*किच्छा पालिकाध्यक्ष पद पर चार प्रत्याशियों के बीच मुकाबला*
*किच्छा पालिकाध्यक्ष पद पर चार प्रत्याशियों के बीच मुकाबला* *नाम वापसी के बाद चुनावी तस्वीर साफ, भाजपा-कांग्रेस के बागी प्रत्याशी मैदान में डटे*
*नाम वापसी के बाद चुनावी तस्वीर साफ, भाजपा-कांग्रेस के बागी प्रत्याशी मैदान में डटे*
किच्छा। नगर पालिका परिषद किच्छा के अध्यक्ष पद के चुनाव में नाम वापसी की प्रक्रिया पूरी होने के साथ ही चुनावी तस्वीर साफ हो गई है। रविवार को नाम वापसी की अंतिम तिथि पर दोपहर तीन बजे तक सात प्रत्याशियों ने अपने नामांकन पत्र वापस ले लिए। वहीं भाजपा और कांग्रेस से जुड़े एक-एक बागी प्रत्याशी ने नामांकन वापस नहीं लिया। दोनों अब निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव मैदान में डटे हैं।
निर्धारित समय तक यूकेडी प्रत्याशी अनिल पांडे, कांग्रेस प्रत्याशी राजेश प्रताप सिंह के डमी उम्मीदवार के रूप में नामांकन करने वाली वंदना सिंह, कांग्रेस के बागी जीवन जोशी, आयशा बी, भाजपा की बागी शैली फुटेला, लवी सहगल और निर्दलीय प्रत्याशी विशाल मदान ने अपने नामांकन वापस ले लिए। इससे पहले व्यापार मंडल अध्यक्ष विजय अरोड़ा का नामांकन निरस्त हो चुका था।
नाम वापसी की प्रक्रिया पूरी होने के बाद कांग्रेस के बागी अब्दुल रशीद जक्कू और भाजपा के बागी नरेंद्र सिंह टाकुली मैदान में बने रहे। दोनों के चुनाव मैदान में रहने से भाजपा और कांग्रेस के अधिकृत प्रत्याशियों के सामने बागियों की चुनौती बरकरार है।
चार प्रत्याशियों के बीच होगा मुकाबला
अब नगर पालिका अध्यक्ष पद के लिए भाजपा के अधिकृत प्रत्याशी संदीप अरोड़ा, कांग्रेस के अधिकृत प्रत्याशी राजेश प्रताप सिंह तथा निर्दलीय प्रत्याशी नरेंद्र सिंह टाकुली और अब्दुल रशीद जक्कू के बीच मुकाबला होगा। दोनों प्रमुख दलों के बागियों के मैदान में डटे रहने से चुनावी मुकाबला रोचक हो गया है।
बागी प्रत्याशियों के मैदान में रहने से भाजपा और कांग्रेस के सामने अपने-अपने वोट बैंक को साधने की चुनौती बढ़ गई है। नाम वापसी के बाद प्रत्याशियों और समर्थकों ने प्रचार अभियान तेज करने की तैयारी शुरू कर दी है। आने वाले दिनों में चारों प्रत्याशी मतदाताओं के बीच जनसंपर्क कर अपने पक्ष में माहौल बनाने का प्रयास करेंगे।
पालिकाध्यक्ष पद के इस चुनाव में खास बात यह है कि दोनों प्रमुख दलों के अधिकृत प्रत्याशियों के सामने उन्हीं दलों से जुड़े बागी प्रत्याशी भी मैदान में हैं। ऐसे में बागियों को मिलने वाला समर्थन चुनावी नतीजों को कितना प्रभावित करेगा, इस पर सभी की नजरें रहेंगी।


