*किच्छा-सिरौली कला निकाय चुनाव की मतगणना को तीन सप्ताह और* *हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने डीएम की टाइम एक्सटेंशन अर्जी की मंजूर*

*किच्छा-सिरौली कला निकाय चुनाव की मतगणना को तीन सप्ताह और*

*हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने डीएम की टाइम एक्सटेंशन अर्जी की मंजूर*

नैनीताल। किच्छा और सिरौली कला निकाय चुनाव की मतगणना को लेकर चल रही कानूनी प्रक्रिया के बीच बुधवार को हाईकोर्ट ने प्रशासन को तीन सप्ताह का अतिरिक्त समय दे दिया। मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली डिवीजन बेंच ने जिलाधिकारी ऊधम सिंह नगर नितिन सिंह भदौरिया की ओर से दाखिल टाइम एक्सटेंशन एप्लीकेशन को स्वीकार कर लिया। इसके बाद अब प्रशासन को मतगणना कराने के लिए तीन सप्ताह का अतिरिक्त समय मिल गया है।

जिलाधिकारी की ओर से दाखिल अर्जी में कानून व्यवस्था से जुड़ी परिस्थितियों का हवाला दिया गया था। रिपोर्ट में किच्छा विधायक तिलक राज बेहड़ और पूर्व विधायक राजेश शुक्ला के बीच लंबे समय से चली आ रही राजनीतिक तनातनी के मद्देनजर क्षेत्र की कानून व्यवस्था की स्थिति का उल्लेख किया गया था। इसके अलावा सुरक्षा व्यवस्था के तहत हथियार लाइसेंस धारकों से शस्त्र जमा कराने सहित अन्य कदम उठाए जाने की जानकारी भी अदालत के समक्ष रखी गई थी।

प्रशासन ने इन्हीं परिस्थितियों को आधार बनाते हुए किच्छा-सिरौली कला निकाय चुनाव की मतगणना के लिए अतिरिक्त समय की मांग की थी। बुधवार को हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने अर्जी स्वीकार करते हुए प्रशासन को तीन सप्ताह का और समय दे दिया। इससे मतगणना को लेकर चल रही प्रक्रिया फिलहाल तीन सप्ताह और आगे बढ़ गई है।

मतगणना जल्द कराने के लिए सुप्रीम कोर्ट जाने की तैयारी

हाईकोर्ट से प्रशासन को अतिरिक्त समय मिलने के बाद अब मतगणना जल्द कराने की मांग को लेकर मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचने के आसार हैं। सूत्रों के मुताबिक, मतगणना में हो रही देरी को लेकर संबंधित पक्ष हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ सर्वोच्च न्यायालय का रुख करने की तैयारी में है।

बताया जा रहा है कि सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल करने की तैयारी की जा रही है और आने वाले एक-दो दिनों में इस संबंध में कदम उठाया जा सकता है। मतदान प्रक्रिया पूरी होने के बाद से ही किच्छा-सिरौली कला निकाय चुनाव की मतगणना का मामला न्यायालय में विचाराधीन है।

हाईकोर्ट द्वारा प्रशासन की समय विस्तार संबंधी अर्जी स्वीकार किए जाने के बाद अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि संबंधित पक्ष सुप्रीम कोर्ट में कब याचिका दाखिल करता है और शीर्ष अदालत इस मामले में क्या रुख अपनाती है।

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