*धान के दाम में ₹72 की बढ़ोतरी नाकाफी, ₹3000 प्रति क्विंटल हो समर्थन मूल्य : गणेश उपाध्याय*
*किसानों की बढ़ती लागत के बीच सरकार के फैसले पर कांग्रेस नेता ने उठाए सवाल, बोले- ‘ऊंट के मुंह में जीरा’*
रुद्रपुर। खरीफ खरीद सत्र 2026-27 के लिए उत्तराखंड सरकार की ओर से सामान्य धान का न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) 2,441 रुपये और ग्रेड-ए धान का 2,461 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित किए जाने पर कांग्रेस ने सवाल उठाए हैं। सरकार ने पिछले वर्ष के मुकाबले धान के समर्थन मूल्य में 72 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी की है। खाद्य मंत्री रेखा आर्य ने इस खरीफ सत्र में सात लाख मीट्रिक टन धान खरीद का लक्ष्य भी घोषित किया है।
उत्तराखंड कांग्रेस के महामंत्री एवं कुमाऊं विश्वविद्यालय नैनीताल के पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष डॉ. गणेश उपाध्याय ने कहा कि खेती की लागत लगातार बढ़ रही है, जबकि समर्थन मूल्य में की गई बढ़ोतरी किसानों की बढ़ती लागत के मुकाबले पर्याप्त नहीं है। उन्होंने कहा कि सरकार किसानों की वास्तविक उत्पादन लागत और उनकी आय के बीच बढ़ते अंतर को नजरअंदाज कर रही है।
डॉ. उपाध्याय ने कहा कि किसान बेमौसम बारिश, जंगली और पालतू जानवरों से फसल को बचाने के बाद जब उपज बेचने पहुंचता है, तो उसे उसकी मेहनत के अनुरूप मूल्य नहीं मिल पाता। डीजल-पेट्रोल, बीज, खाद, कीटनाशक, सिंचाई और मजदूरी समेत खेती की लागत लगातार बढ़ रही है। ऐसे में 72 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी किसानों के लिए पर्याप्त राहत नहीं है।
उन्होंने कहा कि भाजपा की धामी सरकार खुद को किसान हितैषी सरकार बताती है, लेकिन किसानों की वास्तविक उत्पादन लागत और उनकी आय के बीच के अंतर पर गंभीरता से विचार किए जाने की जरूरत है। किसान को उसकी उपज का उचित मूल्य मिलना केवल सरकारी घोषणा का विषय नहीं, बल्कि उसकी मेहनत और आजीविका से जुड़ा सवाल है।
डॉ. उपाध्याय ने कहा कि जिस तेजी से कृषि लागत बढ़ रही है, उसके मुकाबले 72 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी ‘ऊंट के मुंह में जीरा’ जैसी है। उन्होंने सरकार से धान का समर्थन मूल्य बढ़ाकर 3,000 रुपये प्रति क्विंटल करने की मांग की। साथ ही उत्पादन लागत का व्यापक आकलन कर ऐसी मूल्य नीति बनाने की मांग की, जिससे किसानों को जमीन, पानी, बीज, खाद, डीजल और मजदूरी पर होने वाले खर्च का उचित प्रतिफल मिल सके।
उन्होंने कहा कि सरकार को केवल धान खरीद का लक्ष्य घोषित करने के बजाय क्रय केंद्रों पर किसानों को समय पर भुगतान, पारदर्शी तौल, पर्याप्त सुविधाएं और बिना परेशानी के खरीद की व्यवस्था सुनिश्चित करनी चाहिए। राज्य सरकार के अनुसार खरीफ सत्र में धान की खरीद 1 अक्टूबर से 31 दिसंबर 2026 तक की जाएगी।


