मीरा मार्ग स्थित जूते के शोरूम में भीषण आग, लाखों का सामान राख
हल्द्वानी। शहर के व्यस्त व्यावसायिक क्षेत्र मीरा मार्ग स्थित एक जूते के शोरूम में मंगलवार देर रात भीषण आग लग गई। देखते ही देखते आग ने विकराल रूप धारण कर लिया, जिससे क्षेत्र में अफरा-तफरी मच गई। दमकल विभाग की तत्परता से आग पर समय रहते काबू पा लिया गया, जिससे आसपास की दुकानों को सुरक्षित बचा लिया गया। हालांकि शोरूम में रखा अधिकांश सामान जलकर राख हो गया और लाखों रुपये के नुकसान की आशंका जताई जा रही है।
जानकारी के अनुसार समाजवादी पार्टी नेता अब्दुल मतीन सिद्दीकी के पुत्र सुमेर सिद्दीकी का मीरा मार्ग में ‘माशा शूज’ नाम से जूतों का शोरूम है। मंगलवार देर शाम वह दुकान बंद कर घर चले गए थे। रात करीब 10 बजे राहगीरों ने दुकान से धुआं निकलते देखा और इसकी सूचना शोरूम स्वामी व अग्निशमन विभाग को दी। सूचना मिलते ही दमकल विभाग की टीम चार फायर टेंडरों के साथ मौके पर पहुंची और राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया।
करीब डेढ़ घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद दमकल कर्मियों ने आग पर पूरी तरह काबू पा लिया। समय रहते कार्रवाई होने से आग को आसपास की दुकानों तक फैलने से रोक लिया गया। शोरूम स्वामी सुमेर सिद्दीकी ने बताया कि आग से लाखों रुपये का नुकसान हुआ है। शोरूम में रखा जूतों का स्टॉक, फर्नीचर तथा अन्य सामान पूरी तरह जल गया।
फायर स्टेशन अधिकारी मिंदर पाल सिंह ने बताया कि आग लगने के कारणों की जांच की जा रही है। साथ ही विभाग द्वारा हुए नुकसान का आकलन भी कराया जाएगा।
घटना के समय बाजार लगभग बंद हो चुका था, लेकिन आग की सूचना मिलते ही बड़ी संख्या में लोग मौके पर पहुंच गए। मीरा मार्ग शहर का प्रमुख व्यावसायिक क्षेत्र होने के कारण लोगों में काफी देर तक दहशत का माहौल बना रहा। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि आग दिन के समय लगती या समय रहते इसकी जानकारी नहीं मिलती तो आसपास की कई दुकानें भी इसकी चपेट में आ सकती थीं, जिससे बड़ा नुकसान हो सकता था।
दमकल विभाग के लिए चुनौतीपूर्ण रहा मंगलवार
मंगलवार का दिन दमकल विभाग के लिए बेहद व्यस्त और चुनौतीपूर्ण रहा। शाम को मुखानी क्षेत्र के हीरानगर स्थित केवीएम स्कूल में लगी आग पर काबू पाने के बाद टीम को राहत भी नहीं मिली थी कि देर रात मीरा मार्ग स्थित शोरूम में अग्निकांड की सूचना मिल गई। लगातार दो बड़े अग्निकांडों से दमकल कर्मियों को देर रात तक राहत एवं बचाव कार्य में जुटे रहना पड़ा।







