*मानव तस्करी, साइबर अपराध और डिजिटल पुलिसिंग पर मुख्य सचिव सख्त*
*लापता बच्चों की तलाश के लिए डेडिकेटेड टीम बनाने, विभागों के डेटा इंटीग्रेशन और तकनीक आधारित जांच व्यवस्था मजबूत करने के निर्देश*
देहरादून। मुख्य सचिव ने मानव तस्करी के मामलों में मैदानी क्षेत्रों के साथ-साथ पर्वतीय जिलों में भी प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने महिला एवं बाल विकास विभाग तथा पुलिस विभाग के पोर्टल का शीघ्र इंटीग्रेशन करने और एपीआई इंटीग्रेशन के माध्यम से दोनों विभागों के आंकड़ों में किसी भी प्रकार की विसंगति समाप्त करने को कहा। इसके लिए दोनों विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने हेतु नोडल अधिकारियों की तैनाती भी जल्द सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।
मुख्य सचिव ने लापता बालिकाओं और नाबालिग बच्चों को शीघ्र ट्रेस करने के लिए समर्पित टीम और मजबूत तंत्र विकसित करने पर जोर दिया। उन्होंने अनट्रेस्ड बच्चों एवं महिलाओं की तलाश के लिए विशेष अभियान चलाने तथा विभिन्न विभागों के बीच डेटा शेयरिंग और समन्वय को और बेहतर बनाने के निर्देश दिए। ऑपरेशन स्माइल का नवीनतम आंकड़ा उपलब्ध कराने के साथ ही मानव एवं बाल तस्करी के मामलों का केस-वाइज विश्लेषण करने को कहा गया।
उन्होंने तस्करी के नेटवर्क और संगठित मामलों की पहचान कर उनकी रोकथाम के लिए प्रभावी तंत्र विकसित करने के निर्देश दिए। मुख्य सचिव ने कहा कि पीड़ितों के रेस्क्यू के बाद उनके पुनर्वास पर भी विशेष ध्यान दिया जाना जरूरी है। अन्य राज्यों के साथ समन्वय स्थापित कर पीड़ितों को उनके अभिभावकों तक सुरक्षित रूप से पहुंचाने के लिए प्रभावी व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा गया। साथ ही जिला स्तर पर रेस्क्यू के लिए डेडिकेटेड टीम और मजबूत व्यवस्थाएं विकसित करने के निर्देश दिए गए।
साइबर पुलिसिंग में बढ़ेगी विशेषज्ञों की भागीदारी
साइबर अपराधों की बढ़ती चुनौती को देखते हुए मुख्य सचिव ने साइबर पुलिसिंग के लिए मैनपावर मजबूत करने के निर्देश दिए। उन्होंने साइबर विशेषज्ञों के साथ बैंकिंग क्षेत्र के विशेषज्ञों को भी इस व्यवस्था से जोड़ने की आवश्यकता बताई, ताकि साइबर अपराधों के मामलों में त्वरित और प्रभावी कार्रवाई की जा सके।
एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स (एएनटीएफ) के तहत कार्रवाई को प्रभावी बनाने के लिए विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए गए। उन्होंने इस संबंध में एनकॉर्ड की बैठक में विस्तृत प्रस्तुतीकरण देने को कहा।
विवेचना में तकनीक के अधिक उपयोग पर जोर
मुख्य सचिव ने पुलिस विवेचना में आधुनिक तकनीक के अधिकाधिक उपयोग की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने विवेचना अधिकारियों को आवश्यक इन्वेस्टीगेशन किट उपलब्ध कराने के निर्देश दिए, ताकि जांच की गुणवत्ता और प्रभावशीलता में सुधार हो सके। जिन थानों में बड़ी संख्या में एफआईआर दर्ज होती हैं, वहां अलग इन्वेस्टीगेशन विंग स्थापित करने की संभावनाओं पर भी विचार करने को कहा गया।
उन्होंने ई-एफआईआर के रिजेक्शन का विश्लेषण और क्रॉस-वेरिफिकेशन करने के निर्देश दिए। साथ ही न्यायश्रुति, एफएसएल, मालखाना और डायल-112 को शीघ्र लाइव करने तथा ई-समन के अधिकाधिक उपयोग को बढ़ावा देने पर जोर दिया।
आईसीजेएस 2.0 साइटों पर नेटवर्क कनेक्टिविटी की समीक्षा करते हुए मुख्य सचिव ने कमजोर नेटवर्क वाले क्षेत्रों में बैंडविड्थ और कनेक्टिविटी बढ़ाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि पुलिसिंग को अधिक प्रभावी, तकनीक आधारित और जनोन्मुख बनाने के लिए विभागों के बीच बेहतर समन्वय, डेटा शेयरिंग, आधुनिक तकनीक के उपयोग और जिला स्तर पर मजबूत तंत्र विकसित किया जाना आवश्यक है।
थानों से हटेंगी सीज गाड़ियां, डिजिटल स्टोरेज पर जोर
मुख्य सचिव ने कहा कि थानों का काफी स्थान सीज वाहनों से भरा रहता है, जिससे वहां स्पेस की समस्या उत्पन्न हो रही है और पुलिस कार्यप्रणाली प्रभावित होती है। उन्होंने सीज वाहनों के निस्तारण के लिए डिजिटल स्टोरेज व्यवस्था अपनाने के निर्देश दिए, ताकि थानों में जगह की समस्या को दूर किया जा सके।
उन्होंने जनपदों को अभियान मोड में सीज वाहनों का निस्तारण कराने और इसकी मासिक रिपोर्ट उपलब्ध कराने के निर्देश भी दिए।
बैठक में पुलिस महानिदेशक दीपम सेठ, सचिव गृह शैलेश बगौली, एडीजी डॉ. वी. मुरुगेशन, आईजी डॉ. निलेश आनंद भरणे, आईजी सुनील कुमार मीणा, एसएसपी तृप्ति भट्ट एवं अजय सिंह सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।
