*अमेरिका-ईरान के बीच फिर बढ़ा सैन्य तनाव, एक-दूसरे पर दागीं मिसाइलें*
*लारक द्वीप पर अमेरिकी कार्रवाई के जवाब में ईरान ने जॉर्डन स्थित सैन्य ठिकानों को बनाया निशाना, आठ मिसाइलें मार गिराने का दावा*
वाशिंगटन/तेहरान। अमेरिका और ईरान के बीच एक बार फिर सैन्य तनाव बढ़ गया है। रविवार रात से सोमवार सुबह के बीच दोनों देशों ने एक-दूसरे के ठिकानों को निशाना बनाते हुए हमले किए। एक महीने से अधिक समय बाद दोनों देशों के बीच हुए इस सीधे सैन्य टकराव ने क्षेत्र में हफ्तों से बनी शांति के बाद संघर्ष गहराने की आशंका बढ़ा दी है।
तनाव की शुरुआत उस समय हुई, जब अमेरिकी सेना ने लारक द्वीप पर ईरान के दो रॉकेट लॉन्चरों को नष्ट करने का दावा किया। अमेरिकी पक्ष के अनुसार, ईरानी बल वैश्विक व्यापार के महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग होर्मुज जलडमरूमध्य में बारूदी सुरंगें बिछाने की तैयारी कर रहे थे और इसके लिए रॉकेट लॉन्च करने की तैयारी की जा रही थी।
अमेरिकी कार्रवाई के जवाब में ईरान ने जॉर्डन स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों की ओर मिसाइलें दागीं। जॉर्डन के सशस्त्र बलों ने दावा किया कि उनकी वायु रक्षा प्रणाली ने देश के हवाई क्षेत्र में प्रवेश करने वाली आठ मिसाइलों को बीच में ही रोककर नष्ट कर दिया। जॉर्डन की सेना के अनुसार, मिसाइलों को नागरिकों और संपत्ति को किसी प्रकार का नुकसान पहुंचाने से पहले निष्क्रिय कर दिया गया।
इस बीच संयुक्त अरब अमीरात ने भी अपने समुद्री क्षेत्र के ऊपर ईरान की ओर से आ रहे एक ड्रोन को मार गिराने का दावा किया है। इससे पहले ईरानी सरकारी मीडिया ने दावा किया था कि ईरानी सेना ने यूएई स्थित एक अमेरिकी सैन्य ठिकाने को निशाना बनाया है।
अमेरिकी सेंट्रल कमान (सेंटकॉम) के प्रवक्ता कैप्टन टिम हॉकिन्स ने कहा कि अमेरिकी कार्रवाई का उद्देश्य होर्मुज जलडमरूमध्य में बारूदी सुरंगें बिछाने की तैयारी कर रहे ईरानी बलों को रोकना था। सेंटकॉम ने इस अभियान को रणनीतिक जलमार्ग के लिए आसन्न खतरा पैदा करने वाले ईरानी सैन्य ठिकानों के खिलाफ ‘सीमित और सटीक कार्रवाई’ बताया है।
सेंटकॉम ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर कहा कि ईरान की गतिविधियों से समुद्री मार्ग पर खतरा उत्पन्न हुआ था और अमेरिकी सेना ने नागरिक नाविकों, वाणिज्यिक जहाजों तथा वैश्विक व्यापार के सुचारू संचालन की सुरक्षा के लिए कार्रवाई की। ताजा घटनाक्रम के बाद पश्चिम एशिया में तनाव एक बार फिर बढ़ गया है और अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजरें दोनों देशों की अगली रणनीति पर टिकी हैं।











