*_अमरनाथ यात्रा पर बड़े हमले की बड़ी साजिश नाकाम, लश्कर का टॉप कमांडर ढेर_*
नई दिल्ली: सुरक्षा बलों ने जम्मू-कश्मीर के शोपियां जिले में एक जॉइंट ऑपरेशन के दौरान लश्कर-ए-तैयबा (LeT) के एक टॉप कमांडर को मारकर गिराया है. इसके साथ ही चल रही अमरनाथ यात्रा में कथित तौर पर रुकावट डालने की एक बड़ी आतंकी साजिश को नाकाम कर दिया है. अधिकारियों ने गुरुवार को यह जानकारी दी.
सीआरपीएफ और दूसरी सुरक्षा एजेंसियों ने पिछले हफ़्ते यह ऑपरेशन किया था, जिसमें जाकिर अहमद गनी मारा गया, जिसे लश्कर-ए-तैयबा का सीनियर कमांडर बताया गया था.
सुरक्षा अधिकारियों ने कहा कि गनी पर पहलगाम आतंकी हमले से भी संबंध होने का शक है. सुरक्षा से जुड़े के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, “एक खास खुफिया जानकारी मिलने के बाद एक ऑपरेशन शुरू किया गया, जिसके दौरान गनी को मार गिराया गया. उसका साथी लतीफ भट्ट, जो लश्कर का एक और कैडर था, भागने में कामयाब रहा.”
ऑपरेशन के बाद, सुरक्षा बलों ने सालाना तीर्थयात्रा को आसानी से चलाने के लिए पूरे केंद्र शासित प्रदेश में आतंकवाद विरोधी और कॉम्बिंग ऑपरेशन तेज़ कर दिए हैं. तीर्थयात्रा 3 जुलाई से शुरू हुई थी और 28 अगस्त तक चलेगी.
अधिकारियों ने कहा कि सुरक्षा एजेंसियों के लिए एक बड़ी चिंता जम्मू-कश्मीर में करीब 50 विदेशी आतंकवादियों की मौजूदगी की खबर है. खास बात यह है कि घुसपैठ और आतंकी खतरों से निपटने के लिए, सुरक्षा बलों ने जम्मू और कश्मीर के 10,000 फीट से ज़्यादा ऊंचाई वाले इलाकों में 55 अस्थायी ऑपरेटिंग बेस (TOB) सक्रिय किए हैं.
इन बेस का मकसद बॉर्डर पार से घुसने की कोशिश करने वाले आतंकवादियों को ट्रैक करने और खत्म करने में मदद करना है. अस्थायी ऑपरेटिंग बेस (TOB) की रणनीति पहलगाम आतंकी हमले के बाद बनाई गई थी, और ऐसा पहला बेस जुलाई 2025 में श्रीनगर जिले के फकीर गुजरी में बनाया गया था.
इन बेस पर केंद्रीय अर्धसैनिक बल और जम्मू-कश्मीर पुलिस के जवान रहते हैं और इनका इस्तेमाल दूर-दराज के पहाड़ी इलाकों में सर्च और असॉल्ट ऑपरेशन शुरू करने के लिए किया जाता है, जहां आतंकवादी अक्सर पारंपरिक मिट्टी और पत्थर के ठिकानों में छिपते हैं, जिन्हें “धोक” कहा जाता है.
मिले आधिकारिक डेटा के मुताबिक, इस साल 1 जनवरी से 13 जुलाई के बीच जम्मू-कश्मीर में कई टॉप कैटेगरी के विदेशी आतंकवादियों समेत आठ आतंकवादियों को मार गिराया गया है. इसी दौरान, कम से कम 24 ओवरग्राउंड वर्कर (OGW) गिरफ्तार किए गए.
सुरक्षा बलों ने हथियारों और विस्फोटकों का एक बड़ा जखीरा भी बरामद किया, जिसमें 16 हथियार, 492 राउंड गोला-बारूद, 34 ग्रेनेड, एक रॉकेट, दो आईईडी (IED), और तीन राउंड के साथ एक अंडर-बैरल ग्रेनेड लॉन्चर (UBGL) शामिल हैं.
अधिकारियों ने बताया कि अमरनाथ यात्रा को ध्यान में रखते हुए बड़े पैमाने पर एंटी-टेरर कैंपेन शुरू किया गया है, जिसका कोडनेम ऑपरेशन शेरूवाली है.
एक और अधिकारी ने कहा, “हमें राजौरी के गंभीर मुगलिया इलाके में आतंकवादियों की संदिग्ध गतिविधि के बारे में खुफिया जानकारी मिली है. इलाके में सेना और अर्धसैनिक बल के जॉइंट ऑपरेशन चल रहे हैं.”
सुरक्षा एजेंसियों ने किश्तवाड़ और रामनगर (उधमपुर) में त्राशी-1 के तहत हाल के ऑपरेशन की सफलता पर भी ज़ोर दिया है, जहां जैश-ए-मोहम्मद (JeM) से जुड़े चार विदेशी आतंकवादियों को मार गिराया गया, जिनमें शीर्ष-स्तरीय श्रेणी A++ कमांडर भी शामिल थे.
अधिकारियों ने कहा कि तेज ऑपरेशन का मकसद यह पक्का करना है कि कोई भी आतंकी संगठन चल रही यात्रा के दौरान तीर्थयात्रियों या सुरक्षा बलों को निशाना न बना पाए.







