राम-भरत मिलाप के भावपूर्ण मंचन ने दर्शकों को किया भावविभोर भरत ने ठुकराया राजपाट, श्रीराम की चरणपादुकाएं लेकर अयोध्या लौटे; दिवंगत कलाकार कुक्कू शर्मा को दी भावभीनी श्रद्धांजलि

राम-भरत मिलाप के भावपूर्ण मंचन ने दर्शकों को किया भावविभोर

 

भरत ने ठुकराया राजपाट, श्रीराम की चरणपादुकाएं लेकर अयोध्या लौटे; दिवंगत कलाकार कुक्कू शर्मा को दी भावभीनी श्रद्धांजलि

 

रुद्रपुर। नगर की प्राचीन बस अड्डे वाली रामलीला में भरत के अयोध्या आगमन, माता कैकयी से संवाद, श्रीराम को वापस लाने के लिए वन प्रस्थान और राम-भरत मिलाप की लीला का भावपूर्ण मंचन किया गया। कलाकारों ने सशक्त अभिनय और मार्मिक संवादों के माध्यम से भ्रातृप्रेम, त्याग, समर्पण और मर्यादा का संदेश दिया। राम-भरत मिलाप के दृश्य ने दर्शकों को भावविभोर कर दिया।

 

कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि मां वैष्णो इंटरप्राइजेज एवं सतगुरु इंटरप्राइजेज के स्वामी सूरज कालड़ा, उनकी धर्मपत्नी रेनू कालड़ा, रिद्विमा कालड़ा, लक्ष्य कालड़ा, राजकुमार नारंग, लविश नारंग, चिराग आहूजा और साहिल अरोरा ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। इस अवसर पर श्रीरामलीला कमेटी ने कालड़ा परिवार द्वारा सामाजिक एवं धार्मिक संस्थाओं को निरंतर दिए जा रहे सहयोग के लिए आभार जताया। कमेटी पदाधिकारियों ने अतिथियों का माल्यार्पण कर, शॉल ओढ़ाकर और स्मृति चिह्न भेंट कर सम्मानित किया।

 

लीला का आरंभ अयोध्या के दूत द्वारा भरत और शत्रुघ्न को उनकी ननिहाल से वापस बुलाने के दृश्य से हुआ। अयोध्या पहुंचने पर नगर में पसरे शोक को देखकर भरत व्याकुल हो उठे। माता कैकयी से पिता महाराज दशरथ के निधन, श्रीराम के वनवास और स्वयं को राजगद्दी मिलने का समाचार सुनकर वह गहरे दुख में डूब गए। उन्होंने माता के निर्णय पर रोष जताते हुए स्पष्ट किया कि बड़े भाई श्रीराम के बिना राजसिंहासन उनके लिए कोई महत्व नहीं रखता।

 

इसके बाद भरत ने श्रीराम को अयोध्या वापस लाने के संकल्प के साथ वन की ओर प्रस्थान किया। राम-भरत मिलाप के दौरान दोनों भाइयों के बीच प्रेम, विरह और समर्पण का मार्मिक दृश्य प्रस्तुत किया गया। भरत ने श्रीराम से अयोध्या लौटकर राजपाट संभालने की विनती की, लेकिन श्रीराम ने पिता के वचन और धर्म की मर्यादा का पालन करने की बात कही। अंत में भरत ने श्रीराम की चरणपादुकाएं स्वीकार कीं और उन्हें अयोध्या के सिंहासन पर प्रतिष्ठित कर उनके प्रतिनिधि के रूप में राज्य की सेवा करने का संकल्प लिया। चरणपादुकाएं लेकर भरत के अयोध्या लौटने के साथ लीला का समापन हुआ।

 

इन कलाकारों ने निभाई भूमिकाएं

 

लीला में श्रीराम की भूमिका मनोज अरोरा, भरत की पुलकित बांबा, शत्रुघ्न की गर्वित मुंजाल, लक्ष्मण की गौरव जग्गा, सीता की दीपक अग्रवाल, भगवान गणेश की आशीष ग्रोवर आशू, भरत के मामा की अनिल तनेजा, विशिष्ट की मनोज मुंजाल, कौशल्या की नरेश छाबड़ा, सुमित्रा की सुमित आनंद, कैकयी की संजीव आनंद और सुमंत की विशु अरोरा ने निभाई। मंच संचालन मंच सचिव विजय जग्गा और संदीप धीर ने किया।

 

