*_दुलहस्ती जलविद्युत परियोजना के विस्तार को मंजूरी, पाकिस्तान से तनाव के बीच मोदी सरकार का बड़ा कदम_*

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*_दुलहस्ती जलविद्युत परियोजना के विस्तार को मंजूरी, पाकिस्तान से तनाव के बीच मोदी सरकार का बड़ा कदम_*

श्रीनगर: जम्मू-कश्मीर में दुलहस्ती जलविद्युत परियोजना के दूसरे चरण को पर्यावरणीय मंजूरी मिल गई है. केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC) की 45वीं विशेषज्ञ मूल्यांकन समिति (EAC) ने 19 दिसंबर को इसे मंजूरी दी. चिनाब नदी के पानी से चलने वाली यह 260 मेगावाट की परियोजना किश्तवाड़ जिले में 3200 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से बनाई जाएगी.

इस मंजूरी के बाद अब परियोजना के निर्माण के लिए निविदाएं जारी करने का मार्ग प्रशस्त होगा. यह मंजूरी तब आई है जब भारत ने 22 अप्रैल के पहलगाम आतंकी हमले के बाद सिंधु जल संधि (IWT) को निलंबित कर दिया है. चिनाब नदी की जलविद्युत क्षमता का लाभ उठाने पर नया ध्यान केंद्रित किया गया है. हालांकि, एक आधिकारिक दस्तावेज में कहा गया है कि यह परियोजना संधि के प्रावधानों के मापदंडों का पालन कर रही है.

पहलगाम आतंकी हमले में 25 नागरिकों की मौत के बाद भारत के ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के तहत जलविद्युत परियोजनाओं की मंजूरी में तेजी लाई गई है. इससे पहले, चिनाब नदी पर ही 1,856 मेगावाट की सावलकोट जलविद्युत परियोजना को मंजूरी दी गई थी, जो राष्ट्रीय महत्व की और जम्मू-कश्मीर की सबसे बड़ी जलविद्युत परियोजना है. इसकी परिकल्पना 1960 के दशक में की गई थी, लेकिन पाकिस्तान की आपत्तियों के कारण यह चार दशकों से अधिक समय तक अटकी रही थी.

1960 की सिंधु जल संधि ने भारत को रावी, ब्यास और सतलुज नदियों का नियंत्रण दिया था और पाकिस्तान को सिंधु, चिनाब और झेलम (पश्चिमी नदियां) का नियंत्रण दिया था. भारत को पश्चिमी नदियों के पानी का सीमित उपयोग करने की अनुमति थी.

 

दुलहस्ती जलविद्युत परियोजना का दूसरा चरण, दुलहस्ती जलविद्युत परियोजना (चरण I – 390 मेगावाट) का विस्तार है. जिसे राष्ट्रीय जलविद्युत कंपनी लिमिटेड (NHPC) द्वारा 2007 में चालू किया गया था. जनवरी 2021 में, NHPC लिमिटेड ने जम्मू-कश्मीर सरकार के साथ 40 वर्षों की अवधि के लिए बिल्ड, ओन, ऑपरेट और ट्रांसफर (BOOT) आधार पर दुलहस्ती चरण-II के निष्पादन के लिए एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए थे.

परियोजना के पर्यावरणीय प्रभाव मूल्यांकन (EIA) अध्ययन के अनुसार, यह प्रोजेक्ट मौजूदा ‘चरण-I’ के बांध और जलाशय का उपयोग करेगा. इसके साथ ही नए बुनियादी ढांचे का निर्माण किया जाएगा, जिसमें 3.6 किलोमीटर लंबी हेडरेस सुरंग और दो 130 मेगावाट की इकाइयों से लैस एक भूमिगत पावरहाउस शामिल होगा. विस्तार कार्य में अतिरिक्त बिजली उत्पादन की सुविधा के लिए 215 मीटर लंबी टेलरेस सुरंग भी बनाई जाएगी.

एक बार पूरा होने के बाद, यह जम्मू और कश्मीर की बिजली उत्पादन क्षमता को और बढ़ाएगा और इससे 1093.11 मिलियन यूनिट बिजली पैदा होने की उम्मीद है. केंद्रीय बिजली मंत्रालय के आंकड़ों से पता चलता है कि जम्मू-कश्मीर में 3,360 मेगावाट की जलविद्युत परियोजनाएं चालू हो चुकी हैं, जबकि 3,052 मेगावाट निर्माणाधीन हैं और 2,449 मेगावाट अभी योजना के स्तर पर हैं.


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