*तुर्कागोरी रामलीला का शुभारंभ, डॉ. गणेश उपाध्याय बोले—जनता के जीवन में दिखना चाहिए रामराज्य*
*रामलीला के मंच से न्याय, समानता, महिला सुरक्षा और युवाओं को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने पर दिया जोर*
रुद्रपुर। तुर्कागोरी में आयोजित रामलीला का शुभारंभ कांग्रेस के प्रदेश महामंत्री डॉ. गणेश उपाध्याय, जिला पंचायत सदस्य प्रेम आर्य, लालपुर के जिला पंचायत सदस्य गुरदास कालरा, पूर्व जिला पंचायत सदस्य विनोद कोरंगा और बंटी पपनेजा ने संयुक्त रूप से किया। इस अवसर पर रामलीला कमेटी के अध्यक्ष गौरव आर्य, लियाकत, राजू श्रीवास्तव और महेश यादव सहित अन्य लोगों ने अतिथियों का फूल-मालाओं से स्वागत किया।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए डॉ. गणेश उपाध्याय ने कहा कि भगवान श्रीराम का जीवन केवल धार्मिक कथा नहीं, बल्कि मानवता, न्याय, त्याग, मर्यादा और आदर्श शासन की अनुपम सीख है। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीराम का नाम लेने के साथ ही उनके आदर्शों को अपने जीवन, समाज और शासन व्यवस्था में अपनाना भी जरूरी है।
उन्होंने कहा कि रामराज्य की परिकल्पना ऐसे समाज की थी, जहां किसी के साथ अन्याय न हो, गरीब की आवाज सुनी जाए, महिलाओं को सम्मान और सुरक्षा मिले, किसानों को उनकी मेहनत का उचित मूल्य प्राप्त हो तथा युवाओं को रोजगार के लिए भटकना न पड़े। सत्ता अहंकार के बजाय सेवा का माध्यम बने और धर्म का अर्थ नफरत नहीं, बल्कि करुणा हो। राजनीति का उद्देश्य भी केवल सत्ता प्राप्त करना नहीं, बल्कि जनता के जीवन में खुशहाली लाना होना चाहिए।
डॉ. उपाध्याय ने कहा कि भगवान श्रीराम ने कठिन परिस्थितियों में भी सत्य और कर्तव्य के मार्ग पर चलने की प्रेरणा दी। उन्होंने राजसिंहासन से अधिक कर्तव्य और मर्यादा को महत्व दिया। आज देश और उत्तराखंड के विकास की चर्चा करते समय यह विचार करना जरूरी है कि किसान कितने खुशहाल हैं, युवाओं को पर्याप्त रोजगार मिल रहा है या नहीं, गरीबों को समय पर न्याय मिल रहा है और बेटियां स्वयं को कितना सुरक्षित महसूस करती हैं।
उन्होंने कहा कि रामराज्य केवल भाषणों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि इसका प्रभाव आमजन के जीवन में दिखाई देना चाहिए। जब गरीब के घर खुशहाली पहुंचे, जाति और धर्म के आधार पर भेदभाव न हो, ईमानदारी का सम्मान हो और समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति तक न्याय पहुंचे, तभी रामराज्य की परिकल्पना साकार हो सकेगी।
उन्होंने लोगों से भगवान श्रीराम के आदर्शों को मंदिरों और मंचों तक सीमित न रखकर अपने आचरण, सामाजिक व्यवहार और जनसेवा में अपनाने का आह्वान किया। कार्यक्रम में रामलीला कमेटी के पदाधिकारी, जनप्रतिनिधि और क्षेत्र के अनेक लोग मौजूद रहे।