इस दौरान श्रीरामलीला कमेटी के सरपरस्त पवन अग्रवाल, अध्यक्ष मनोज गाबा, महामंत्री एवं संचालक सुशील गाबा, कोषाध्यक्ष सीए अमित गंभीर, समन्वयक राजेश छाबड़ा, वरिष्ठ उपाध्यक्ष नरेश शर्मा, विजय अरोरा, हरीश अरोरा, महावीर आजाद, सचिव अमित अरोरा बोबी, विजय विरमानी, डायरेक्टर सुभाष खंडेलवाल, संदीप धीर, मंच सचिव विजय जग्गा, राकेश सुखीजा, अशोक गुम्बर, केवल कृष्ण बत्रा, अमित चावला, जगदीश टंडन, रघुवीर अरोरा, राज घई, चंद्र सचदेवा, बिट्टू ग्रोवर, रवि बठला, दिनेश कपूर, सतीश बाम्बा, कर्मचंद राजदेव, बंटी बाम्बा, कपिश सुखीजा, लवी ग्रोवर, नोनी ग्रोवर, महेश गर्ग और संजीव कामरा सहित अनेक लोग मौजूद रहे।

 

श्री रामनाटक क्लब के अध्यक्ष विशाल मुड्डी, महामंत्री गौरव तनेजा, कोषाध्यक्ष सचिन, संरक्षक मोहन लाल भुड्डी, सरपरस्त हरीश सुखीजा, प्रेम खुराना, रामकृष्ण कन्नौजिया, संजीव आनंद, गुरशरण बब्बर शरणी, निर्देशक आशीष ग्रोवर आशू, गौरव राज बेहड़, मनोज मुंजाल, अनिल तनेजा, सचिव राजकुमार कक्कड़ और रमन अरोरा समेत अन्य पदाधिकारी भी उपस्थित रहे। मंच व्यवस्था में मनोज अरोरा, सुभाष तनेजा, पंकज सुखीजा, सचिन आनंद, नरेश छाबड़ा, पुलकित बांबा, सौरभ राज बेहड़, गौरव जग्गा, सुमित आनंद, मोहन अरोरा, वैभव भुड्डी, रोहित खुराना, हर्ष अरोड़ा, अभय भुड्डी, अमन गुंबर, राज ग्रोवर, गर्वित मुंजाल, नीतीश धीर, गोगी नरूला, इदरीस गोला, अक्ष अग्रवाल, दीपक गुप्ता, शिव अग्रवाल, अग्रिम सचदेवा, सक्षम दुआ, आयुष्मान सुशील गाबा, आशमन अरोरा और अविश तनेजा ने सहयोग किया।

 

38 वर्षों से रामलीला से जुड़े हैं विजय जग्गा, संचालन से बांधते हैं समां

 

रुद्रपुर। श्रीरामलीला के मंच संचालन में अपनी विशिष्ट शैली के लिए पहचान रखने वाले विजय जग्गा पिछले 38 वर्षों से रामलीला से जुड़े हैं। वह प्रतिदिन रात नौ बजे मंच संचालन की जिम्मेदारी संभालते हैं। रामलीला मंच की नींव रखे जाने के समय वह कमेटी के महामंत्री थे और करीब 20 वर्षों तक इस दायित्व का निर्वहन किया। संचालन के दौरान वह मर्यादा बनाए रखने और विभिन्न दृश्यों का समयबद्ध मंचन सुनिश्चित करने पर विशेष ध्यान देते हैं। जग्गा ने कहा कि प्रभु श्रीराम का आशीर्वाद बना रहा तो वह पूरी निष्ठा के साथ रामलीला की सेवा करते रहेंगे।

 

दिवंगत कुक्कू शर्मा की याद में जोकर पार्टी की प्रस्तुति, नम हुईं आंखें

 

रुद्रपुर। श्रीरामलीला में जोकर पार्टी ने अपने दिवंगत साथी कुक्कू शर्मा को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। पार्टी के लीडर रामकृष्ण कन्नौजिया ने ‘जीना यहां, मरना यहां’ की धुन पर मार्मिक प्रस्तुति देकर दर्शकों को भावुक कर दिया। वर्षों तक अपनी कला से दर्शकों को हंसाने वाले कुक्कू शर्मा की स्मृतियों को याद करते हुए पूरा माहौल गमगीन हो गया।

 

प्रस्तुति के बाद श्रीरामलीला कमेटी और रामनाटक क्लब के पदाधिकारी कुक्कू शर्मा के परिजनों के साथ मंच पर पहुंचे। उन्होंने परिजनों को शॉल भेंट कर सम्मानित किया और दिवंगत कलाकार के प्रति अपनी आत्मीयता व्यक्त की। श्रद्धांजलि कार्यक्रम का आयोजन श्रीरामलीला कमेटी के महामंत्री सुशील गाबा की पहल पर किया गया। इस दौरान रामलीला और रामनाटक क्लब परिवार ने अपने दिवंगत साथी के योगदान को याद करते हुए उनके परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त की।

