कथा श्रवण से जीवन में आता है सदमार्ग: आचार्य ब्रजरज अभिषेक वशिष्ठ
आस्था चैनल पर हनुमंत कथा का प्रसारण, उत्तराखंड के लिए गौरव का विषय
युवाओं को धर्म से जोड़ना ही उद्देश्य: आचार्य ब्रजरज अभिषेक वशिष्ठ
दतिया में आयोजित हनुमंत कथा बनी राष्ट्रीय आकर्षण, हजारों श्रद्धालु हुए शामिल
हनुमान जन्मोत्सव की तर्ज पर हुआ आयोजन, भक्ति में डूबे श्रद्धालु
देशभर के संत-महापुरुषों ने दिया आशीर्वाद, कथा में दिखी आध्यात्मिक एकता
भक्ति संस्कारों से ही हुआ सिद्धेश्वर धाम का निर्माण: महंत रमेश वशिष्ठ
रुद्रपुर। श्री सिद्धेश्वर बालाजी मंदिर धाम के आचार्य ब्रजरज अभिषेक वशिष्ठ ने कहा कि कथा के श्रवण मात्र से ही व्यक्ति के जीवन में सदमार्ग का प्रवेश होता है और उसे आध्यात्मिक दिशा मिलती है। उन्होंने बताया कि मध्य प्रदेश के दतिया जनपद में आयोजित पांच दिवसीय हनुमंत कथा का राष्ट्रीय स्तर पर आस्था चैनल पर प्रसारण होना उत्तराखंड के लिए गौरव की बात है।
मंदिर धाम में आयोजित पत्रकार वार्ता में आचार्य वशिष्ठ ने बताया कि यह पांच दिवसीय हनुमंत कथा पूर्णतः आध्यात्मिक विषयों पर आधारित रही, जिसमें पीठाधीश्वर श्री गुरु शरण जी महाराज का सानिध्य प्राप्त हुआ। कथा के दौरान देशभर से संत-महापुरुषों ने सहभागिता कर श्रद्धालुओं को आशीर्वाद प्रदान किया। कार्यक्रम में देवकीनंदन ठाकुर जी, करौली सरकार, जगतगुरु चक्रपाणि, नारायण शास्त्री सहित विभिन्न क्षेत्रों के पीठाधीश्वर एवं संत उपस्थित रहे।
उन्होंने बताया कि कथा के दौरान प्रतिदिन हजारों श्रद्धालुओं की उपस्थिति रही तथा विशाल भंडारे का आयोजन भी किया गया। इस आयोजन को श्री हनुमान जन्मोत्सव की तर्ज पर मनाया गया, जिससे भक्तिमय वातावरण बना रहा।
आचार्य वशिष्ठ ने कहा कि उनका उद्देश्य युवाओं को धर्म और आध्यात्मिकता की ओर प्रेरित करना है, क्योंकि युवा ही देश का भविष्य हैं। उन्होंने कहा कि श्री बालाजी महाराज के आशीर्वाद से कथा श्रवण करने वाले श्रद्धालु जीवन में सफलता और सकारात्मक दिशा प्राप्त करते हैं।
वहीं, श्री सिद्धेश्वर बालाजी धाम के महंत रमेश वशिष्ठ ने बताया कि उन्हें बाल्यकाल से ही भक्ति का संस्कार मिला। वह अपनी दादी के साथ प्रत्येक एकादशी को गुरु धाम जाकर संतों के सानिध्य में कीर्तन श्रवण करते थे, जिससे उनके जीवन में भक्ति की अलख जगी। उन्होंने बताया कि रुद्रपुर में उनका बचपन बीता और श्रद्धालुओं के सहयोग तथा बालाजी महाराज की कृपा से श्री सिद्धेश्वर धाम की स्थापना संभव हो सकी। धाम की स्थापना मेहंदीपुर बालाजी महाराज के महंत के सानिध्य में हुई तथा प्रथम आरती भी उन्हीं के निर्देशन में संपन्न हुई।
आचार्य वशिष्ठ ने भविष्य में भी इस प्रकार की धार्मिक कथाओं के आयोजन की प्रतिबद्धता जताते हुए अधिक से अधिक श्रद्धालुओं को इससे जोड़ने का आह्वान किया।







