इंजीनियरिंग उद्योगों के लिए वेतन पुनरीक्षण बोर्ड गठन की मांग, उपश्रमायुक्त को सौंपा ज्ञापन
रुद्रपुर, 23 अप्रैल।
श्रमिक संयुक्त मोर्चा के नेतृत्व में विभिन्न मजदूर संगठनों ने गुरुवार को उपश्रमायुक्त को ज्ञापन सौंपकर इंजीनियरिंग उद्योगों में वेतन पुनरीक्षण बोर्ड गठित करने तथा परिवर्तनीय महंगाई भत्ता (वीडीए) बढ़ाने की मांग की।
ज्ञापन में श्रमिक नेताओं ने कहा कि राज्य में इंजीनियरिंग, हैवी इंजीनियरिंग और ऑटोमोबाइल सेक्टर के लिए वेतन पुनरीक्षण को लेकर अब तक शासन स्तर पर कोई ठोस पहल नहीं की गई है। पिछले 25 वर्षों में महंगाई में भारी वृद्धि के बावजूद वेतन पुनरीक्षण बोर्ड का गठन न होना श्रमिकों के साथ अन्याय है।
उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले तीन वर्षों से इंजीनियरिंग उद्योगों में परिवर्तनीय महंगाई भत्ता की गणना वास्तविक बाजार दरों के बजाय मनमाने और काल्पनिक आंकड़ों के आधार पर की जा रही है, जिससे श्रमिकों को मिलने वाला वीडीए वास्तविक महंगाई की तुलना में काफी कम है। इस स्थिति के चलते मजदूर वर्ग पर आर्थिक दबाव बढ़ा है और औद्योगिक क्षेत्रों में असंतोष की स्थिति बनी हुई है।
श्रमिक नेताओं ने बताया कि 15 मार्च 2024 को राज्य सरकार द्वारा अन्य उद्योगों के लिए न्यूनतम वेतन घोषित किया गया था, जिसे नैनीताल उच्च न्यायालय ने भी मान्यता दी है। इसके बावजूद अब तक वीडीए का गजट प्रकाशित नहीं किया गया है, जिससे श्रमिक इसके लाभ से वंचित हैं।
उन्होंने मांग की कि वास्तविक बाजार दरों के आधार पर वीडीए की गणना कर उसे शीघ्र घोषित किया जाए। साथ ही लंबित वीडीए का भुगतान सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक आदेश जारी किए जाएं।
ज्ञापन सौंपने वालों में मोर्चा अध्यक्ष दिनेश तिवारी, सीएसटीयू महासचिव मुकुल, ऐक्टू जिला सचिव अनिता अन्ना, इंकलाबी मजदूर केंद्र के दिनेश, ऐक्टू प्रदेश कोषाध्यक्ष मटियाली, हरेंद्र सिंह, उत्तम दास, हेमंत भट्ट और महेंद्र रावत सहित अन्य श्रमिक नेता मौजूद रहे।







