*कहानी वाचन से रोचक और प्रभावी बनेगी शिक्षण प्रक्रिया*
*जेसीज और डीपीएस के शिक्षकों ने कार्यशाला में सीखी नई शिक्षण तकनीकें*
रुद्रपुर। दिल्ली पब्लिक स्कूल (डीपीएस), रुद्रपुर में जेसीज पब्लिक स्कूल और दिल्ली पब्लिक स्कूल के शिक्षकों के लिए ‘एकीकृत कहानी वाचन’ विषय पर संयुक्त कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला में शिक्षकों को कहानी वाचन के माध्यम से शिक्षण प्रक्रिया को अधिक रोचक, संवादात्मक और प्रभावी बनाने की तकनीकों से अवगत कराया गया।
कार्यशाला का संचालन प्रसिद्ध परामर्शदाता, प्रशिक्षिका एवं टेडएक्स वक्ता सुश्री इंदु पुंज ने किया। कार्यक्रम के शुभारंभ पर विद्यालय के प्रधानाचार्य एवं सेक्शन हेड्स ने उनका स्वागत किया। कार्यशाला में नवीन शिक्षण पद्धतियों, भावनात्मक बुद्धिमत्ता, समावेशी कक्षा-कक्ष, विद्यार्थी कल्याण और कक्षा प्रबंधन जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा की गई।
इस दौरान शिक्षकों को कहानी वाचन को विभिन्न विषयों के पाठ्यक्रम से जोड़ने के तरीके बताए गए। साथ ही, विभिन्न रचनात्मक गतिविधियों के माध्यम से यह समझाया गया कि कहानियों के जरिए विद्यार्थियों की कल्पनाशीलता, रचनात्मकता और सीखने के प्रति रुचि को किस प्रकार बढ़ाया जा सकता है। शिक्षकों ने गतिविधियों में उत्साहपूर्वक प्रतिभाग किया और कहानी वाचन की विभिन्न तकनीकों का व्यावहारिक अनुभव प्राप्त किया।
अपने संबोधन में सुश्री इंदु पुंज ने कहा कि कहानियां ज्ञान और मानवीय संवेदनाओं के बीच सेतु का कार्य करती हैं। शिक्षक यदि कहानी वाचन की कला में दक्ष हों, तो कक्षा में सीखने की प्रक्रिया को अधिक रोचक और ज्ञानवर्धक बनाया जा सकता है। उन्होंने शिक्षकों को इन तकनीकों को दैनिक शिक्षण कार्य में शामिल करने के लिए प्रेरित किया।
विद्यालय के महासचिव सुरजीत सिंह ग्रोवर ने कहा कि शिक्षा के क्षेत्र में हो रहे निरंतर बदलावों के अनुरूप शिक्षकों के लिए अपने ज्ञान और कौशल को अद्यतन रखना आवश्यक है। ऐसी कार्यशालाएं शिक्षकों को नई शिक्षण विधियों से परिचित कराने के साथ ही उन्हें कक्षा में प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए प्रेरित करती हैं। उन्होंने शिक्षण में नवाचार और निरंतर सीखने को महत्वपूर्ण बताया।
कार्यशाला के समापन पर विद्यालय के प्रधानाचार्य ने सुश्री इंदु पुंज का आभार व्यक्त करते हुए उनके मार्गदर्शन को शिक्षकों के लिए उपयोगी और प्रेरणादायी बताया। कार्यशाला में जेसीज पब्लिक स्कूल और दिल्ली पब्लिक स्कूल, रुद्रपुर के शिक्षकों ने प्रतिभाग किया। इसका उद्देश्य शिक्षण प्रक्रिया को आनंददायक, सहभागितापूर्ण और विद्यार्थी-केंद्रित बनाना रहा।


