा तेल: युद्ध की स्थिति में ब्रेंट क्रूड की कीमतें बढ़ने से भारत जैसे तेल आयातक देश की अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ गया है.

रुपये में कमजोरी: डॉलर के मुकाबले रुपये के रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंचने से विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने जमकर बिकवाली की.

आने वाले दिनों में बाजार की दिशा पूरी तरह से खाड़ी देशों के हालातों और कच्चे तेल की चाल पर टिकी रहेगी.


Spread the love

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *