*ड्रेनेज परियोजना में नगर निगम की भूमिका रही निर्णायकः विकास शर्मा*

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*ड्रेनेज परियोजना में नगर निगम की भूमिका रही निर्णायकः विकास शर्मा*

– महापौर ने सबूतों के साथ साझा की प्रोजेक्ट की पूरी प्रकिया

– शपथ ग्रहण के महज 15 दिन बाद शुरू की थी कवायद

– वार्ड-वार सर्वे, पार्षदों से सुझाव, लगातार बैठकों और मुख्यमंत्री स्तर तक पैरवी के बाद मिली ऐतिहासिक मंजूरी

 

रूद्रपुर। रूद्रपुर शहर को जलभराव की समस्या से स्थायी राहत दिलाने के लिए स्वीकृत 786.73 करोड़ रुपये की मास्टर ड्रेनेज परियोजना को लेकर फैलाई जा रही भ्रांतियों पर महापौर विकास शर्मा ने बुधवार को बड़ा खुलासा किया। महापौर विस्तार से पूरी प्रक्रिया सार्वजनिक करते हुए कहा कि यह किसी एक व्यक्ति या संस्था के श्रेय का विषय नहीं, बल्कि शहर के लाखों नागरिकों के हित से जुड़ा ऐतिहासिक प्रोजेक्ट है। उन्होंने कहा कि नगर निगम ने इस परियोजना को धरातल पर उतारने के लिए हर स्तर पर सक्रिय भूमिका निभाई और जो भी कार्य किए गए, वे सभी सरकारी अभिलेखों में दर्ज हैं।

 

महापौर ने मीडिया को बताया कि उन्होंने 7 फरवरी 2025 को महापौर पद की शपथ लेने के तुरंत बाद ही शहर की सबसे बड़ी समस्या जलभराव के स्थायी समाधान को प्राथमिकता दी। उन्हें पहले से ही मास्टर ड्रेनेज प्लान की जानकारी थी, इसलिए शपथ ग्रहण के बाद उन्होंने सिंचाई विभाग के अधिकारियों से संपर्क कर परियोजना की प्रगति की जानकारी ली और इसे शीघ्र आगे बढ़ाने के निर्देश दिए।

 

उन्होंने बताया कि इसके बाद 22 फरवरी 2025 को नगर निगम सभागार में मास्टर ड्रेनेज प्लान को लेकर पहली विस्तृत बैठक आयोजित की गई। बैठक में तत्कालीन नगर आयुक्त नरेश दुर्गापाल, सहायक नगर आयुक्त शिप्रा जोशी पाण्डेय, नगर निगम एवं सिंचाई विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। इस बैठक में अधिकारियों ने पूरे ड्रेनेज प्रोजेक्ट का विस्तृत प्रेजेंटेशन दिया। प्रस्तुतीकरण के दौरान योजना में मौजूद कई कमियों की ओर अधिकारियों का ध्यान आकर्षित किया गया तथा आवश्यक सुधार संबंधी सुझाव दिए।

 

महापौर ने बताया कि केवल बैठकों तक सीमित रहने के बजाय उन्होंने स्वयं परियोजना की वास्तविक स्थिति समझने का निर्णय लिया। इसी क्रम में 3 एवं 4 मार्च 2025 को अधिकारियों की टीम के साथ विभिन्न वार्डों का भ्रमण किया, स्थलीय निरीक्षण किया तथा जलभराव वाले क्षेत्रों का विस्तृत सर्वे कराया ताकि परियोजना को वास्तविक जरूरतों के अनुरूप बनाया जा सके।

 

उन्होंने कहा कि 19 मार्च 2025 को नगर निगम में पुनः एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई, जिसमें सभी पार्षदों तथा संबंधित विभागीय अधिकारियों को आमंत्रित किया गया। बैठक में प्रत्येक पार्षद से उनके वार्ड की आवश्यकता एवं जलनिकासी संबंधी समस्याओं पर विस्तार से सुझाव लिए गए, ताकि किसी भी क्षेत्र की समस्या योजना से बाहर न रह जाए।

 

इसके बाद 21 एवं 22 मार्च 2025 को लगातार दो दिनों तक नगर निगम की टीम ने पार्षदों के साथ मौके पर जाकर व्यापक सर्वे किया। इस दौरान वार्डवार जलभराव, प्राकृतिक ढाल, पुराने नालों की स्थिति तथा नए ड्रेनेज नेटवर्क की आवश्यकता का बारीकी से अध्ययन किया गया।

 

महापौर ने बताया कि प्रारंभिक परियोजना में केवल 30 प्राथमिक नालों को शामिल किया गया था, जिनमें 23 नाले लगभग 21 किलोमीटर लंबाई के थे, जबकि केवल 20 नए नालों के निर्माण का प्रस्ताव था। लेकिन नगर निगम एवं सिंचाई विभाग द्वारा किए गए विस्तृत सर्वे और व्यापक विचार-विमर्श के दौरान यह स्पष्ट हुआ कि शहर की वास्तविक आवश्यकताएं इससे कहीं अधिक हैं। धरातल पर सामने आई समस्याओं के आधार पर 41 अन्य महत्वपूर्ण नालों, जिनकी कुल लंबाई 33.70 किलोमीटर थी, उन्हें भी परियोजना में शामिल कराया गया। इसके अतिरिक्त विभिन्न वार्डों की आवश्यकताओं के अनुरूप अन्य नालों को जोड़ते हुए कुल मिलाकर लगभग 67 किलोमीटर लंबा ड्रेनेज नेटवर्क प्रस्तावित किया गया, जिससे परियोजना कहीं अधिक व्यापक और प्रभावी बन सकी।

 

महापौर ने कहा कि प्रारंभिक परियोजना का बजट अपेक्षाकृत कम था, लेकिन नगर निगम और सिंचाई विभाग द्वारा किए गए विस्तृत सर्वे के बाद परियोजना का दायरा बढ़ाया गया और संशोधित प्रस्ताव शासन को भेजा गया। सर्वे पूरा होने के बाद जब सिंचाई विभाग ने अंतिम अनापत्ति (एनओसी) के लिए नगर निगम को पत्र भेजा, तब नगर निगम ने स्पष्ट रूप से अपनी सहमति इस शर्त के साथ दी कि परियोजना का कार्य वार्ड संख्या-1 फुलसुंगी से प्रारंभ किया जाए।

 

महापौर ने बताया कि नगर निगम की इस शर्त को स्वीकार करते हुए सिंचाई विभाग ने पूरे शहर को चार जोन में विभाजित किया। जोन-1 में वार्ड संख्या-1 से लेकर वार्ड संख्या-16 तक के क्षेत्र को शामिल किया गया। महापौर ने कहा कि वार्ड संख्या-1 को प्राथमिकता इसलिए दी गई क्योंकि जलभराव की सबसे गंभीर स्थिति इसी क्षेत्र में रहती है और यहां के लोगों को वर्षों से भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता रहा है। उन्होंने बताया कि प्रथम जोन के लिए 184 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी गई यह क्षेत्र प्रशासनिक रूप से रूद्रपुर विधानसभा नहीं बल्कि किच्छा विधानसभा के अंतर्गत आता है, इसके बावजूद नगर निगम ने शहरहित को सर्वाेपरि रखते हुए इस क्षेत्र को प्राथमिकता दिलाई।

 

महापौर ने कहा कि कुछ लोग यह भ्रम फैलाने का प्रयास कर रहे हैं कि इस परियोजना में नगर निगम की कोई भूमिका नहीं रही, जबकि वास्तविकता इससे बिल्कुल अलग है। उन्होंने बताया कि 16 अप्रैल 2026 को कुमाऊँ आयुक्त दीपक रावत की अध्यक्षता में इस परियोजना को लेकर विस्तृत समीक्षा बैठक आयोजित की गई थी। मंडलायुक्त द्वारा गठित परियोजना समिति में नगर आयुक्त शिप्रा जोशी पाण्डेय को सदस्य नामित किया गया, क्योंकि शहरी क्षेत्र से संबंधित इतनी बड़ी परियोजना नगर निगम की भागीदारी के बिना पूरी नहीं हो सकती। उन्होंने बताया कि इसी प्रकार जिलाधिकारी द्वारा गठित समिति में भी नगर आयुक्त को सदस्य बनाया गया था, जिससे स्पष्ट है कि शासन और प्रशासन दोनों स्तरों पर नगर निगम की भूमिका को महत्वपूर्ण माना गया।

 

महापौर ने कहा कि परियोजना को गति देने के लिए उन्होंने कई बार मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से व्यक्तिगत रूप से मुलाकात कर शहर की समस्या से अवगत कराया। लगातार प्रयासों और विभागीय समन्वय का ही परिणाम रहा कि मुख्य सचिव की अध्यक्षता वाली व्यय वित्त समिति ने 786.73 करोड़ रुपये की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) को मंजूरी प्रदान की। इसके तहत प्रथम चरण में 441.79 करोड़ रुपये की लागत से कार्य प्रारंभ किया जाएगा।

 

महापौर ने कहा कि वर्षा और बाढ़ के दौरान स्वयं मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी रूद्रपुर पहुंचे थे और उन्होंने जलभराव की भयावह स्थिति को प्रत्यक्ष रूप से देखा था। इसके बाद ही इस परियोजना को तेजी से आगे बढ़ाया गया। उन्होंने कहा कि इस पूरी प्रक्रिया में सिंचाई विभाग की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण रही, जिसने नगर निगम के साथ समन्वय स्थापित करते हुए शहर और जनहित से जुड़े सभी आवश्यक सुझावों को परियोजना में शामिल किया। उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड में शहरी क्षेत्र के लिए स्वीकृत होने वाली 786.73 करोड़ रुपये की यह मास्टर ड्रेनेज परियोजना संभवतः अब तक की सबसे बड़ी परियोजनाओं में से एक है, जो आने वाले वर्षों में रूद्रपुर के जलभराव की समस्या के स्थायी समाधान की दिशा में मील का पत्थर साबित होगी।

 

महापौर ने इस ऐतिहासिक स्वीकृति के लिए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के साथ ही सांसद अजय भट्ट, विधायक शिव अरोरा, सिंचाई विभाग, नगर निगम के अधिकारियों तथा सभी जनप्रतिनिधियों का भी आभार व्यक्त किया। अंत में महापौर ने कहा मैं श्रेय लेने के लिए काम नहीं करता, बल्कि जनता के हितों के लिए कार्य करता हूं। जनता ने हमें सेवा का अवसर दिया है और आगे भी पूरी निष्ठा, पारदर्शिता और प्रतिबद्धता के साथ शहर के विकास एवं जनहित के कार्य करता रहूंगा।


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