*30 अक्टूबर से सजेगा 17वां जोहार महोत्सव, लोक संस्कृति के रंगों से सराबोर होगा हल्द्वानी*
*तीन दिवसीय आयोजन में ढोल-दमाऊ, झोड़ा-चांचरी और लोकगीतों की रहेगी धूम, फौजी ललित मोहन जोशी समेत कई लोक गायक देंगे प्रस्तुति*
हल्द्वानी। कुमाऊं की समृद्ध लोक संस्कृति, पारंपरिक वेशभूषा और लोक संगीत को बढ़ावा देने के उद्देश्य से हल्द्वानी में 17वें जोहार महोत्सव का आयोजन 30 अक्टूबर से एक नवंबर तक किया जाएगा। जोहार सांस्कृतिक एवं वेलफेयर सोसाइटी की ओर से आयोजित तीन दिवसीय महोत्सव में उत्तराखंड की सांस्कृतिक विरासत के विविध रंग देखने को मिलेंगे। महोत्सव में पारंपरिक झांकी, ढोल-दमाऊ, लोकगीत, लोकनृत्य और विभिन्न प्रतियोगिताओं के जरिए लोक परंपराओं को जीवंत किया जाएगा।
पहले दिन निकलेगी पारंपरिक झांकी
महोत्सव के पहले दिन 30 अक्टूबर को सुबह 11 बजे से दोपहर तीन बजे तक जोहारी शौका समुदाय के लोग पारंपरिक वेशभूषा में ढोल-दमाऊ के साथ झांकी निकालेंगे। इसके बाद मुख्य अतिथि महोत्सव का शुभारंभ करेंगे। कार्यक्रम में सोसाइटी अध्यक्ष का संबोधन, अतिथियों का स्वागत एवं सम्मान, वंदना, स्वागत गीत और विभिन्न सांस्कृतिक दलों की प्रस्तुतियां होंगी।
शाम पांच बजे से रात 10 बजे तक स्थानीय कलाकार सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत करेंगे। इसके अलावा लोक गायक फौजी ललित मोहन जोशी, दक्ष कार्की, कैलाश कुमार और गोविंद दिगारी अपनी गायकी से दर्शकों का मनोरंजन करेंगे।
दूसरे दिन होंगी विभिन्न प्रतियोगिताएं
31 अक्टूबर को महोत्सव के दूसरे दिन सुबह 11 बजे से दोपहर तीन बजे तक महिलाओं और बच्चों के लिए विभिन्न प्रतियोगिताएं आयोजित की जाएंगी। इनमें झोड़ा-चांचरी, स्वेटर बुनाई, ऐपण और पारंपरिक व्यंजन प्रतियोगिताएं प्रमुख रहेंगी। शाम के सत्र में स्थानीय कलाकारों की प्रस्तुतियों के साथ बिंदुखत्ता के जन जागृति सांस्कृतिक कला मंच की ओर से कार्यक्रम प्रस्तुत किया जाएगा। वहीं, नेपाल के प्रसिद्ध गायक सुरेश शाही अपनी प्रस्तुति देंगे।
बच्चों और युवाओं के लिए होंगे विशेष कार्यक्रम
महोत्सव के अंतिम दिन एक नवंबर को भी सुबह 11 बजे से झोड़ा-चांचरी प्रतियोगिता सहित महिलाओं और बच्चों के लिए विभिन्न आयोजन होंगे। नर्सरी से कक्षा 12 तक के विद्यार्थियों के लिए चित्रकला प्रतियोगिता, बच्चों के लिए फैंसी ड्रेस प्रतियोगिता और युवाओं के लिए पारंपरिक परिधान प्रतियोगिता आयोजित की जाएगी।
शाम पांच बजे से रात 10 बजे तक सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन होगा। इस दौरान बबल आर्टिस्ट विक्रम बोरा अपनी कला का प्रदर्शन करेंगे। वहीं, लोक गायक गणेश मर्तोलिया, नीरज चुफाल और रुचि जंगपांगी की प्रस्तुतियां महोत्सव के अंतिम दिन का प्रमुख आकर्षण रहेंगी।
लोक विरासत को नई पीढ़ी से जोड़ने की पहल
तीन दिवसीय जोहार महोत्सव लोक संस्कृति, पारंपरिक रीति-रिवाजों और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण के साथ नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने का मंच बनेगा। विभिन्न प्रतियोगिताओं और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से लोगों को उत्तराखंड की समृद्ध लोक परंपराओं को करीब से जानने और उनसे जुड़ने का अवसर मिलेगा।


