*आरक्षण हमारा अधिकार आंदोलन के 148 दिन पूरे, 24 घंटे से धरने पर बैठे सुब्रत विश्वास*

*आरक्षण हमारा अधिकार आंदोलन के 148 दिन पूरे, 24 घंटे से धरने पर बैठे सुब्रत विश्वास*

रुद्रपुर। बंगाली समाज के आरक्षण एवं विभिन्न सामाजिक अधिकारों की मांग को लेकर रवींद्रनाथ टैगोर पार्क में चल रहे ‘आरक्षण हमारा अधिकार’ आंदोलन ने 148 दिन पूरे कर लिए हैं। आंदोलन के तहत पिछले 24 घंटे से लगातार धरना जारी है। समाजसेवी सुब्रत कुमार विश्वास धरनास्थल पर मौजूद रहकर बंगाली समाज की मांगों को लेकर आवाज उठा रहे हैं।

धरने को समर्थन देने के लिए राजू विश्वास, विशाल मलिक, जुगल किशोर गंगवार, कल्याण सिंह, खेड़ी सिंह, भजन राय, नितिन विश्वास, तरुण राय, श्यामल कुमार समेत कई सामाजिक कार्यकर्ता और युवा धरनास्थल पर पहुंचे। आंदोलनकारियों ने कहा कि बंगाली समाज से जुड़े आरक्षण, सामाजिक न्याय, शिक्षा, मातृभाषा, प्रमाण-पत्र और अन्य सामाजिक अधिकारों के मुद्दों पर सरकार की ओर से ठोस पहल की आवश्यकता है।

राजू विश्वास ने कहा कि आंदोलन किसी एक व्यक्ति तक सीमित नहीं है, बल्कि बंगाली समाज के अधिकारों से जुड़े मुद्दों को लेकर चलाया जा रहा है। 148 दिनों से जारी धरना समाज की मांगों के प्रति गंभीरता को दर्शाता है। उन्होंने समाज के लोगों से लोकतांत्रिक तरीके से अपनी आवाज उठाने की अपील की।

तरुण राय ने कहा कि बंगाली समाज के अधिकारों से जुड़े मुद्दों को लेकर लंबे समय से आवाज उठाई जा रही है। समाज के सभी लोगों को आपसी मतभेदों से ऊपर उठकर एक मंच पर आकर अपनी मांगों को सरकार के सामने रखना चाहिए। उन्होंने कहा कि आंदोलन में युवाओं की भागीदारी महत्वपूर्ण है।

भजन राय ने कहा कि धरने के 148 दिन पूरे होना लंबे संघर्ष को दर्शाता है। समाज को उम्मीद है कि सरकार बंगाली समाज की मांगों पर गंभीरता से विचार करेगी। उन्होंने आंदोलन को शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से जारी रखने की बात कही।

नितिन विश्वास ने कहा कि बंगाली समाज की आने वाली पीढ़ी के शिक्षा, रोजगार और सामाजिक अधिकारों से जुड़े मुद्दों पर गंभीरता से विचार किया जाना आवश्यक है। युवाओं को इन विषयों के प्रति जागरूक होकर संवैधानिक और लोकतांत्रिक तरीके से अपनी आवाज उठानी चाहिए।

आंदोलनकारियों के अनुसार, धरने के दौरान समाज के विभिन्न वर्गों की ओर से लगातार समर्थन मिल रहा है। आंदोलन के पूर्व चरणों में सामूहिक मुंडन, रक्त-हस्ताक्षर अभियान, जनसभाओं और सामाजिक बैठकों के माध्यम से भी मांगों को उठाया गया है।

सुब्रत कुमार विश्वास ने कहा कि आंदोलन को व्यक्तिगत संघर्ष के रूप में नहीं, बल्कि बंगाली समाज से जुड़े व्यापक मुद्दों की आवाज के रूप में देखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि मांगों के समाधान के लिए सरकार और प्रशासन के साथ संवाद की प्रक्रिया जारी रखते हुए लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन आगे बढ़ाया जाएगा।

आंदोलनकारियों ने कहा कि 148 दिन पूरे होने के बावजूद धरना जारी है। आगे की रणनीति समाज के लोगों से विचार-विमर्श के बाद तय की जाएगी।

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