 

रुद्रपुर। नगर की प्राचीन बस अड्डे वाली रामलीला में भरत के अयोध्या आगमन, माता कैकयी से संवाद, श्रीराम को वापस लाने के लिए वन प्रस्थान और राम-भरत मिलाप की लीला का भावपूर्ण मंचन किया गया। कलाकारों ने सशक्त अभिनय और मार्मिक संवादों के माध्यम से भ्रातृप्रेम, त्याग, समर्पण और मर्यादा का संदेश दिया। राम-भरत मिलाप के दृश्य ने दर्शकों को भावविभोर कर दिया।

 

कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि मां वैष्णो इंटरप्राइजेज एवं सतगुरु इंटरप्राइजेज के स्वामी सूरज कालड़ा, उनकी धर्मपत्नी रेनू कालड़ा, रिद्विमा कालड़ा, लक्ष्य कालड़ा, राजकुमार नारंग, लविश नारंग, चिराग आहूजा और साहिल अरोरा ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। इस अवसर पर श्रीरामलीला कमेटी ने कालड़ा परिवार द्वारा सामाजिक एवं धार्मिक संस्थाओं को निरंतर दिए जा रहे सहयोग के लिए आभार जताया। कमेटी पदाधिकारियों ने अतिथियों का माल्यार्पण कर, शॉल ओढ़ाकर और स्मृति चिह्न भेंट कर सम्मानित किया।

 

लीला का आरंभ अयोध्या के दूत द्वारा भरत और शत्रुघ्न को उनकी ननिहाल से वापस बुलाने के दृश्य से हुआ। अयोध्या पहुंचने पर नगर में पसरे शोक को देखकर भरत व्याकुल हो उठे। माता कैकयी से पिता महाराज दशरथ के निधन, श्रीराम के वनवास और स्वयं को राजगद्दी मिलने का समाचार सुनकर वह गहरे दुख में डूब गए। उन्होंने माता के निर्णय पर रोष जताते हुए स्पष्ट किया कि बड़े भाई श्रीराम के बिना राजसिंहासन उनके लिए कोई महत्व नहीं रखता।

 

इसके बाद भरत ने श्रीराम को अयोध्या वापस लाने के संकल्प के साथ वन की ओर प्रस्थान किया। राम-भरत मिलाप के दौरान दोनों भाइयों के बीच प्रेम, विरह और समर्पण का मार्मिक दृश्य प्रस्तुत किया गया। भरत ने श्रीराम से अयोध्या लौटकर राजपाट संभालने की विनती की, लेकिन श्रीराम ने पिता के वचन और धर्म की मर्यादा का पालन करने की बात कही। अंत में भरत ने श्रीराम की चरणपादुकाएं स्वीकार कीं और उन्हें अयोध्या के सिंहासन पर प्रतिष्ठित कर उनके प्रतिनिधि के रूप में राज्य की सेवा करने का संकल्प लिया। चरणपादुकाएं लेकर भरत के अयोध्या लौटने के साथ लीला का समापन हुआ।

 

इन कलाकारों ने निभाई भूमिकाएं

 

लीला में श्रीराम की भूमिका मनोज अरोरा, भरत की पुलकित बांबा, शत्रुघ्न की गर्वित मुंजाल, लक्ष्मण की गौरव जग्गा, सीता की दीपक अग्रवाल, भगवान गणेश की आशीष ग्रोवर आशू, भरत के मामा की अनिल तनेजा, विशिष्ट की मनोज मुंजाल, कौशल्या की नरेश छाबड़ा, सुमित्रा की सुमित आनंद, कैकयी की संजीव आनंद और सुमंत की विशु अरोरा ने निभाई। मंच संचालन मंच सचिव विजय जग्गा और संदीप धीर ने किया।

 

