*_जंग की आग में झुलस रहे ईरान को भारत ने भेजी चिकित्सा सहायता, तेहरान ने शुक्रिया अदा किया_*
नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में बढ़ते संघर्ष के बीच भारत ने ईरान को मदद भेजी है समाचार एजेंसी एएनआई के मुताबिक, भारत की तरफ से ईरान को चिकित्सा सहायता की पहली खेप ईरानी रेड क्रिसेंट सोसाइटी को सौंप दी गई है. तेहरान ने भारत को तहे दिल से शुक्रिया अदा किया है.
भारत में इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरानी दूतावास ने कहा, “भारत के सम्मानित लोगों की तरफ से मेडिकल मदद की पहली खेप ईरानी रेड क्रिसेंट सोसाइटी को पहुंचा दी गई है. हम भारत के दयालु लोगों का दिल से शुक्रिया अदा करते हैं.”
हाल के सालों में भारत दूसरे देशों को मदद देने वाला एक जाना-माना नाम बन गया है. यह मदद ऐसे समय में मिली है जब ईरान 28 फरवरी से शुरू हुए अमेरिका-इजराइल सैन्य अभियान के असर से जूझ रहा है.
ईरान, लेबनान और अन्य पश्चिम एशियाई देशों को मानवीय सहायता प्रदान करेगा चीन
वहीं, दूसरी तरफ चीन ने भी ईरान, लेबनान और क्षेत्र में जारी संघर्ष से बुरी तरह प्रभावित दो अन्य पश्चिम एशियाई देशों को आपातकालीन मानवीय सहायता प्रदान करने की बात कही है.
चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लिन जियान ने प्रेसवार्ता में बताया कि बीजिंग ने स्थानीय लोगों द्वारा सामना की जा रही दिक्कतों को कम करने की उम्मीद में ईरान, जॉर्डन, लेबनान और इराक को आपातकालीन मानवीय सहायता प्रदान करने का निर्णय लिया है. लिन ने कहा कि, मौजूदा समय में जारी पश्चिम एशिया संघर्ष के कारण ईरान और अन्य क्षेत्रीय देशों के लोगों को संकट का सामना करना पड़ा है. चीन संबंधित देशों के लोगों के प्रति गहरी सहानुभूति व्यक्त करता है.
व्हाइट हाउस अब भारत समेत पूरी दुनिया से रूसी तेल खरीदने की गुहार लगा रहा है: ईरान के मंत्री
जंग के बीच ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा है कि रूस से तेल आयात बंद करने के लिए भारत पर दबाव डालने के बावजूद, अमेरिका अब नयी दिल्ली से मॉस्को से कच्चा तेल खरीदने की गुहार लगा रहा है.
अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच युद्ध के दो सप्ताह बाद अराघची का यह बयान आया है. अराघची ने शुक्रवार को ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, “अमेरिका ने रूस से तेल आयात बंद करने के लिए भारत पर दबाव बनाने में कई महीने लगाए. ईरान के साथ दो सप्ताह के युद्ध के बाद, व्हाइट हाउस अब भारत सहित पूरी दुनिया से रूसी कच्चा तेल खरीदने की गुहार लगा रहा है.”
ईरान से संघर्ष के बीच अमेरिका ने पांच मार्च को भारत को 30 दिन के लिए रूसी तेल खरीदने की अनुमति देने की घोषणा की थी, जबकि इससे पहले अमेरिका ने यूक्रेन युद्ध के चलते रूसी तेल खरीद पर प्रतिबंध लगाए थे.
पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष पर यूरोप के रुख की आलोचना करते हुए मंत्री ने ईरान के खिलाफ युद्ध को अवैध करार दिया और कहा कि यूरोप को लगता है कि ईरान पर अवैध युद्ध का समर्थन करने से उसे रूस के खिलाफ अमेरिका का समर्थन मिल जाएगा. अराघची ने रूसी कच्चे तेल की खरीद के प्रति ट्रंप प्रशासन के मौजूदा रुख को दयनीय तक करार दिया.







