नई दिल्ली। नीट परीक्षा को लेकर आरक्षण व्यवस्था पर एक अभ्यर्थी के बयान ने नई बहस छेड़ दी है। नीट अभ्यर्थी हर्ष दुबे ने मौजूदा आरक्षण व्यवस्था में बदलाव की मांग करते हुए कहा कि कम अंकों पर मिलने वाली छूट की बजाय सरकार अनुसूचित जाति (एससी) और अनुसूचित जनजाति (एसटी) के विद्यार्थियों को बेहतर एवं निःशुल्क स्कूली शिक्षा उपलब्ध कराए।
हर्ष दुबे ने कहा, “यदि बहुत कम अंक प्राप्त करने वाला छात्र डॉक्टर बनेगा, तो क्या लोग उससे इलाज कराना चाहेंगे?” उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि जनरल और ओबीसी वर्ग के विद्यार्थी भी समान अवसर के हकदार हैं।
हर्ष दुबे के इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर आरक्षण, शिक्षा व्यवस्था और मेडिकल प्रवेश प्रक्रिया को लेकर व्यापक चर्चा शुरू हो गई है। वहीं, इस विषय पर विभिन्न वर्गों की ओर से अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।







