रुद्रपुर: मंगलवार को शराब, केएफसी पर ताला लगाओ वरना आंदोलन—सुब्रत विश्वास नेतृत्व में संगठनों का नगर आयुक्त को ज्ञापन

रुद्रपुर | 10 फरवरी 2026

मांस दुकानों की बंदी के बाद अब शराब ठेकों पर सवाल, संगठनों ने दिया एक माह का अल्टीमेटम

छोटे व्यापारियों पर कार्रवाई, बड़े प्रतिष्ठानों को छूट—रुद्रपुर में बंदी नीति पर उठे सवाल

मंगलवार बंदी को लेकर नया विवाद, शराब दुकानों और बड़े नॉनवेज प्रतिष्ठानों पर कार्रवाई की मांग

मंगलवार को शहर में मांस–मछली की दुकानों की बंदी के बीच अब शराब की दुकानों और बड़े नॉनवेज प्रतिष्ठानों को लेकर भी विवाद गहराता नजर आ रहा है। मंगलवार को सुब्रत कुमार विश्वास के नेतृत्व में समस्त सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने नगर निगम कार्यालय पहुंचकर नगर आयुक्त जोशी को ज्ञापन सौंपा। महापौर विकास शर्मा की अनुपस्थिति में यह ज्ञापन नगर आयुक्त को दिया गया।

ज्ञापन में मांग की गई कि मंगलवार को शहर में अंग्रेजी व देसी शराब की दुकानों (भाटिया सहित), बीयर बार, केएफसी तथा बड़े नॉनवेज रेस्टोरेंट्स पर पूर्ण रूप से बंदी लागू की जाए। संगठनों ने प्रशासन को एक माह का अल्टीमेटम देते हुए कहा कि यदि इस अवधि में मांगें पूरी नहीं हुईं, तो नगर निगम कार्यालय और शराब ठेकों पर धरना-प्रदर्शन किया जाएगा।

संगठनों का कहना है कि धार्मिक आस्था के नाम पर केवल छोटे मांस विक्रेताओं को निशाना बनाना उचित नहीं है। ज्ञापन में उल्लेख किया गया कि मंदिरों के आसपास नशे में धुत लोग पड़े रहते हैं, जिससे श्रद्धालुओं की भावनाएं आहत होती हैं। वक्ताओं ने सवाल उठाया कि यदि धर्म और संस्कृति की रक्षा की बात की जा रही है, तो फिर शराब के ठेकों और बड़े नॉनवेज ब्रांड्स पर कार्रवाई क्यों नहीं की जाती।

यह भी मांग रखी गई कि यदि मंगलवार को मांस-मछली की दुकानों को बंद कराया जाता है, तो प्रभावित छोटे व्यापारियों को प्रतिदिन एक हजार रुपये की दिहाड़ी दी जाए, ताकि उनकी आजीविका प्रभावित न हो।

ज्ञापन सौंपने के दौरान एडवोकेट संजय आजाद (भीम आर्मी), सुरेश भारती, दीपक कुमार (युवा अंबेडकर संगठन), संजय सरकार, अभिमन्यु साना, दिनेश रवि, सोमपाल जगन्नाथ मंडल, मोहम्मद अंसारी, जसपाल सिंह, रविंद्र सिंह और मोहम्मद असलम सहित अनेक सामाजिक कार्यकर्ता उपस्थित रहे। सभी ने एक स्वर में कहा कि बड़े प्रतिष्ठानों को छूट देकर छोटे व्यापारियों पर कार्रवाई करना दोहरा मापदंड है।

इस मौके पर सुब्रत कुमार विश्वास ने कहा कि महापौर विकास शर्मा एक “विकास पुरुष” हैं और उनके सम्मान को बनाए रखना सभी की जिम्मेदारी है, लेकिन छोटे व्यापारियों का शोषण बंद होना चाहिए। उन्होंने उत्तराखंड में शराबबंदी के संकल्प को साकार करने के लिए कम से कम मंगलवार को रुद्रपुर को नशामुक्त घोषित करने की मांग की।

नगर आयुक्त जोशी ने ज्ञापन स्वीकार करते हुए मांगों पर विचार करने का आश्वासन दिया। इधर, शहर में इस मुद्दे को लेकर राय बंटी हुई है। कुछ लोग बंदी के समर्थन में हैं, जबकि कुछ व्यापार और रोजगार पर पड़ने वाले असर को लेकर चिंता जता रहे हैं। अब सभी की नजरें प्रशासन और महापौर विकास शर्मा की प्रतिक्रिया पर टिकी हैं।

Advertisement
Advertisement
Advertisement