इस दौरान श्रीरामलीला कमेटी के सरपरस्त पवन अग्रवाल, अध्यक्ष मनोज गाबा, महामंत्री एवं संचालक सुशील गाबा, कोषाध्यक्ष सीए अमित गंभीर, समन्वयक राजेश छाबड़ा, वरिष्ठ उपाध्यक्ष नरेश शर्मा, विजय अरोरा, हरीश अरोरा, महावीर आजाद, सचिव अमित अरोरा बोबी, विजय विरमानी, डायरेक्टर सुभाष खंडेलवाल, संदीप धीर, मंच सचिव विजय जग्गा, राकेश सुखीजा, अशोक गुम्बर, केवल कृष्ण बत्रा, अमित चावला, जगदीश टंडन, रघुवीर अरोरा, राज घई, चंद्र सचदेवा, बिट्टू ग्रोवर, रवि बठला, दिनेश कपूर, सतीश बाम्बा, कर्मचंद राजदेव, बंटी बाम्बा, कपिश सुखीजा, लवी ग्रोवर, नोनी ग्रोवर, महेश गर्ग और संजीव कामरा सहित अनेक लोग मौजूद रहे।

 

श्री रामनाटक क्लब के अध्यक्ष विशाल मुड्डी, महामंत्री गौरव तनेजा, कोषाध्यक्ष सचिन, संरक्षक मोहन लाल भुड्डी, सरपरस्त हरीश सुखीजा, प्रेम खुराना, रामकृष्ण कन्नौजिया, संजीव आनंद, गुरशरण बब्बर शरणी, निर्देशक आशीष ग्रोवर आशू, गौरव राज बेहड़, मनोज मुंजाल, अनिल तनेजा, सचिव राजकुमार कक्कड़ और रमन अरोरा समेत अन्य पदाधिकारी भी उपस्थित रहे। मंच व्यवस्था में मनोज अरोरा, सुभाष तनेजा, पंकज सुखीजा, सचिन आनंद, नरेश छाबड़ा, पुलकित बांबा, सौरभ राज बेहड़, गौरव जग्गा, सुमित आनंद, मोहन अरोरा, वैभव भुड्डी, रोहित खुराना, हर्ष अरोड़ा, अभय भुड्डी, अमन गुंबर, राज ग्रोवर, गर्वित मुंजाल, नीतीश धीर, गोगी नरूला, इदरीस गोला, अक्ष अग्रवाल, दीपक गुप्ता, शिव अग्रवाल, अग्रिम सचदेवा, सक्षम दुआ, आयुष्मान सुशील गाबा, आशमन अरोरा और अविश तनेजा ने सहयोग किया।

 

38 वर्षों से रामलीला से जुड़े हैं विजय जग्गा, संचालन से बांधते हैं समां

 

रुद्रपुर। श्रीरामलीला के मंच संचालन में अपनी विशिष्ट शैली के लिए पहचान रखने वाले विजय जग्गा पिछले 38 वर्षों से रामलीला से जुड़े हैं। वह प्रतिदिन रात नौ बजे मंच संचालन की जिम्मेदारी संभालते हैं। रामलीला मंच की नींव रखे जाने के समय वह कमेटी के महामंत्री थे और करीब 20 वर्षों तक इस दायित्व का निर्वहन किया। संचालन के दौरान वह मर्यादा बनाए रखने और विभिन्न दृश्यों का समयबद्ध मंचन सुनिश्चित करने पर विशेष ध्यान देते हैं। जग्गा ने कहा कि प्रभु श्रीराम का आशीर्वाद बना रहा तो वह पूरी निष्ठा के साथ रामलीला की सेवा करते रहेंगे।

 

दिवंगत कुक्कू शर्मा की याद में जोकर पार्टी की प्रस्तुति, नम हुईं आंखें

 

रुद्रपुर। श्रीरामलीला में जोकर पार्टी ने अपने दिवंगत साथी कुक्कू शर्मा को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। पार्टी के लीडर रामकृष्ण कन्नौजिया ने ‘जीना यहां, मरना यहां’ की धुन पर मार्मिक प्रस्तुति देकर दर्शकों को भावुक कर दिया। वर्षों तक अपनी कला से दर्शकों को हंसाने वाले कुक्कू शर्मा की स्मृतियों को याद करते हुए पूरा माहौल गमगीन हो गया।

 

प्रस्तुति के बाद श्रीरामलीला कमेटी और रामनाटक क्लब के पदाधिकारी कुक्कू शर्मा के परिजनों के साथ मंच पर पहुंचे। उन्होंने परिजनों को शॉल भेंट कर सम्मानित किया और दिवंगत कलाकार के प्रति अपनी आत्मीयता व्यक्त की। श्रद्धांजलि कार्यक्रम का आयोजन श्रीरामलीला कमेटी के महामंत्री सुशील गाबा की पहल पर किया गया। इस दौरान रामलीला और रामनाटक क्लब परिवार ने अपने दिवंगत साथी के योगदान को याद करते हुए उनके परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त की।

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