पंजाब, उत्तराखंड और मेघालय में समय से पहले हो सकते हैं विधानसभा चुनाव, नवंबर में मतदान की चर्चा तेज

पंजाब, उत्तराखंड और मेघालय में समय से पहले हो सकते हैं विधानसभा चुनाव, नवंबर में मतदान की चर्चा तेज

नई दिल्ली। पंजाब समेत उत्तराखंड और मेघालय में विधानसभा चुनाव तय समय से पहले कराए जाने की अटकलें तेज हो गई हैं। हालांकि चुनाव आयोग की ओर से इस संबंध में अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है, लेकिन राजनीतिक गलियारों में नवंबर 2026 में चुनाव कराए जाने की संभावना पर चर्चा हो रही है। आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल भी सार्वजनिक रूप से समय पूर्व चुनाव होने की संभावना जता चुके हैं।

सूत्रों के अनुसार, चुनाव पहले कराने के पीछे दो प्रमुख कारण बताए जा रहे हैं। पहला, जनवरी-फरवरी के दौरान उत्तराखंड और मणिपुर जैसे पहाड़ी राज्यों में कड़ाके की ठंड और बर्फबारी के कारण मतदान प्रभावित होता है। ऐसे में प्रशासनिक दृष्टि से नवंबर में चुनाव कराना अधिक सुविधाजनक माना जा रहा है।

दूसरा कारण वर्ष 2027 में प्रस्तावित राष्ट्रीय जनगणना का दूसरा चरण है। विपक्षी दलों का कहना है कि फरवरी 2027 से शुरू होने वाले इस महत्वपूर्ण कार्य में बड़ी संख्या में सरकारी मशीनरी व्यस्त रहेगी, जिससे एक साथ कई राज्यों में विधानसभा चुनाव कराना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।

हाल ही में बठिंडा में आयोजित एक रोड शो के दौरान अरविंद केजरीवाल ने कहा कि उन्हें जानकारी मिली है कि पंजाब में चुनाव फरवरी 2027 के बजाय नवंबर 2026 में हो सकते हैं। उन्होंने कार्यकर्ताओं से चुनावी तैयारियों में जुटने का आह्वान करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान को दोबारा सत्ता में लाने की अपील की।

वहीं, भारतीय जनता पार्टी ने इन अटकलों को सिरे से खारिज करते हुए कहा है कि समय पूर्व चुनाव की चर्चाएं केवल कयासबाजी हैं और इस संबंध में कोई आधिकारिक निर्णय नहीं हुआ है।

संभावित समय पूर्व चुनाव की चर्चाओं के बीच पंजाब में राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। आम आदमी पार्टी ने चुनावी अभियान की शुरुआत कर दी है और पार्टी नेतृत्व सरकार के चार वर्षों के कार्यों को जनता के सामने रख रहा है। दूसरी ओर भाजपा भी केंद्रीय नेतृत्व के साथ चुनावी रणनीति तैयार करने में जुट गई है, जबकि कांग्रेस संगठन को मजबूत करने और आंतरिक समन्वय पर ध्यान केंद्रित कर रही है।

फिलहाल समय पूर्व चुनाव को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। अंतिम निर्णय चुनाव आयोग के स्तर पर ही लिया जाएगा। हालांकि इन चर्चाओं ने तीनों राज्यों में राजनीतिक दलों की चुनावी तैयारियों को तेज कर दिया है।

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